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लालड़ू में दो गोशालाएं, फिर भी लावारिस पशु सड़कों पर क्यों फिरते मंडराए
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लालड़ू। शहर में नगर परिषद की दो गोशालाएं होने के बावजूद लावारिस पशु सड़कों पर मंडराए क्यों फिरते हैं। नगर परिषद और प्रशासन की इस बड़ी लापरवाही के कारण सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों के साथ हादसे होने का डर बना रहता है। इन लावारिस पशुओं के कारण हुए सड़क हादसों में कई लोगों की जान तक जा चुकी है। लेकिन प्रशासन सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं पर लगाम कसने में पूरी तरह से नाकाम है। लोगों के मन में यह बड़ा सवाल है कि शहर में दो गोशालाएं होने के बावजूद आखिर इन घूमते पशुओं को गोशाला में क्यों नहीं रखा जा रहा है। इस कारण लोगों में स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद के अधिकारियों के प्रति भारी रोष पाया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक नगर परिषद लालड़ू में 32 एकड़ में करोडों रुपये की लागत से बनी मगरा गोशाला सहित पांच एकड़ में बनी एक अन्य गोशाला भी है। ऐसे में शहर में दो गोशाला होने के बावजूद लावारिस पशुओं की भरमार लगातार बढ़ती ही जा रही है। लावारिस पशु उग्र रूप धारण कर गली मोहल्लों और बाजारों में झुंड बनाकर दिन-रात घूम रहे हैं। इसी दौरान यह लोगों पर हमला कर उन्हें जख्मी कर रहे हैं। वहीं चंडीगढ़-अंबाला नेशनल हाईवे पर भी वाहन चालकों के लिए यह पशु मौत का कारण बने हुए हैं। इन पशुओं के हमलों से अब बच्चे, बूढे़ और महिलाएं घरों से बाहर निकलने से डरती हैं। उक्त समस्या के बारे में स्थानीय लोग पिछले करीब 7 साल से नगर काउंसिल के अधिकारियों को कहते आ रहे हैं। लेकिन न तो नगर काउंसिल और न प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से उचित कदम उठाया जा रहा। इस बारे में किसान उदय राणा, उत्तम राणा, बिट्टू सहित अन्य ने बताया कि लावारिस पशु उनकी फसलों तक को तबाह कर रहे हैं। इस कारण उन्हें दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। किसानों ने बताया कि जब वे इन पशुओं को पकड़कर गोशाला में ले जाते हैं तो वे पशुओं को लेने से मना कर देते हैं। इस कारण किसानों में काफी रोष है।
बता दें कि सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के पास जिस समय पशु पालन एवं डेयरी विकास था तो उन्होंने जिला उपायुक्त के साथ कई बार गांव मगरा की गोशाला का दौरा किया था। साथ ही कैटल कैचर वाहन से लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया करवाने का वायदा किया था, लेकिन अभी तक यह काम सिरे नहीं चढ़ पाया है।
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लावारिस पशुओं से शिकार हुए लोग
2019 में 27 जुलाई को मोटरसाइकिल पर जा रहे 30 वर्षीय बजिंद्र कुमार के सामने अचानक लावारिस पशु आ जाने के कारण उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा मंजीत कौर लालड़ू मंडी को लावारिस पशु ने जोरदार टक्कर मारकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। उसको अंबाला के एक निजी अस्पताल में करीब 60-70 टांके लगवाने पड़े थे। वहीं, हाईवे पर लावारिस पशु से टकराने के बाद मोटरसाइकिल से गिरकर एक 28 वर्षीय युवक महिन्द्र सिंह निवासी उत्तराखंड एक ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके अलावा छोटू, लज्जा राम, अजमेर सिंह, भिंदी, जय देव भट्टी, निखिल, संदीप कुमार के अलावा लालड़ में अपने घर के आगे बैठे बुजुर्ग बलवंत सिंह सहित एक अन्य बुजुर्ग को लावारिस पशु के हमलों के शिकार हो चुके हैं और की जान भी जा चुकी है। इसके अलावा हाईवे से गुजर रहे दर्जनों राहगीर इन पशुओं का शिकार बन चुके हैं।
