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Mohali: हर मुसीबत पार कर दी कल्पनाओं को उड़ान, लड़कों के मुकाबले मोहाली की लड़कियां खेल और कला में आगे
Tue, 24 Jan 2023 11:38 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली/जीरकपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली/जीरकपुर
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 24 Jan 2023 11:38 AM IST
सार
अब लड़कियों को लेकर लोगों की सोच में भी बदलाव आने लगा है। लड़कों के मुकाबले लड़कियां खेलों और कला के मामले में सबसे आगे नजर आती हैं। वह हर मुसीबत पार कर अपनी कल्पनाओं को उड़ान दे रही हैं।
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मनदीप और जश्नप्रीत
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
देश में बहुसंख्यक लड़कियों द्वारा सामना की जाने वाली असमानताओं, शिक्षा, पोषण, कानूनी अधिकारों, चिकित्सा देखभाल और बालिकाओं की सुरक्षा आदि के महत्व को उजागर करने के लिए हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। वहीं, अब लड़कियों को लेकर लोगों की सोच में भी बदलाव आने लगा है। लड़कों के मुकाबले लड़कियां खेलों और कला के मामले में सबसे आगे नजर आती हैं। वह हर मुसीबत पार कर अपनी कल्पनाओं को उड़ान दे रही हैं। शहर में भले ही बड़े-बड़े प्राइवेट स्कूल हों लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली जिले की लड़कियां हर मुसीबत को पार करते हुए अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं।
चित्रकारी से लगे सपनों को पंख
बचपन से चित्रकारी करने का शौक था। कोरोना के बीच अपनी कला को निखारने का मौका नहीं मिला था लेकिन जैसे ही स्कूल शुरू हुआ तो शिक्षक ने मदद की। पहली बार जब गणेश की मूर्ति बनाई थी तो मुझे मेरे शिक्षक और दोस्तों ने सराहा। इसके बाद और मेहनत की और थ्रीडी विजुअल आर्ट में हाथ आजमाया। इसके चलते नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिला। जनवरी में भुवनेश्वर में हुए कला उत्सव में जाने के लिए पंजाब के 20 छात्रों को चुना गया था जिसमें उसका नाम शामिल था। जहां यह पर पंजाबी मुटियार की मूर्ति बनाई थी। मैंने कोई पुरस्कार तो नहीं जीता लेकिन वहां पहुंच कर और छात्रों की कला को देखकर बहुत कुछ सीखा। - मनदीप कौर, छात्रा 11वीं, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल 3बी1
नेशनल मुकाबले में जश्न दिखाएगी टशन
हमारा स्कूल मोहाली में आता है लेकिन वह शहर से थोड़ा दूर है। स्कूल में हमें हर तरह की शिक्षा दी जाती है। वहीं, जो छात्रा जिस कला में अच्छी है उसे प्रोत्साहित भी किया जाता है। हमारे गांव में लड़कियों को बारहवीं के बाद पढ़ाया नहीं जाता। इन हालात में भी में देश के लिए कुछ करना चाहती हूं। मुझे वेटलिफ्टिंग का शौक है। छोटे होने से मैंने इस खेल को देखा है। इसमें ही कॅरिअर बनाना चाहती हूं। ‘खेडां वतन दीयां’ के कारण खेलने का मौका मिला। हमेशा हरियाणा की लड़कियों का ही नाम वेटलिफ्टिंग में आगे रहता है। अभी मेरा सिलेक्शन नेशनल गेम के लिए हो गया है। मैं अपने गांव की पहली लड़की हूं जिसका नेशनल के लिए सिलेक्शन हुआ है। -जश्नप्रीत कौर, छात्रा 12वीं, जीएमएसएसएस स्कूल गोबिंदगढ़
