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Mohali News: बारिश में बढ़े फूड पॉइजनिंग के मरीज, इमरजेंसी में भी हो रहे भर्ती
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फेज-6 के सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 5 से 8 मरीज पहुंचे रहे अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। बारिश और बदलते मौसम के बीच दूषित भोजन और पानी से होने वाली पेट की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 5 से 8 मरीज फूड पॉइजनिंग की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं, लक्षण अधिक गंभीर होने पर कुछ मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। मरीजों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, मितली और कमजोरी की शिकायत सामने आ रही है। नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अंकुर चौधरी ने बताया कि फूड पॉइजनिंग में लगातार उल्टी और दस्त होने से शरीर में पानी और जरूरी लवण की कमी हो सकती है। समय पर इसकी भरपाई न होने पर मरीज को कमजोरी, चक्कर और पेशाब कम आने जैसी परेशानी हो सकती है। गंभीर डिहाइड्रेशन का असर किडनी की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में बाहर का खुला भोजन और दूषित पानी फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। लोगों को साफ पानी पीने, ताजा और अच्छी तरह पका भोजन खाने तथा खाने को ढककर रखने की सलाह दी गई है। उल्टी-दस्त होने पर ओआरएस और पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहें। लगातार उल्टी-दस्त, बहुत ज्यादा कमजोरी या पेशाब कम आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
फूड पॉइजनिंग के लक्षण
उल्टी और दस्त पेट दर्द या ऐंठन, मितली और कमजोरी बुखार हो सकता है, शरीर में पानी की कमी गंभीर स्थिति में पेशाब कम आना
बचाव और उपचार
साफ और सुरक्षित पानी पीएं, खुले में रखा खाना न खाएं फल-सब्जियां अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें, भोजन को ढककर रखें उल्टी-दस्त में ओआरएस और तरल पदार्थ लें, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें लगातार लक्षण रहने पर अस्पताल में जांच करवाएं।
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फूड पॉइजनिंग को सामान्य पेट खराब होने की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार उल्टी-दस्त होने पर शरीर में पानी की कमी गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए समय पर उपचार जरूरी है। - डॉ. अंकुर चौधरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। बारिश और बदलते मौसम के बीच दूषित भोजन और पानी से होने वाली पेट की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 5 से 8 मरीज फूड पॉइजनिंग की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं, लक्षण अधिक गंभीर होने पर कुछ मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। मरीजों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, मितली और कमजोरी की शिकायत सामने आ रही है। नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अंकुर चौधरी ने बताया कि फूड पॉइजनिंग में लगातार उल्टी और दस्त होने से शरीर में पानी और जरूरी लवण की कमी हो सकती है। समय पर इसकी भरपाई न होने पर मरीज को कमजोरी, चक्कर और पेशाब कम आने जैसी परेशानी हो सकती है। गंभीर डिहाइड्रेशन का असर किडनी की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में बाहर का खुला भोजन और दूषित पानी फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। लोगों को साफ पानी पीने, ताजा और अच्छी तरह पका भोजन खाने तथा खाने को ढककर रखने की सलाह दी गई है। उल्टी-दस्त होने पर ओआरएस और पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहें। लगातार उल्टी-दस्त, बहुत ज्यादा कमजोरी या पेशाब कम आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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फूड पॉइजनिंग के लक्षण
उल्टी और दस्त पेट दर्द या ऐंठन, मितली और कमजोरी बुखार हो सकता है, शरीर में पानी की कमी गंभीर स्थिति में पेशाब कम आना
बचाव और उपचार
साफ और सुरक्षित पानी पीएं, खुले में रखा खाना न खाएं फल-सब्जियां अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें, भोजन को ढककर रखें उल्टी-दस्त में ओआरएस और तरल पदार्थ लें, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें लगातार लक्षण रहने पर अस्पताल में जांच करवाएं।
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फूड पॉइजनिंग को सामान्य पेट खराब होने की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार उल्टी-दस्त होने पर शरीर में पानी की कमी गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए समय पर उपचार जरूरी है। - डॉ. अंकुर चौधरी