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कोरोना के बारे में अफवाह फैलाने वालों को वीडियो से दिया जवाब
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मोहाली। सोशल मीडिया पर कोरोना की सैंपलिंग को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों बीच लोगों का दिल जीतने के लिए जिले के सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह सोमवार को खुद आगे आए हैं। उन्होंने करीब पांच मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। इसमें जहां बीमारी को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों को दूर किया। वहीं, उन्होंने साफ किया है कि जो लोग यह काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने सभी सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक जत्थेबंदियों को महामारी से जंग के लिए एक मंच पर आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि जब हम मिलकर इस महामारी का सामना करेंगे, तभी हमारा पंजाब दोबारा खुशहाल बनेगा और मिशन फतेह कर पाएंगे।
गुमराह करने की कोशिश
सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि कोरोना संबंधी कुछ समाज विरोधी व शरारती तत्व सोशल मीडिया पर ऑडियो-वीडियो पोस्टों के माध्यम से लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा ही एक ऑडियो मोहाली सिविल अस्पताल को पोस्ट किया गया है। यह चीजें हमारे समाज के लिए नुकसानदायक ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी बन सकती है। सैंपलिंग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सैंपलिंग करने के पीछे कोशिश यही है कि बीमारी का तुरंत पता लगाकर उसके लोगों के शरीर को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इस बीमारी की अभी तक दवा नहीं बनी है। लेकिन जब उसकी पहचान हो जाती है कि तो हम विभिन्न अन्य दवाइयों व तरीकों से कोरोना के प्रभाव को कम कर लेते हैं।
पॉजिटिव केसों के सेहत विभाग को नहीं मिलते पैसे
सिविल सर्जन ने कहा कि कि हमारे सेहत विभाग के मुलाजिम व डॉक्टर खुद कोरोना टेस्ट करवाते हैं। यहां तक सीएम, सेहत मंत्री व अन्य मंत्रियों ने भी टेस्ट करवाए हैं। यह टेस्ट लोगों के अपने फायदे की बात है। उन्होंने कहा कि कहा जाता है कि लोगों को पॉजिटिव निकालने का सेहत विभाग को पैसा नहीं मिलता है। सेहत विभाग के मुलाजिम जान को खतरे में डालकर तपती धूप में पीपीई किट पहनकर लोगों के सैंपल लेते हैं। वे लगातार शहरों से लेकर गांवों में काम कर रहे हैं।
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कोरोना टेस्ट न करवाने के प्रस्ताव पास करना गलत
डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि कुछ पंचायतों व संस्थाओं की तरफ कोरोना टेस्ट न करवाने संबंधी प्रस्ताव पास किए जा रहे हैं। यह बिलकुल गैर कानूनी है। जिन लोगों ने उन्हें चुना है, वे उनके साथ धोखा कर रहे हैं। अगर लोगों को बीमारी की जानकारी जल्दी नहीं होगी तो बाद में उन्हें अस्पताल आने से ज्यादा फायदा नहीं होगा। वहीं, हो सकता है कि उस समय उन्हें न बचाया जा सके।
ऑर्गन चोरी करने की बात गलत
कोविड सेंटरों में ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन व ऑर्गन चोरी होने की बात कही जा रही है। वह भी पूरी तरह से गलत है। क्योंकि कोविड केंद्रों पर सरकार की पूरी नजर रहती है। वहां पर कई मरीज इकट्ठे होते हैं। यहां ऑर्गन ट्रांसप्लांट की बात सोची तक नहीं जा सकती है। क्योंकि ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेब और बेर जैसे नहीं है कि हम उन्हें बैग में डालकर चुरा सकते हैं। जो लोग यह अफवाह फैला रहे हैं सरकार उनके खिलाफ एक्शन लेगी।