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चित्रकारी से लगे सपनों को पंख
बचपन से चित्रकारी करने का शौक था। कोरोना के बीच अपनी कला को निखारने का मौका नहीं मिला था लेकिन जैसे ही स्कूल शुरू हुआ तो शिक्षक ने मदद की। पहली बार जब गणेश की मूर्ति बनाई थी तो मुझे मेरे शिक्षक और दोस्तों ने सराहा। इसके बाद और मेहनत की और थ्रीडी विजुअल आर्ट में हाथ आजमाया। इसके चलते नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिला। जनवरी में भुवनेश्वर में हुए कला उत्सव में जाने के लिए पंजाब के 20 छात्रों को चुना गया था जिसमें उसका नाम शामिल था। जहां यह पर पंजाबी मुटियार की मूर्ति बनाई थी। मैंने कोई पुरस्कार तो नहीं जीता लेकिन वहां पहुंच कर और छात्रों की कला को देखकर बहुत कुछ सीखा। - मनदीप कौर, छात्रा 11वीं, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल 3बी1
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नेशनल मुकाबले में जश्न दिखाएगी टशन
हमारा स्कूल मोहाली में आता है लेकिन वह शहर से थोड़ा दूर है। स्कूल में हमें हर तरह की शिक्षा दी जाती है। वहीं, जो छात्रा जिस कला में अच्छी है उसे प्रोत्साहित भी किया जाता है। हमारे गांव में लड़कियों को बारहवीं के बाद पढ़ाया नहीं जाता। इन हालात में भी में देश के लिए कुछ करना चाहती हूं। मुझे वेटलिफ्टिंग का शौक है। छोटे होने से मैंने इस खेल को देखा है। इसमें ही कॅरिअर बनाना चाहती हूं। ‘खेडां वतन दीयां’ के कारण खेलने का मौका मिला। हमेशा हरियाणा की लड़कियों का ही नाम वेटलिफ्टिंग में आगे रहता है। अभी मेरा सिलेक्शन नेशनल गेम के लिए हो गया है। मैं अपने गांव की पहली लड़की हूं जिसका नेशनल के लिए सिलेक्शन हुआ है। -जश्नप्रीत कौर, छात्रा 12वीं, जीएमएसएसएस स्कूल गोबिंदगढ़
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मान्या ने केबीसी-11 में चमकाया इलाके का नाम, मां-पिता बोले- बेटी ही है हमारी शान
हर मां-बाप का सपना होता है कि उनके बच्चे उनका नाम रोशन करें। जीरकपुर के वीआईपी रोड पर रहने वाली 11 साल की मान्या चमोली ने अपने माता-पिता के साथ शहर व स्कूल का का नाम भी रोशन किया है। मान्या चमोली हाल ही में मुंबई में केबीसी-11 में हिस्सा लेनी गई थी और अमिताभ बच्चन के सवालों का पटाक से जवाब देकर उन्हें भी हैरान कर दिया था।
मान्या की मां अर्चना चमोली और पिता विनय चमोली ने बताया कि बेटी ने केबीसी-11 में 25 लाख रुपये की राशि भी जीती है जो 18 वर्ष की होने के बाद मान्या को मिल जाएगी। मान्या पर उसके माता-पिता व स्कूल को बहुत नाज है। वह छोटी उम्र में इतनी ऊंचाइयों पर पहुंच गई है कि उसे हर कोई जानता है। इसके पीछे मान्या का तेज दिमाग व उसकी व उसके माता-पिता की कड़ी मेहनत है। उसका सपना है कि वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करे। इसके साथ ही वह एक एनजीओ बनाकर समाजसेवा भी करना चाहती है।
पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी आगे
मान्या की मां अर्चना चमोली ने बताया कि वह पिछले करीब पांच साल से ओलंपियाड जीके में हिस्सा लेती आ रही है और कई पदक जीत चुकी है। वह पढ़ाई के साथ-साथ बाकी गतिविधियों में भी आगे रहती है। वह संगीत के साथ डांस करने का भी शौक रखती है। उसे किताबें, अखबार पढ़ना और बैडमिंटन खेलना पसंद है। जीके की बुक्स पढ़ना बेहद पसंद है।
