विश्व की सबसे उम्रदराज महिला ने 119 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, देसी खान-पान था लंबी उम्र का राज
पांच पीढ़ियों को अपनी गोद में खिलाकर बचन कौर शुक्रवार को दुनिया से विदा हो गईं। उन्होंने नौ संतानों को जन्म दिया, जिनमें से तीन बेटियां व दो बेटे जीवित हैं। उनकी बड़ी बेटी प्रीतम कौर की उम्र 87 साल है, जबकि बड़े बेटे प्रीतम सिंह की उम्र 79 वर्ष है।
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विश्व की सबसे उम्रदराज महिला ने 119.6 वर्ष की आयु में 16 अप्रैल को अंतिम सांस ली। पंजाब के बनूड़ के निकट गांव मोटे माजरा की बचन कौर का जन्म सेना रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 1901 में हुआ था। उनके पति स्वर्गीय जीवन सिंह दोनों विश्व युद्ध का हिस्सा रहे थे। दूध और देसी घी की शौकीन बचन कौर ने बिना किसी दवा के सहारे सेहतमंद जीवन व्यतीत किया।
पांच पीढ़ियों को अपनी गोद में खिलाकर बचन कौर शुक्रवार को दुनिया से विदा हो गईं। उन्होंने नौ संतानों को जन्म दिया, जिनमें से तीन बेटियां व दो बेटे जीवित हैं। उनकी बड़ी बेटी प्रीतम कौर की उम्र 87 साल है, जबकि बड़े बेटे प्रीतम सिंह की उम्र 79 वर्ष है।
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प्रीतम सिंह सेना में सूबेदार के तौर पर सेवा निभा चुके हैं। बचन कौर के पौत्र बाब सिंह भी दो साल पहले भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बचन कौर की अंतिम यात्रा बैंड बाजों के साथ उनके गांव मोटे माजरा में निकाली गई। परिवार सहित ग्रामीणों ने बचन कौर को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी।
बचन कौर के बेटे रिटायर सूबेदार प्रीतम सिंह के मुताबिक, उनकी माता बचन कौर का जन्म 1899 में हुआ था। बचन कौर के पति जीवन सिंह ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सैनिक थे, लिहाजा सैन्य रिकॉर्ड में उनका जन्म वर्ष 1901 दर्ज है। सरकारी रिकार्ड के अनुसार, बचन कौर की आयु 119.6 वर्ष थी। वर्तमान में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जापान की 118 वर्षीय केन तनाका का नाम सबसे बुजुर्ग जीवित महिला के तहत दर्ज है। जबकि बचन कौर सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 119.6 वर्ष जीवित रहीं।
घी और दूध की शौकीन बचन कौर ने जिया स्वस्थ जीवन
बचन कौर दूध और घी की शौकीन थीं। सूबेदार प्रीतम सिंह बताते हैं कि उनकी मां दूध और देसी घी की शौकीन थीं। अंतिम समय तक ठेट ग्रामीण पंजाबी खानपान ही उनकी सेहत का राज रहा। बुजुर्गों को आमतौर पर होने वाली ब्लडप्रेशर व डायबिटीज जैसी समस्याएं भी बचन कौर को नहीं थीं।
प्रीतम सिंह बताते हैं कि कभी कभार ही बुखार या खांसी जैसी परेशानी होने पर ही उन्हें दवा देने जरूरत पड़ती थी। बढ़ती उम्र के कारण कमजोरी होने पर पिछले कुछ समय से उन्होंने काम छोड़ दिया था। इससे पहले वह खेत पर जाने, चारा लाने व दुधारू पशुओं की देखभाल जैसे काम खुद करती थीं।
बढ़ती उम्र के कारण चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत उनके छोटे बेटे अजायब सिंह उन्हें अपने साथ ही रखते थे। करीब एक साल पहले उनकी सेवा के लिए अजायब सिंह ने समय से पहले ही रिटायरमेंट ले ली थी। हाल के दिनों में बचन कौर अपने छोटे बेटे के साथ चंडीगढ़ में रह रही थीं। हालांकि अपनी इच्छा के अनुसार उन्होंने अपने गांव में ही अंतिम सांस ली।
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