{"_id":"6abad708c8956742750d65e3","slug":"the-cbi-court-convicted-more-than-40-individuals-in-10-major-cases-in-2026-mohali-news-c-289-1-pkl1068-3160-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: सीबीआई कोर्ट ने 2026 में 10 बड़े मामलों में 40 से अधिक को दोषी ठहराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: सीबीआई कोर्ट ने 2026 में 10 बड़े मामलों में 40 से अधिक को दोषी ठहराया
विज्ञापन
कोर्ट ने भ्रष्टाचार, सरकारी धन की हेराफेरी, बैंक धोखाधड़ी और घटिया अनाज खरीद जैसे मामलों में दिए महत्वपूर्ण निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े दस बड़े मामलों में फैसले सुनाए हैं। इन फैसलों में चालीस से अधिक दोषियों को सजा सुनाई गई है। इनमें सरकारी विभागों के अधिकारी, पुलिसकर्मी और कारोबारी शामिल हैं। यह आंकड़ा सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट हुए फैसलों का संकलन है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार, सरकारी धन की हेराफेरी, बैंक धोखाधड़ी और घटिया अनाज खरीद जैसे मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। पुलिस अधिकारियों से लेकर एफसीआई अफसरों तक पर कानून का डंडा चला है। इस साल 17 आरोपियों वाला एक भ्रष्टाचार मामला सबसे बड़ा फैसला रहा।
प्रमुख मामलों में पुलिस अधिकारियों को सजा
इस साल के चर्चित मामलों में 2007 का मोगा यौन उत्पीड़न घोटाला शामिल रहा। सीबीआई कोर्ट ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक दविंदर सिंह गरचा और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) परमदीप सिंह संधू को दोषी ठहराया। तत्कालीन एसएचओ रमन कुमार और इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह को भी सजा सुनाई गई। इन सभी को पांच-पांच साल की कैद और दो-दो लाख रुपये जुर्माने की सजा मिली। रमन कुमार को जबरन वसूली के लिए अतिरिक्त तीन साल की कैद भी हुई।
एफसीआई और पीडब्ल्यूडी से जुड़े भ्रष्टाचार
अप्रैल में 2005 के घटिया चावल मामले में सीबीआई कोर्ट ने ग्यारह एफसीआई अधिकारियों और दो चावल मिलरों को दोषी ठहराया। इनमें राज कुमार, आरसी पुरी, गुलाब सिंह, पीतांबर सिंह, जीपीएस कालरा, ज्ञान सिंह, डीके शर्मा, आजाद सिंह और राजेश रंजन जैसे अधिकारी शामिल थे। दोषियों को अधिकतम तीन साल तक की कठोर कैद सुनाई गई। जुलाई में एफसीआई से जुड़े दो पुराने भ्रष्टाचार मामलों में कुल सत्रह लोगों को सजा हुई। इनमें नौ एफसीआई अधिकारी थे, जिन्हें छह महीने से तीन साल तक की कठोर कैद और जुर्माने की सजा मिली। पूर्व पीडब्ल्यूडी कार्यकारी अभियंता जोगिंदर सिंह को जुलाई में 1.62 करोड़ रुपये के सरकारी कोष से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में अधिकतम पांच साल की कठोर कैद हुई। अगस्त में उन्हें बुढलाडा न्यायिक परिसर के निर्माण निविदा में अनियमितता के 18 साल पुराने मामले में एक साल की कैद और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा मिली।
विज्ञापन
अन्य महत्वपूर्ण मामलों में फैसले
जुलाई में 1991 के एक हिरासत में गायब होने के मामले में पूर्व पंजाब पुलिस हेड कांस्टेबल कश्मीर सिंह को पांच साल की कठोर कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जून में चार करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में कारोबारी समीर दुआ को तीन साल की कठोर कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई। सितंबर में धन शोधन से जुड़े मामले में तत्कालीन सब पोस्टमास्टर संजीव कुमार को डेढ़ साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा मिली। सितंबर में ही कारोबारी अनिल कुमार गुप्ता को रेलवे धोखाधड़ी मामले में 49.50 लाख रुपये की भरपाई का आदेश दिया गया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े दस बड़े मामलों में फैसले सुनाए हैं। इन फैसलों में चालीस से अधिक दोषियों को सजा सुनाई गई है। इनमें सरकारी विभागों के अधिकारी, पुलिसकर्मी और कारोबारी शामिल हैं। यह आंकड़ा सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट हुए फैसलों का संकलन है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार, सरकारी धन की हेराफेरी, बैंक धोखाधड़ी और घटिया अनाज खरीद जैसे मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। पुलिस अधिकारियों से लेकर एफसीआई अफसरों तक पर कानून का डंडा चला है। इस साल 17 आरोपियों वाला एक भ्रष्टाचार मामला सबसे बड़ा फैसला रहा।
प्रमुख मामलों में पुलिस अधिकारियों को सजा
इस साल के चर्चित मामलों में 2007 का मोगा यौन उत्पीड़न घोटाला शामिल रहा। सीबीआई कोर्ट ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक दविंदर सिंह गरचा और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) परमदीप सिंह संधू को दोषी ठहराया। तत्कालीन एसएचओ रमन कुमार और इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह को भी सजा सुनाई गई। इन सभी को पांच-पांच साल की कैद और दो-दो लाख रुपये जुर्माने की सजा मिली। रमन कुमार को जबरन वसूली के लिए अतिरिक्त तीन साल की कैद भी हुई।
विज्ञापन
एफसीआई और पीडब्ल्यूडी से जुड़े भ्रष्टाचार
अप्रैल में 2005 के घटिया चावल मामले में सीबीआई कोर्ट ने ग्यारह एफसीआई अधिकारियों और दो चावल मिलरों को दोषी ठहराया। इनमें राज कुमार, आरसी पुरी, गुलाब सिंह, पीतांबर सिंह, जीपीएस कालरा, ज्ञान सिंह, डीके शर्मा, आजाद सिंह और राजेश रंजन जैसे अधिकारी शामिल थे। दोषियों को अधिकतम तीन साल तक की कठोर कैद सुनाई गई। जुलाई में एफसीआई से जुड़े दो पुराने भ्रष्टाचार मामलों में कुल सत्रह लोगों को सजा हुई। इनमें नौ एफसीआई अधिकारी थे, जिन्हें छह महीने से तीन साल तक की कठोर कैद और जुर्माने की सजा मिली। पूर्व पीडब्ल्यूडी कार्यकारी अभियंता जोगिंदर सिंह को जुलाई में 1.62 करोड़ रुपये के सरकारी कोष से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में अधिकतम पांच साल की कठोर कैद हुई। अगस्त में उन्हें बुढलाडा न्यायिक परिसर के निर्माण निविदा में अनियमितता के 18 साल पुराने मामले में एक साल की कैद और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा मिली।
विज्ञापन
अन्य महत्वपूर्ण मामलों में फैसले
जुलाई में 1991 के एक हिरासत में गायब होने के मामले में पूर्व पंजाब पुलिस हेड कांस्टेबल कश्मीर सिंह को पांच साल की कठोर कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जून में चार करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में कारोबारी समीर दुआ को तीन साल की कठोर कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई। सितंबर में धन शोधन से जुड़े मामले में तत्कालीन सब पोस्टमास्टर संजीव कुमार को डेढ़ साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा मिली। सितंबर में ही कारोबारी अनिल कुमार गुप्ता को रेलवे धोखाधड़ी मामले में 49.50 लाख रुपये की भरपाई का आदेश दिया गया।