खेल-खेल में काफी कुछ सीख जाती है मान्या
मां अर्चना ने बताया कि घर में जब वह कोई भी अच्छी जानकारी के बारे में बात करते हैं तो मान्या को साथ बिठा लेते हैं। उसको कोई स्पेशल ट्रेनिंग या क्लास नहीं दी। मान्या को खुद को शौक है जिस कारण वह किताबें पढ़ती रहती है और आज तक उसने ट्यूशन नहीं ली है। मान्या सुबह साढ़े छह बजे उठती है। तीन बजे स्कूल से आकर खाना खाने के बाद पढ़ाई थोड़ा आराम करने के बाद पढ़ाई में लग जाती है। नौ बजे तक पढ़ाई करने के बाद खबरों व जानकारी वाले एपिसोड देखकर 11 बजे सो जाती है। वह खेल-खेल में ही काफी कुछ सीख जाती है जो हमारे लिए गर्व की बात है।
हॉट सीट तक नहीं पहुंच पाई थी मान्या की मां
इससे पहले वर्ष 2017 में मान्या की मां अर्चना चमोली भी कौन बनेगा करोड़पति के लिए क्वालीफाई हो गई थी, मगर हॉट सीट तक नहीं पहुंच पाई थी।
हर मां-बाप का सपना होता है कि उनके बच्चे उनका नाम रोशन करें। जीरकपुर के वीआईपी रोड पर रहने वाली 11 साल की मान्या चमोली ने अपने माता-पिता के साथ शहर व स्कूल का का नाम भी रोशन किया है। मान्या चमोली हाल ही में मुंबई में केबीसी-11 में हिस्सा लेनी गई थी और अमिताभ बच्चन के सवालों का पटाक से जवाब देकर उन्हें भी हैरान कर दिया था।
मान्या की मां अर्चना चमोली और पिता विनय चमोली ने बताया कि बेटी ने केबीसी-11 में 25 लाख रुपये की राशि भी जीती है जो 18 वर्ष की होने के बाद मान्या को मिल जाएगी। मान्या पर उसके माता-पिता व स्कूल को बहुत नाज है। वह छोटी उम्र में इतनी ऊंचाइयों पर पहुंच गई है कि उसे हर कोई जानता है। इसके पीछे मान्या का तेज दिमाग व उसकी व उसके माता-पिता की कड़ी मेहनत है। उसका सपना है कि वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करे। इसके साथ ही वह एक एनजीओ बनाकर समाजसेवा भी करना चाहती है।
पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी आगे
मान्या की मां अर्चना चमोली ने बताया कि वह पिछले करीब पांच साल से ओलंपियाड जीके में हिस्सा लेती आ रही है और कई पदक जीत चुकी है। वह पढ़ाई के साथ-साथ बाकी गतिविधियों में भी आगे रहती है। वह संगीत के साथ डांस करने का भी शौक रखती है। उसे किताबें, अखबार पढ़ना और बैडमिंटन खेलना पसंद है। जीके की बुक्स पढ़ना बेहद पसंद है।
खेल-खेल में काफी कुछ सीख जाती है मान्या
मां अर्चना ने बताया कि घर में जब वह कोई भी अच्छी जानकारी के बारे में बात करते हैं तो मान्या को साथ बिठा लेते हैं। उसको कोई स्पेशल ट्रेनिंग या क्लास नहीं दी। मान्या को खुद को शौक है जिस कारण वह किताबें पढ़ती रहती है और आज तक उसने ट्यूशन नहीं ली है। मान्या सुबह साढ़े छह बजे उठती है। तीन बजे स्कूल से आकर खाना खाने के बाद पढ़ाई थोड़ा आराम करने के बाद पढ़ाई में लग जाती है। नौ बजे तक पढ़ाई करने के बाद खबरों व जानकारी वाले एपिसोड देखकर 11 बजे सो जाती है। वह खेल-खेल में ही काफी कुछ सीख जाती है जो हमारे लिए गर्व की बात है।
हॉट सीट तक नहीं पहुंच पाई थी मान्या की मां
इससे पहले वर्ष 2017 में मान्या की मां अर्चना चमोली भी कौन बनेगा करोड़पति के लिए क्वालीफाई हो गई थी, मगर हॉट सीट तक नहीं पहुंच पाई थी।