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Mohali News: फेज-1 में आवारा कुत्तों का आतंक, झुंड बनाकर करते हैं हमला, जिले में चार माह में 1,800 को काटा
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मोहाली। फेज-1 में आवारा कुत्तों से सभी लोग आतंकित हैं। देर रात एक फूड डिलिवरी बॉय पर कुत्तों के झंड ने हमला कर दिया। कुत्तों ने युवक को जगह-जगह काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना ने न सिर्फ इलाके में दहशत फैला दी, बल्कि नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। चार माह में 1,800 से ज्यादा डॉग बाइट के मामले सामने आ गए हैं। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में कुत्तों के झुंडों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 10–15 कुत्तों का समूह अक्सर गलियों, पार्कों और मार्केट के बाहर घूमता दिख जाता है। सुबह ऑफिस जाने वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। कई बार लोग बाइक या स्कूटी से गुजरते हुए इन कुत्तों के पीछे दौड़ने पर गिरकर घायल हो चुके हैं। महिलाएं और बुजुर्ग बताते हैं कि हर कदम पर अब डर बैठ गया है, क्योंकि कुत्ते अचानक आकर भौंकने लगते हैं या पीछा करने लगते हैं।
डंडा लिए बिना बाहर नहीं निकलते
फेज-1 में रहने वाले बुजुर्गों का कहना है कि अब बिना डंडा हाथ में लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि कई बार ये कुत्ते उनके हाथों में पकड़े सामान पर भौंकते हैं या बैग छीनने जैसी हरकत करते हैं। रात में कुत्तों के भौंकने और रोने का सिलसिला चलता रहता है, जिससे लोगों की नींद तक प्रभावित हो रही है। गली-नालियों के पास पड़े कूड़े के ढेर और खुले में फेंका जा रहा जो कुत्तों को आकर्षित कर रहे हैं। जहां ज्यादा कूड़ा जमा रहता है, वहां कुत्तों का स्थायी जमावड़ा बना रहता है।
नसबंदी अधूरी, संख्या बढ़ने का खतरा
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ महीने पहले नगर निगम की टीम आवारा कुत्तों को पकड़कर ले गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों में कई कुत्तों को वापस छोड़ दिया गया। बड़े पार्क में कुत्ते के आठ पिल्ले पैदा हुए हैं। इससे आने वाले समय में वहां कुत्तों की संख्या बढ़ने की आशंका है। लोगों का कहना है कि टीकाकरण और नसबंदी का काम आधे-अधूरे तरीके से किया जाता है, जिसका नतीजा है कि समस्या काबू में आने के बजाय बढ़ती जा रही है।
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महीना कुल मामले कुत्तों के काटे मामले
नवंबर (1-20) 336 272
अक्टूबर 512 372
सितंबर 441 381
अगस्त 537 454
हम इस समस्या से बहुत परेशान हैं। हर हाउस मीटिंग में यह मुद्दा उठता है, लेकिन विपक्षी होने के कारण हमारी बातों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इलाके में कुछ लोग आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, जिससे आस-पड़ोस के लोगों में बहस और तनाव की स्थिति बन जाती है।
- गुरमीत कौर, पार्षद
नगर निगम लगातार आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई कर रहा है। इनके टीकाकरण व नसबंदी की प्रक्रिया भी नियमित रूप से जारी है। - डॉ. संजीव कंबोज, एमओ, नगर निगम
केस–1
फेज-1 निवासी जसपाल सिंह बताते हैं कि उनकी बेटी स्कूटी पर घर लौट रही थी। पीछे उनकी 10 वर्षीय दोहती बैठी थी। रास्ते में अचानक कुत्तों के झुंड ने स्कूटी का पीछा किया और एक कुत्ते ने बच्ची की टांग पकड़ ली। जसपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने बड़ी मुश्किल से उसे छुड़वाया, नहीं तो गंभीर हादसा हो सकता था।
