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Mohali News: नहीं हुई झपटमारों की पहचान, अदालत से दोनों आरोपी बरी

Wed, 16 Oct 2024 03:15 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2024 03:15 AM IST
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The snatchers were not identified, both the accused were acquitted by the court
मोहाली। झपटमारी (स्नैचिंग) के एक मामले की जिला अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ आरोप तय नहीं हो पाए। इस कारण अदालत ने दोनों आरोपी बलराम सिंह और गुरजंट सिंह उर्फ हैप्पी दोनों निवासी अंबाला, जिला हरियाणा को आईपीसी की धारा 379-बी, 411 और धारा-34 के तहत उन पर लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया है। साथ ही अदालत ने अभियुक्तों के जमानतदारों को भी मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही अभियुक्तों को सीआरपीसी की धारा 437(ए) के प्रावधानों के अनुपालन में प्रत्येक को 30 हजार रुपये की राशि के जमानत बांड और समान राशि के एक जमानतदार को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि क्योंकि दोनों अभियुक्त हिरासत में हैं, अगर किसी अन्य मामले में उनकी आवश्यकता नहीं है तो उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया जाता है, दोनों अभियुक्तों की ओर से व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत किए गए, जिन्हें स्वीकार कर लिया गया। हालांकि, अभियुक्तों ने जमानत बांड प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय मांगने के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर विचार किया गया और अभियुक्तों को 10 दिनों के भीतर जमानत बांड प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई।
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पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी बलराम से बरामद पर्स में शिकायतकर्ता का आधार कार्ड था, उसे भी बरामद कर लिया है। जहां तक आरोपी गुरजंट सिंह से 2000 रुपये की बरामदगी का सवाल है, यह चोरी की गई संपत्ति साबित नहीं हो पाई। ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि बरामद की गई राशि वहीं है जो शिकायतकर्ता से छीनी गई थी। ट्रॉयल में आरोपियों की पहचान ही छीनने वालों के रूप में साबित नहीं हो पाई। पुलिस ने कथित वसूली के समय कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया। अदालत ने दलीलें सुनी और कहा कि आरोपी बलराम की निशानदेही पर शिकायतकर्ता का पर्स और आधार कार्ड बरामद होना भी संदिग्ध है। यह तर्क के मुताबिक नहीं है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के आधार कार्ड वाले खाली पर्स को छिपाया होगा, ताकि उसके पकड़े जाने पर उसके निशानदेही पर उसे बरामद किए जाने का मौका खुला रहे।
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अदालत ने कहा कि एक झपटमार की स्वाभाविक प्रवृत्ति ऐसे पर्स या आधार कार्ड को जल्द से जल्द निपटाना और उससे छुटकारा पाना होता है, जिससे उसके पकड़े जाने की संभावना कम हो। यह बहुत ही अस्वाभाविक लगता है कि एक झपटमार ऐसे सामान को छिपाएगा, जिससे वह पकड़े जाने और उसके कहने पर सामान बरामद होने के खतरे में रहेगा। इस प्रकार, अभियुक्तों को पकड़ने का तरीका और परीक्षण का सामना कर रहे अभियुक्तों की पहचान संदिग्ध होने के कारण, दोनों अभियुक्तों की निशानदेही पर बरामदगी भी अत्यधिक संदिग्ध हो जाती है। इसलिए दोनों आरोपियों को बरी किया जाता है। बता दें कि आरोपियों के खिलाफ वर्ष-2021 में थाना लालडू में आईपीसी की धारा 379बी, 411 व 34 के तहत केस दर्ज किया गया था। इस मामले की सुनवाई जिला अदालत में विचाराधीन थी।
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