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हाईवे किनारे काटी सात अवैध कॉलोनियां, गमाडा ने गिराए निर्माण
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मोहाली। चुनाव आचार संहिता लगने के बाद कॉलोनाइरों की ओर से चंडीगढ़-रूपनगर हाईवे के किनारे गांव घटौर में सात अवैध कॉलोनियां काट दी गई। इतना ही नहीं लोगों से लाखों रुपये लेकर प्लॉट तक बेच दिए गए। इसके बाद यहां पर लोगों ने लाखों रुपये खर्च करके अपने मकान भी बनाने शुरू कर दिए थे। लेकिन मंगलवार को जैसे ही इसकी भनक गमाडा को लगी तो गमाडा के अधिकारी कर्मचारियों की टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और जेसीबी की मदद से यहां पर बनाए गए 30 अवैैध निर्माण गिरा दिए। इस दौरान कॉलोनियों को जाने वाले रास्ते तक उखाड़ दिए गए और साथ ही कॉलोनी काटने वाले कॉलोनाइजर के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी गई है। इस मौके पर गमाडा के अधिकारी वरुण कुमार ने बताया कि किसी भी कीमत पर अवैध कालोनियां नहीं काटने दी जाएंगी। नियम तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक कॉलोनाइजरों ने लोगों को चंडीगढ़ और मोहाली जैसी सुविधाएं देने के सपने दिखाकर यहां पर प्लॉट बेचे हैं। साथ ही लोगों को यहां पर अति आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया था। इनके चक्कर में हिमाचल, पंजाब और अन्य राज्यों के लोग आकर फंस गए थे। गमाडा के अधिकारियों के मुताबिक इन कॉलोनाइजरों ने किसी भी तरह की कोई अनुमति गमाडा से नहीं ली थी और पूरी योजना बनाकर यह कॉलोनियां काटी गई थी। जबकि यह पूरी जमीन खेतीबाड़ी की है। गमाडा की टीम ने जो निर्माण गिराए हैं इस कार्रवाई की वीडियोग्राफी करवाई गई है। लोगों को भी हिदायत दी गई है कि वह यहां पर निर्माण न करें और उनको समझाया गया है कि वह किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले गमाडा की वेबसाइट जरूर देखें। इस पर गमाडा से मंजूर सभी कॉलोनियां की सूची है। जिससे लोगों के साथ धोखा होने से रोका जा सके।
न्यू चंडीगढ़ में भी काटी थी अवैध कॉलोनी
इससे पहले न्यू चंडीगढ़ के नजदीक भी एक नामी कंपनी ने गमाडा से मंजूरी लिए बगैर अवैध कालोनी काट दी थी। इस कंपनी की ओर से बाकायदा स्कीम निकालकर यहां पर लोगों को प्लॉट तक बेचे गए थे। कंपनी ने बहुत से लोगों को यहां पर लाखों के प्लॉट बेचकर उनके साथ धोखा किया था। इसके बाद जैसे ही गमाडा को इस बारे में पता चला था तो गमाडा ने यहां पर किए गए निर्माण गिरा दिए थे। इसके साथ ही कॉलोनी मालिक के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी गई थी। जबकि अभी तक भी कॉलोनाइजर लोगों के पैसे नहीं लौटा पाया है।
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सड़कें, सीवरेज और नक्शों पर न जाएं
शहर में प्रॉपर्टी का कारोबार करने वाले अमित गुप्ता बताते हैं कि किसी भी इलाके में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसकी अच्छी तरह पड़ताल करें कि वह गमाडा या नगर काउंसिल के अधीन आती है या नहीं। इसके लिए संबंधित एजेंसियों के दफ्तर में जाकर संपर्क कर सकते हैं। इसके बाद आगे की प्रक्रिया करनी चाहिए। उनका मानना है कि अवैध कॉलोनी काटने वाले काफी शातिर होते हैं। यह लोग कॉलोनी में अच्छी सड़कें, सीवरेज और नक्शे आदि लोगों को दिखाते हैं। लेकिन विभाग की ओर से इनकी मंजूरी की कोई बात नहीं की जाती।
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जानकारी के मुताबिक कॉलोनाइजरों ने लोगों को चंडीगढ़ और मोहाली जैसी सुविधाएं देने के सपने दिखाकर यहां पर प्लॉट बेचे हैं। साथ ही लोगों को यहां पर अति आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया था। इनके चक्कर में हिमाचल, पंजाब और अन्य राज्यों के लोग आकर फंस गए थे। गमाडा के अधिकारियों के मुताबिक इन कॉलोनाइजरों ने किसी भी तरह की कोई अनुमति गमाडा से नहीं ली थी और पूरी योजना बनाकर यह कॉलोनियां काटी गई थी। जबकि यह पूरी जमीन खेतीबाड़ी की है। गमाडा की टीम ने जो निर्माण गिराए हैं इस कार्रवाई की वीडियोग्राफी करवाई गई है। लोगों को भी हिदायत दी गई है कि वह यहां पर निर्माण न करें और उनको समझाया गया है कि वह किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले गमाडा की वेबसाइट जरूर देखें। इस पर गमाडा से मंजूर सभी कॉलोनियां की सूची है। जिससे लोगों के साथ धोखा होने से रोका जा सके।
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न्यू चंडीगढ़ में भी काटी थी अवैध कॉलोनी
इससे पहले न्यू चंडीगढ़ के नजदीक भी एक नामी कंपनी ने गमाडा से मंजूरी लिए बगैर अवैध कालोनी काट दी थी। इस कंपनी की ओर से बाकायदा स्कीम निकालकर यहां पर लोगों को प्लॉट तक बेचे गए थे। कंपनी ने बहुत से लोगों को यहां पर लाखों के प्लॉट बेचकर उनके साथ धोखा किया था। इसके बाद जैसे ही गमाडा को इस बारे में पता चला था तो गमाडा ने यहां पर किए गए निर्माण गिरा दिए थे। इसके साथ ही कॉलोनी मालिक के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी गई थी। जबकि अभी तक भी कॉलोनाइजर लोगों के पैसे नहीं लौटा पाया है।
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सड़कें, सीवरेज और नक्शों पर न जाएं
शहर में प्रॉपर्टी का कारोबार करने वाले अमित गुप्ता बताते हैं कि किसी भी इलाके में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसकी अच्छी तरह पड़ताल करें कि वह गमाडा या नगर काउंसिल के अधीन आती है या नहीं। इसके लिए संबंधित एजेंसियों के दफ्तर में जाकर संपर्क कर सकते हैं। इसके बाद आगे की प्रक्रिया करनी चाहिए। उनका मानना है कि अवैध कॉलोनी काटने वाले काफी शातिर होते हैं। यह लोग कॉलोनी में अच्छी सड़कें, सीवरेज और नक्शे आदि लोगों को दिखाते हैं। लेकिन विभाग की ओर से इनकी मंजूरी की कोई बात नहीं की जाती।