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Mohali News: सुखना चो का किनारा बना डपिंग ग्राउंड, नहीं हो रहा कचरे का उठान
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जीरकपुर। शहर की सफाई व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमराई हुई है। जीरकपुर के विभिन्न वार्डों और मुख्य बाजारों में गंदगी का आलम इस कदर फैला हुआ है कि स्थानीय लोग रोजाना बदबू और कचरे के ढेरों के बीच गुजरने को मजबूर हैं। पंचकूला की ओर से आने वाले ओल्ड कालका रोड पर सुखना चो के किनारे कचरे का डंपिंग ग्राउंड बना हुआ है।
स्थानीय निवासी सुधीर ढींगरा ने नाराजगी जताकर कहा कि नगर परिषद की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई इलाकों में पिछले कई दिनों से कचरा उठाने तक नहीं आया। इसके चलते कचरे के ढेर लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत करने पर अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं लेकिन जमीन पर किसी तरह की कार्रवाई नजर नहीं आती। सफाई कर्मचारी कभी-कभार आते हैं, वो भी सिर्फ दिखावा करने।
स्थानीय निवासी सतबीर ने बताया कि सफाई कर्मचारियों की अनियमित तैनाती और निगरानी की कमी ने शहर की स्थिति बेहाल कर दी है। लोग घरों से निकलते ही जगह-जगह बिखरी पॉलीथिन, प्लास्टिक की बोतलें और सड़े-गले खाद्य पदार्थों के बीच से गुजरते हैं। शहर में प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है। लोग कचरे को पॉलीथिन में भरकर नाले किनारे या सड़क के कोनों में फेंक रहे हैं, जिससे न केवल स्वच्छता प्रभावित हो रही है बल्कि बीमारी फैलने का भी डर लगा रहता है। सबसे अधिक चिंता का विषय पशुओं की स्थिति है, जो इन कचरों में खाना तलाशते रहते हैं।
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पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलीथिन खाने से मवेशियों में गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जो कई बार उनकी जान तक ले लेती हैं। इसके बावजूद नगर परिषद स्थिति को सुधारने को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रशासन नियमित सफाई, पॉलीथिन पर सख्त कार्रवाई और कचरा निस्तारण की पुख्ता व्यवस्था कराए। अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो जीरकपुर में स्वच्छता संकट और गहरा सकता है।
सफाई कर्मचारी हर दिन शहर में कचरा उठा रहे हैं। जहां भी कचरा नहीं उठा, वहां से जल्द ही उठवा कर सफाई कराई जाएगी। -परविंदर भट्टी ईओ नगर परिषद जीरकपुर
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स्थानीय निवासी सुधीर ढींगरा ने नाराजगी जताकर कहा कि नगर परिषद की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई इलाकों में पिछले कई दिनों से कचरा उठाने तक नहीं आया। इसके चलते कचरे के ढेर लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत करने पर अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं लेकिन जमीन पर किसी तरह की कार्रवाई नजर नहीं आती। सफाई कर्मचारी कभी-कभार आते हैं, वो भी सिर्फ दिखावा करने।
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स्थानीय निवासी सतबीर ने बताया कि सफाई कर्मचारियों की अनियमित तैनाती और निगरानी की कमी ने शहर की स्थिति बेहाल कर दी है। लोग घरों से निकलते ही जगह-जगह बिखरी पॉलीथिन, प्लास्टिक की बोतलें और सड़े-गले खाद्य पदार्थों के बीच से गुजरते हैं। शहर में प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है। लोग कचरे को पॉलीथिन में भरकर नाले किनारे या सड़क के कोनों में फेंक रहे हैं, जिससे न केवल स्वच्छता प्रभावित हो रही है बल्कि बीमारी फैलने का भी डर लगा रहता है। सबसे अधिक चिंता का विषय पशुओं की स्थिति है, जो इन कचरों में खाना तलाशते रहते हैं।
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पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलीथिन खाने से मवेशियों में गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जो कई बार उनकी जान तक ले लेती हैं। इसके बावजूद नगर परिषद स्थिति को सुधारने को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रशासन नियमित सफाई, पॉलीथिन पर सख्त कार्रवाई और कचरा निस्तारण की पुख्ता व्यवस्था कराए। अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो जीरकपुर में स्वच्छता संकट और गहरा सकता है।
सफाई कर्मचारी हर दिन शहर में कचरा उठा रहे हैं। जहां भी कचरा नहीं उठा, वहां से जल्द ही उठवा कर सफाई कराई जाएगी। -परविंदर भट्टी ईओ नगर परिषद जीरकपुर