केवल गंभीर मरीजों को भेजा जाता है अस्पताल
सिविल सर्जन ने बताया कि कुछ लोगों का कहना है कि घरों में ही मरीज ठीक हो जाते हैं, सैंपलिंग करवाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि घरों में ए सिम्टोमेटिक व माइल्ड सिम्टोमेटिक मरीज ही रखे जाते हैं। अस्पतालों में सीरियस मरीज होते हैं। इतना ही नहीं घर में रह रहे मरीजों से भी सेहत विभाग के मुलाजिम संपर्क में रहते हैं। उन्हें वीडियो कॉल कर उनका हाल चाल पूछते हैं।
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गुमराह करने की कोशिश
सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि कोरोना संबंधी कुछ समाज विरोधी व शरारती तत्व सोशल मीडिया पर ऑडियो-वीडियो पोस्टों के माध्यम से लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा ही एक ऑडियो मोहाली सिविल अस्पताल को पोस्ट किया गया है। यह चीजें हमारे समाज के लिए नुकसानदायक ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी बन सकती है। सैंपलिंग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सैंपलिंग करने के पीछे कोशिश यही है कि बीमारी का तुरंत पता लगाकर उसके लोगों के शरीर को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इस बीमारी की अभी तक दवा नहीं बनी है। लेकिन जब उसकी पहचान हो जाती है कि तो हम विभिन्न अन्य दवाइयों व तरीकों से कोरोना के प्रभाव को कम कर लेते हैं।
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पॉजिटिव केसों के सेहत विभाग को नहीं मिलते पैसे
सिविल सर्जन ने कहा कि कि हमारे सेहत विभाग के मुलाजिम व डॉक्टर खुद कोरोना टेस्ट करवाते हैं। यहां तक सीएम, सेहत मंत्री व अन्य मंत्रियों ने भी टेस्ट करवाए हैं। यह टेस्ट लोगों के अपने फायदे की बात है। उन्होंने कहा कि कहा जाता है कि लोगों को पॉजिटिव निकालने का सेहत विभाग को पैसा नहीं मिलता है। सेहत विभाग के मुलाजिम जान को खतरे में डालकर तपती धूप में पीपीई किट पहनकर लोगों के सैंपल लेते हैं। वे लगातार शहरों से लेकर गांवों में काम कर रहे हैं।
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कोरोना टेस्ट न करवाने के प्रस्ताव पास करना गलत
डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि कुछ पंचायतों व संस्थाओं की तरफ कोरोना टेस्ट न करवाने संबंधी प्रस्ताव पास किए जा रहे हैं। यह बिलकुल गैर कानूनी है। जिन लोगों ने उन्हें चुना है, वे उनके साथ धोखा कर रहे हैं। अगर लोगों को बीमारी की जानकारी जल्दी नहीं होगी तो बाद में उन्हें अस्पताल आने से ज्यादा फायदा नहीं होगा। वहीं, हो सकता है कि उस समय उन्हें न बचाया जा सके।
ऑर्गन चोरी करने की बात गलत
कोविड सेंटरों में ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन व ऑर्गन चोरी होने की बात कही जा रही है। वह भी पूरी तरह से गलत है। क्योंकि कोविड केंद्रों पर सरकार की पूरी नजर रहती है। वहां पर कई मरीज इकट्ठे होते हैं। यहां ऑर्गन ट्रांसप्लांट की बात सोची तक नहीं जा सकती है। क्योंकि ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेब और बेर जैसे नहीं है कि हम उन्हें बैग में डालकर चुरा सकते हैं। जो लोग यह अफवाह फैला रहे हैं सरकार उनके खिलाफ एक्शन लेगी।
केवल गंभीर मरीजों को भेजा जाता है अस्पताल
सिविल सर्जन ने बताया कि कुछ लोगों का कहना है कि घरों में ही मरीज ठीक हो जाते हैं, सैंपलिंग करवाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि घरों में ए सिम्टोमेटिक व माइल्ड सिम्टोमेटिक मरीज ही रखे जाते हैं। अस्पतालों में सीरियस मरीज होते हैं। इतना ही नहीं घर में रह रहे मरीजों से भी सेहत विभाग के मुलाजिम संपर्क में रहते हैं। उन्हें वीडियो कॉल कर उनका हाल चाल पूछते हैं।