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Mohali News: बच्चों के लिवर पर खतरा, शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

Fri, 30 Oct 2026 02:16 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2026 02:16 AM IST
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Risk to children's livers; ignoring early symptoms could prove costly
मोहाली। बच्चों की सेहत से जुड़ी कई बीमारियां शुरुआत में सामान्य परेशानी जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन लिवर के मामले में लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। आंखों में पीलापन, लगातार उल्टी, असामान्य सुस्ती या शिशु में लंबे समय तक पीलिया बने रहने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। खासकर 12 साल से कम उम्र के बच्चों में लिवर की कुछ बीमारियां तेजी से गंभीर रूप ले सकती हैं। एक्यूट लिवर फेल्योर ऐसी ही स्थिति है, जिसमें लिवर अचानक ठीक से काम करना बंद कर देता है और बच्चे को तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा की जरूरत पड़ सकती है।
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फेज-3बी1 स्थित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पीआईएलबीएस) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बच्चों में लिवर संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूकता और समय पर पहचान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बिलियरी एट्रेसिया और ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की गंभीरता पर भी ध्यान दिलाया। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं या हर्बल उत्पाद देना नुकसानदायक हो सकता है। लिवर की बीमारी की पुष्टि आवश्यक जांच के बाद ही होती है और उपचार बीमारी के कारण व गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है।
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शिशुओं में पीलिया को न लें हल्के में
बिलियरी एट्रेसिया में लिवर से पित्त को आंतों तक पहुंचाने वाली नलिकाएं अवरुद्ध या ठीक से विकसित नहीं होतीं। यह बीमारी मुख्य रूप से शिशुओं में सामने आती है। ऐसे में लंबे समय तक पीलिया बने रहना और मल का रंग असामान्य रूप से हल्का होना जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। समय पर पहचान और उचित उपचार बेहद अहम हैं।
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प्रतिरक्षा प्रणाली भी पहुंचा सकती है लिवर को नुकसान
ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से लिवर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इससे लिवर में सूजन हो सकती है और इलाज में देरी होने पर नुकसान बढ़ सकता है। वहीं, एक्यूट लिवर फेल्योर में बच्चे की स्थिति तेजी से बिगड़ने की आशंका रहती है।


इन संकेतों पर तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह

आंखों और त्वचा में पीलापन

लगातार उल्टी या भूख में कमी

पेट में दर्द या सूजन

असामान्य सुस्ती अथवा व्यवहार में बदलाव

शिशु में लंबे समय तक पीलिया या हल्के रंग का मल
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