केस–2
स्थानीय निवासी प्रदीप धीमान ने बताया कि करीब दो महीने पहले एक जोमैटो डिलीवरी बॉय रात को खाना देने आया था। गली में मौजूद कुत्तों ने उसे घेर लिया और जगह-जगह काट लिया। लोगों ने किसी तरह उसे बचाया, नहीं तो उसकी जान जा सकती थी। घटना के बाद घायल युवक को जब सरकारी अस्पताल फेज-6 ले जाया गया तो वहां रेबीज का टीका उपलब्ध नहीं था। बाद में उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पांच टीके लगाए गए।
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डंडा लिए बिना बाहर नहीं निकलते
फेज-1 में रहने वाले बुजुर्गों का कहना है कि अब बिना डंडा हाथ में लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि कई बार ये कुत्ते उनके हाथों में पकड़े सामान पर भौंकते हैं या बैग छीनने जैसी हरकत करते हैं। रात में कुत्तों के भौंकने और रोने का सिलसिला चलता रहता है, जिससे लोगों की नींद तक प्रभावित हो रही है। गली-नालियों के पास पड़े कूड़े के ढेर और खुले में फेंका जा रहा जो कुत्तों को आकर्षित कर रहे हैं। जहां ज्यादा कूड़ा जमा रहता है, वहां कुत्तों का स्थायी जमावड़ा बना रहता है।
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नसबंदी अधूरी, संख्या बढ़ने का खतरा
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ महीने पहले नगर निगम की टीम आवारा कुत्तों को पकड़कर ले गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों में कई कुत्तों को वापस छोड़ दिया गया। बड़े पार्क में कुत्ते के आठ पिल्ले पैदा हुए हैं। इससे आने वाले समय में वहां कुत्तों की संख्या बढ़ने की आशंका है। लोगों का कहना है कि टीकाकरण और नसबंदी का काम आधे-अधूरे तरीके से किया जाता है, जिसका नतीजा है कि समस्या काबू में आने के बजाय बढ़ती जा रही है।
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महीना कुल मामले कुत्तों के काटे मामले
नवंबर (1-20) 336 272
अक्टूबर 512 372
सितंबर 441 381
अगस्त 537 454
हम इस समस्या से बहुत परेशान हैं। हर हाउस मीटिंग में यह मुद्दा उठता है, लेकिन विपक्षी होने के कारण हमारी बातों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इलाके में कुछ लोग आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, जिससे आस-पड़ोस के लोगों में बहस और तनाव की स्थिति बन जाती है।
- गुरमीत कौर, पार्षद
नगर निगम लगातार आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई कर रहा है। इनके टीकाकरण व नसबंदी की प्रक्रिया भी नियमित रूप से जारी है। - डॉ. संजीव कंबोज, एमओ, नगर निगम
केस–1
फेज-1 निवासी जसपाल सिंह बताते हैं कि उनकी बेटी स्कूटी पर घर लौट रही थी। पीछे उनकी 10 वर्षीय दोहती बैठी थी। रास्ते में अचानक कुत्तों के झुंड ने स्कूटी का पीछा किया और एक कुत्ते ने बच्ची की टांग पकड़ ली। जसपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने बड़ी मुश्किल से उसे छुड़वाया, नहीं तो गंभीर हादसा हो सकता था।
केस–2
स्थानीय निवासी प्रदीप धीमान ने बताया कि करीब दो महीने पहले एक जोमैटो डिलीवरी बॉय रात को खाना देने आया था। गली में मौजूद कुत्तों ने उसे घेर लिया और जगह-जगह काट लिया। लोगों ने किसी तरह उसे बचाया, नहीं तो उसकी जान जा सकती थी। घटना के बाद घायल युवक को जब सरकारी अस्पताल फेज-6 ले जाया गया तो वहां रेबीज का टीका उपलब्ध नहीं था। बाद में उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पांच टीके लगाए गए।