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Mohali News: आतंकवादी लखबीर सिंह और साथी महिला को पांच साल की सजा, एक आरोपी बरी

Thu, 12 Sep 2024 03:57 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Sep 2024 03:57 AM IST
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Terrorist Lakhbir Singh and fellow woman sentenced to five years, one accused acquitted
मोहाली। बब्बर खालसा इंटरनेशनल आतंकवादी संगठन से जुड़े आतंकवादी लखबीर सिंह लंडा को और उसको शरण देने में दोषी सहयोगी महिला को मोहाली जिला अदालत ने गैर कानूनी गतिविधियाें में शामिल होने में दोषी पाए जाने पर पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही जुर्माना भी लगाया है। जबकि इसी मामले में एक आरोपी के खिलाफ कोर्ट में आरोप साबित न होने पर उसे बरी कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी लखबीर सिंह लंडा को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम-1967 की धारा 13 में दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा और साथ ही पांच हजार रुपये जुर्माना किया है। इसके साथ ही गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम-1967 की धारा-10 में दो साल की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना भी किया है। जुर्माना अदा न करने पर चार महीने की सजा बढ़ाई जाएगी।
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इसी आतंकी लखबीर को शरण देने में दोषी सहयोगी महिला सुरिंदर कौर उर्फ सुखप्रीत कौर को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम-1967 की धारा-19 में पांच साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर इसकी तीन महीने की सजा बढ़ाई जाएगी।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि तीसरे आरोपी सुरिंदर सिंह उर्फ सुख देओल के खिलाफ केवल आरोप हैं कि उसने आरोपी लखबीर सिंह को हथियार मुहैया कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह तथ्य कोर्ट में साबित नहीं हो सके। वहीं, सुरिंदर सिंह से कोई बरामदगी भी नहीं हुई है। इसके अलावा फाइल में कोई सबूत नहीं हैं कि लखबीर सिंह के साथ सुरिंदर सिंह उर्फ सुख देओल रहता था, इसलिए आरोपी सुरिंदर सिंह उर्फ सुख देओल ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 19 के तहत अपराध नहीं किया है।
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अदालत का फैसला

लखबीर सिंह लंडा बब्बर खालसा इंटरनेशनल नामक अनुसूची के तहत आतंकवादी संगठन का सदस्य था। आरोप था कि लखबीर सिंह खुद सुरिंदर कौर को पैसे भेज रहा था, क्योंकि वह सुरिंदर कौर के संपर्क में था और वह सुरिंदर कौर के साथ रहता था। इससे यह स्पष्ट है कि आरोपी सुरिंदर कौर भी लखबीर सिंह को शरण दे रही थी। अदालत ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 की धारा-19 में प्रावधान है कि जो कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को शरण देता है या छुपाता है या किसी व्यक्ति को शरण देने या छुपाने का प्रयास करता है, यह जानते हुए कि वह व्यक्ति आतंकवादी है, उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 19 के तहत दंडनीय माना जाएगा। इसलिए सुरिंदर कौर को सजा सुनाई गई है।


क्या था मामला

बता दें कि आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2019 में स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) ने आईपीसी की धारा 120बी, और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम-1967 की धारा 10, 13, 17, 18, 20, 38, 39, 40 के तहत केस दर्ज किया था। यह मामला जिला अदालत में विचाराधीन था। आरोप था कि एसएसओसी को गुप्त सूचना मिली थी कि लखबीर सिंह लंडा दुबई में रह रहा है और उसके परमजीत सिंह उर्फ पम्मा (यूके) से संबंध हैं, जो बब्बर खालसा इंटरनेशनल आतंकवाबी संगठन का सदस्य है। वह पंजाब में आतंकवाद को फिर से स्थापित करना चाहता है और उसकी आईएसआई के साथ साजिश है और उसने पंजाब के लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए लखबीर सिंह को पंजाब भेजा था। 4 नवंबर 2019 को उसे मोहाली एयरपोर्ट की पार्किंग से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद लखबीर सिंह से पूछताछ की गई और उसने खुलासा किया कि उसने भारत में उपद्रव पैदा करने के लिए हरजिंदर सिंह उर्फ रड्डू के साथ साजिश रची है। कहा कि हरजिंदर सिंह उर्फ रड्डू आरोपी लखबीर सिंह की मदद करने के लिए तैयार था। पूछताछ के दौरान लखबीर सिंह ने खुलासा किया कि सुरिंदर सिंह उर्फ सुख देओल उर्फ जसविंदर सिंह भी उसके साथ मिला हुआ था और उसे भरोसा दिलाया गया था कि वह उसे हथियार मुहैया करवाएगा। इसके बाद सुरिंदर सिंह उर्फ सुख देओल को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया।
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