पशु पकड़ने की टीम बुलाने को लिख चुके पत्र
नगर काउंसिल लालड़ू के ईओ अशोक कुमार ने बताया कि लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए पटियाला से टीम आती है। उनको पत्र लिखा हुआ है और पिछले सप्ताह रिमाइंडर भी डाल कर सूचित किया गया है। जल्द ही लावारिस घूम रहे पशुओं को पकड़ कर गोशाला में छोड़ा जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक नगर परिषद लालड़ू में 32 एकड़ में करोडों रुपये की लागत से बनी मगरा गोशाला सहित पांच एकड़ में बनी एक अन्य गोशाला भी है। ऐसे में शहर में दो गोशाला होने के बावजूद लावारिस पशुओं की भरमार लगातार बढ़ती ही जा रही है। लावारिस पशु उग्र रूप धारण कर गली मोहल्लों और बाजारों में झुंड बनाकर दिन-रात घूम रहे हैं। इसी दौरान यह लोगों पर हमला कर उन्हें जख्मी कर रहे हैं। वहीं चंडीगढ़-अंबाला नेशनल हाईवे पर भी वाहन चालकों के लिए यह पशु मौत का कारण बने हुए हैं। इन पशुओं के हमलों से अब बच्चे, बूढे़ और महिलाएं घरों से बाहर निकलने से डरती हैं। उक्त समस्या के बारे में स्थानीय लोग पिछले करीब 7 साल से नगर काउंसिल के अधिकारियों को कहते आ रहे हैं। लेकिन न तो नगर काउंसिल और न प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से उचित कदम उठाया जा रहा। इस बारे में किसान उदय राणा, उत्तम राणा, बिट्टू सहित अन्य ने बताया कि लावारिस पशु उनकी फसलों तक को तबाह कर रहे हैं। इस कारण उन्हें दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। किसानों ने बताया कि जब वे इन पशुओं को पकड़कर गोशाला में ले जाते हैं तो वे पशुओं को लेने से मना कर देते हैं। इस कारण किसानों में काफी रोष है।
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बता दें कि सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के पास जिस समय पशु पालन एवं डेयरी विकास था तो उन्होंने जिला उपायुक्त के साथ कई बार गांव मगरा की गोशाला का दौरा किया था। साथ ही कैटल कैचर वाहन से लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया करवाने का वायदा किया था, लेकिन अभी तक यह काम सिरे नहीं चढ़ पाया है।
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लावारिस पशुओं से शिकार हुए लोग
2019 में 27 जुलाई को मोटरसाइकिल पर जा रहे 30 वर्षीय बजिंद्र कुमार के सामने अचानक लावारिस पशु आ जाने के कारण उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा मंजीत कौर लालड़ू मंडी को लावारिस पशु ने जोरदार टक्कर मारकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। उसको अंबाला के एक निजी अस्पताल में करीब 60-70 टांके लगवाने पड़े थे। वहीं, हाईवे पर लावारिस पशु से टकराने के बाद मोटरसाइकिल से गिरकर एक 28 वर्षीय युवक महिन्द्र सिंह निवासी उत्तराखंड एक ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके अलावा छोटू, लज्जा राम, अजमेर सिंह, भिंदी, जय देव भट्टी, निखिल, संदीप कुमार के अलावा लालड़ में अपने घर के आगे बैठे बुजुर्ग बलवंत सिंह सहित एक अन्य बुजुर्ग को लावारिस पशु के हमलों के शिकार हो चुके हैं और की जान भी जा चुकी है। इसके अलावा हाईवे से गुजर रहे दर्जनों राहगीर इन पशुओं का शिकार बन चुके हैं।
पशु पकड़ने की टीम बुलाने को लिख चुके पत्र
नगर काउंसिल लालड़ू के ईओ अशोक कुमार ने बताया कि लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए पटियाला से टीम आती है। उनको पत्र लिखा हुआ है और पिछले सप्ताह रिमाइंडर भी डाल कर सूचित किया गया है। जल्द ही लावारिस घूम रहे पशुओं को पकड़ कर गोशाला में छोड़ा जाएगा।