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Mohali News: हड़ताल जारी, एस्मा लगाने पर भड़कीं नर्सें
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मोहाली। फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल में यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। पंजाब सरकार ने सख्ती दिखाकर आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते और ऐसा करना अवैध माना जाएगा। सोमवार को पंजाब सरकार और यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन के बीच बैठक प्रस्तावित है। धरनास्थल पर पहुंचे एम्स मोहाली के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट नवदीप सिंह सैनी ने नर्सों से ड्यूटी पर लौटने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ग्रस्त इलाकों लालड़ू, डेराबस्सी, मुबारिकपुर और बनूड़ में मेडिकल टीमों की तैनाती की गई है, इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं किया जा सकता। नर्सों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाकर कहा है कि बाढ़ तो एक महीने पहले आई थी, तब एस्मा क्यों नहीं लगाया गया? अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं तो अचानक यह कानून थोप दिया गया। शनिवार देर रात अस्पताल परिसर में नर्सों ने 4600 ग्रेड पे और वेतनमान में सुधार की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की। धरने में शामिल कई नर्स गर्भवती हैं।
आश्वासन के बाद भी नहीं कर रहे कार्रवाई
धरने में नर्सिंग एसोसिएशन की जिला प्रधान ज्योति शर्मा ने कहा कि नर्सें पिछले कई सालों से कम वेतन और असमान वेतनमान पर काम करने को मजबूर हैं। सरकार को 4600 ग्रेड पे लागू करना ही होगा। धरने में मौजूद एसोसिएशन की उपप्रधान जसकीरत सिंह और स्टाफ नर्स कमलप्रीत ने कहा कि सरकार लगातार आश्वासन देती रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब यह आंदोलन हमारी मजबूरी है, जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा।
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सेवाएं बाधित न होने का दावा
धरने पर बैठी नर्सों ने दावा किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बाधित नहीं होने दिया गया। जिला प्रधान ज्योति शर्मा ने कहा कि डीएचएस का नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी कर रहा है। हम भी बारी-बारी से अस्पताल आकर मरीजों को संभालते हैं। जनता को परेशान करना हमारा उद्देश्य नहीं है, लेकिन अपनी आवाज उठाना हमारी मजबूरी है।धरनास्थल पर शिरोमणि अकाली दल के जिला प्रधान परविंदर सिंह सोहाना भी पहुंचे। उन्होंने नर्सों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि पंजाब सरकार को नर्सों के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी जायज मांगों को टालना अन्याय होगा।
नर्सों की मुख्य मांगें
- 4600 ग्रेड पे लागू करना
- मौजूदा वेतनमान में सुधार
- लंबे समय से लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई
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उन्होंने कहा कि बाढ़ग्रस्त इलाकों लालड़ू, डेराबस्सी, मुबारिकपुर और बनूड़ में मेडिकल टीमों की तैनाती की गई है, इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं किया जा सकता। नर्सों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाकर कहा है कि बाढ़ तो एक महीने पहले आई थी, तब एस्मा क्यों नहीं लगाया गया? अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं तो अचानक यह कानून थोप दिया गया। शनिवार देर रात अस्पताल परिसर में नर्सों ने 4600 ग्रेड पे और वेतनमान में सुधार की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की। धरने में शामिल कई नर्स गर्भवती हैं।
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आश्वासन के बाद भी नहीं कर रहे कार्रवाई
धरने में नर्सिंग एसोसिएशन की जिला प्रधान ज्योति शर्मा ने कहा कि नर्सें पिछले कई सालों से कम वेतन और असमान वेतनमान पर काम करने को मजबूर हैं। सरकार को 4600 ग्रेड पे लागू करना ही होगा। धरने में मौजूद एसोसिएशन की उपप्रधान जसकीरत सिंह और स्टाफ नर्स कमलप्रीत ने कहा कि सरकार लगातार आश्वासन देती रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब यह आंदोलन हमारी मजबूरी है, जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा।
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सेवाएं बाधित न होने का दावा
धरने पर बैठी नर्सों ने दावा किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बाधित नहीं होने दिया गया। जिला प्रधान ज्योति शर्मा ने कहा कि डीएचएस का नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी कर रहा है। हम भी बारी-बारी से अस्पताल आकर मरीजों को संभालते हैं। जनता को परेशान करना हमारा उद्देश्य नहीं है, लेकिन अपनी आवाज उठाना हमारी मजबूरी है।धरनास्थल पर शिरोमणि अकाली दल के जिला प्रधान परविंदर सिंह सोहाना भी पहुंचे। उन्होंने नर्सों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि पंजाब सरकार को नर्सों के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी जायज मांगों को टालना अन्याय होगा।
नर्सों की मुख्य मांगें
- 4600 ग्रेड पे लागू करना
- मौजूदा वेतनमान में सुधार
- लंबे समय से लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई