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गमाडा ने सात करोड़ जमा कर फिर बचाई बिल्डिंग
अमर उजाला मोहाली
Updated Sun, 20 Oct 2013 01:54 AM IST
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ग्रेटर मोहाली एरिया डेवपलमेंट अथॉरिटी (गमाडा) आखिरकार फिर अपनी बिल्डिंग बचाने में कामयाब रहा है। सेक्टर-81 के लिए एक्वॉयर हुई जमीन के मामले की शनिवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई।
इस दौरान गमाडा की तरफ से सात करोड़ जमा कराए गए। यह धन राशि उन जमीन मालिकों को दी गई, जिनकी जमीन एक्वॉयर की गई थी। बाकी रकम चुकाने के लिए गमाडा की ओर से समय मांगा गया। अदालत में मामले की अगली सुनवाई नवंबर-16 को तय की है।
जिला अदालत में सुनवाई के दौरान गमाडा ने दलील दी कि उनके पास मुलाजिमों की कमी है। इस कारण चलते उन्हें किसानों की जमीन संबंधी रिकॉर्ड की जांच करने में मुश्किल आ रही हैै। ऐेसे में उन्हें समय दिया जाए। अदालत ने तथ्यों को ध्यान में रखकर गमाडा को अगली सुनवाई तक बनती रकम का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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गौरतलब है कि गमाडा ने 2007 में सेक्टर-81 को बसाने के लिए कई गांवों की 276.25 एकड़ जमीन एक्वॉयर की थी। इसमें गांव चिल्लां की काफी और गांव मौली बैदवान एवं कुंभड़ा की कुछ जमीन एक्वॉयर हुई थी। इसी जगह में नॉलेज सिटी विकसित की जानी थी, परंतु गमाडा ने जमीन मालिकों को बनता मुआवजा नहीं दिया था।
मुआवजे की कुल रकम तीन सौ करोड़ से ज्यादा बनती है। जब पूरा मुआवजा नहीं मिला, तो किसानों ने कोर्ट की शरण ली। सुनवाई में कोर्ट ने पैसे न चुकाने की शर्त में गमाडा की बिल्डिंग बेचने के आदेश दिए थे। इसके बाद पांच अक्तूबर को केस की सुनवाई में गमाडा ने 50 करोड़ जमा कराए थे। जमीन मालिकों के वकील सुशील अत्री ने बताया कि गमाडा ने सारी प्रक्रिया का मजाक बनाकर रख दिया है। केवल समय बढ़ाने के लिए गमाडा की तरफ से सात करोड़ जमा कराए गए हैं।
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इस दौरान गमाडा की तरफ से सात करोड़ जमा कराए गए। यह धन राशि उन जमीन मालिकों को दी गई, जिनकी जमीन एक्वॉयर की गई थी। बाकी रकम चुकाने के लिए गमाडा की ओर से समय मांगा गया। अदालत में मामले की अगली सुनवाई नवंबर-16 को तय की है।
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जिला अदालत में सुनवाई के दौरान गमाडा ने दलील दी कि उनके पास मुलाजिमों की कमी है। इस कारण चलते उन्हें किसानों की जमीन संबंधी रिकॉर्ड की जांच करने में मुश्किल आ रही हैै। ऐेसे में उन्हें समय दिया जाए। अदालत ने तथ्यों को ध्यान में रखकर गमाडा को अगली सुनवाई तक बनती रकम का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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गौरतलब है कि गमाडा ने 2007 में सेक्टर-81 को बसाने के लिए कई गांवों की 276.25 एकड़ जमीन एक्वॉयर की थी। इसमें गांव चिल्लां की काफी और गांव मौली बैदवान एवं कुंभड़ा की कुछ जमीन एक्वॉयर हुई थी। इसी जगह में नॉलेज सिटी विकसित की जानी थी, परंतु गमाडा ने जमीन मालिकों को बनता मुआवजा नहीं दिया था।
मुआवजे की कुल रकम तीन सौ करोड़ से ज्यादा बनती है। जब पूरा मुआवजा नहीं मिला, तो किसानों ने कोर्ट की शरण ली। सुनवाई में कोर्ट ने पैसे न चुकाने की शर्त में गमाडा की बिल्डिंग बेचने के आदेश दिए थे। इसके बाद पांच अक्तूबर को केस की सुनवाई में गमाडा ने 50 करोड़ जमा कराए थे। जमीन मालिकों के वकील सुशील अत्री ने बताया कि गमाडा ने सारी प्रक्रिया का मजाक बनाकर रख दिया है। केवल समय बढ़ाने के लिए गमाडा की तरफ से सात करोड़ जमा कराए गए हैं।