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फौजी की विधवा ने 35 साल बाद जीती पेंशन की जंग

Sat, 14 May 2022 01:24 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sat, 14 May 2022 01:24 AM IST
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Solder widow won the battle for pension after 35 years
मोहाली। पैंतीस साल के लंबे संघर्ष के बाद एक फौजी की विधवा बेअंत कौर को पति की पेंशन नसीब हुई है। यह केस 1978-1979 के एशियाई खेलों में (26 किलोमीटर वॉक) लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने हवलदार हाकम सिंह से संबंधित है। परिवार को उनका हक दिलाने में एक्स-सर्विसमैन ग्रीवासेंस सेल के प्रधान रिटायर कर्नल एसएस सोही ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि वह फौजियों के हकों के लिए आगे भी लड़ते रहेंगे।
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हवलदार हाकम सिंह छठी सिख रेजिमेंट में तैनात थे। वह अच्छे खिलाड़ी थे। इतना ही नहीं, रेजिमेंट में इनका अच्छा रुतबा था। दो बार स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद उन्हें विशेष पदोन्नति नहीं दी गई। ऐसे में वह रेजिमेंट से खुश नहीं थे। किसी बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने उनके खिलाफ कोर्ट मार्शल बिठा दिया। उस समय वह अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें उच्चाधिकारियों ने कहा कि क्या वह कोर्ट मार्शल का सामना करेंगे या सीधे घर जाएंगे। ऐसे में उन्होंने घर जाने की बात कही। उन्होंने सेना में 1972 से 87 तक सेवाएं दी थीं।
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घर पहुंचने पर पेंशन नहीं दीं, बच्चों का हुुुआ बुरा हाल
कर्नल सोही ने बताया कि असली मुश्किल तो घर आने के बाद शुरू हुई। सेना ने हाकम सिंह को पेंशन नहीं दी। हालांकि उनका कार्यकाल पंद्रह साल का हो गया था। सेना ने बीच में एक बार गैर-हाजिर रहने की दलील देकर पेंशन देने से मना कर दिया। इस दौरान हाकम सिंह ने शराब पीना शुरू कर दिया। जिंदगी खराब होती चली। जब उन्हें इस बारे में पता चला तो 2015 में उन्होंने आर्मी ट्रिब्यूनल में केस दायर किया। 2018 में फैसला हाकम सिंह के हक में आया। फिर उन्हें बीस फीसदी भाव पचास फीसदी दिव्यांगता पेंशन लगा दी। इसके खिलाफ लगातार आर्मी हेड क्वार्टर लीगल ब्रांच ने हाकम सिंह के खिलाफ याचिका दायर कर दी। उनकी अपीलों की वजह से हाकम सिंह को न तो पूर्व फौजी का स्टेटस मिला और न ही उनका ईसीएचएस का कार्ड बना। उनके दोनों बच्चे पढ़ाई तक नहीं कर पाए और बेरोजगार रह गए। हाकम सिंह की हालत जब ज्यादा खराब हो गई तो उन्होंने इसकी सूचना फौज को दी। इसके बाद उन्हें संगरूर से दिल्ली के अस्पताल में दाखिल करवाने के लिए सेना ने हेलिकॉप्टर भेजा। डॉक्टरों ने कहा कि हाकम सिंह की हालत नाजुक है और उन्हें यही रहने दिया जाए। चौदह अगस्त 2018 को उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दौरान आर्मी हेड क्वार्टर के लीगल सेल के खिलाफ केस दायर किया। आर्मी हेड क्वार्टर इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।
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हर बार पूर्व फौजी के खिलाफ रही सेेना
कर्नल सोही ने कहा कि ग्रीवासेंस सेल ने सेेना को हाकम सिंह की विधवा को फेमिली पेंशन देने के लिए कहा था लेकिन सेना ने पेंशन देने के बजाय फिर से इसके खिलाफ केस लड़ा लेकिन इस बार सेना के हाथ निराशा लगी। आर्मी हेडक्वार्टर की याचिका को रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अब परिवार को पेंशन मिलेगी। फौजी की विधवा को चौदह हजार पेंशन के साथ दस साल का एरियर भी दिया जाएगा। उन्होंने इस पर खुशी जताई।
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