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Mohali News: रिहायश तीन किमी दूर, एक प्लेट में चार खिलाड़ी खा रहे खाना
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मोहाली। लांडरां स्थित चैंपियंस अकादमी में चल रहे स्कूल इंटर स्टेट टूर्नामेंट में कई अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। खिलाड़ियों के लिए मेस का इंतजाम तो था लेकिन तीन किलोमीटर दूर। वहीं वहां पर प्लेट भी कम थीं जिस कारण मजबूरी में एक प्लेट में चार-चार बच्चे खाना खा रहे थे। वहीं, बच्चों के बैठने का भी कोई इंतजाम नहीं किया गया। 20 से 24 नवंबर तक चल रहे टूर्नामेंट में खेलने आई 39 टीमों में से 16 लड़कियों और 23 लड़कों की टीमें हैं। यहां पर आई टीमों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि प्रत्येक बच्चे को एक दिन के खाने का खर्च 200 रुपये दिया गया है परंतु खाना घटिया क्वालिटी का है। इतना ही नहीं, लड़कियों के रहने के लिए लांडरां स्थित सरकारी स्मार्ट हाई स्कूल में प्रबंध किया गया है जहां स्कूल में नौ कमरे अलग-अलग टीमों की लड़कियों के लिए दिए गए हैं। लड़कियों ने बताया कि यहां रहने की व्यवस्था भी ठीक ढंग से नहीं की गई है। स्कूल में इस समय 140 लड़कियां रुकी हैं जिन्हें स्कूल के चार शौचालय में गुजारा करना पड़ रहा है। सुबह उन्हें काफी परेशानी होती है क्योंकि खिलाड़ी ज्यादा हैं।
कई खिलाड़ियों को नहीं मिला नाश्ता
नाम न छापने की शर्त पर खिलाड़ियों ने बताया कि सुबह वह जब मैदान में साढ़े नौ बजे के करीब पहुंचे तो कई खिलाड़ियों को नाश्ता भी नसीब नहीं हुआ। खिलाड़ी इतनी दूर से सफर करके आए थे और कुछ देर बाद उन्होंने मैच भी खेलना था। नाश्ता नहीं मिलने पर उन्होंने बिस्कुट आदि खरीद कर खाया। अब सवाल उठता है कि अगर खिलाड़ियों को सही डाइट ही नहीं मिलेंगी तो वह कैसे बढ़िया प्रदर्शन करेंगे और भविष्य के लिए देश के लिए कैसे तैयार होंगे।
कच्ची रोटी और चावल थमा दिए
जिन खिलाड़ियों और अध्यापकों ने दिन में खाना खाया उन्होंने बताया कि चावल और रोटी ज्यादातर कच्चे थे। रात का खाना खाने के लिए उन्हें स्कूल से ऑटो न मिला। इस कारण बच्चों समेत पैदल आना पड़ा। रात के समय में साधन न मिलने के कारण पैदल चलते हुए लड़कियां काफी डरी हुई थीं। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल के पास ही खाने का इंतजाम हो या मेस तक आने-जाने का इंतजाम हो तो सही रहेगा।
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खिलाड़ी अंधेरे में खाना खाने को मजबूर
खेल में भाग लेने वाले खिलाड़ी मजबूरी में खुद ऑटो करके खाना खाने के लिए तीन किलोमीटर दूर जा रहे हैं। जाते समय तो ऑटो मिल जाता है लेकिन लौटते समय काफी दिक्कत होती है। इतना ही नहीं, यहां पर मेस है, वहां पर रोशनी का भी सही इंतजाम नहीं है जिस कारण खिलाड़ी मजबूरन अंधेरे में खाना खा रहे हैं। रात को भी सभी खिलाड़ियों ने अंधेरे में खाना खाया और लौटते समय कोई साधन न मिलने पर मैं अपनी टीम को पैदल ही स्कूल तक लेकर गया। -विष्णु ,कोच मानसा टीम
स्कूल के शौचालय कम पड़े तो खिलाड़ी पहुंचे गुरुद्वारा साहिब
लांडरां स्थित सरकारी स्मार्ट हाई स्कूल में लड़कियों के रहने का इंतजाम किया गया है। वहां पर सिर्फ चार शौचालय हैं लेकिन वह भी गंदे। रविवार सुबह भीड़ काफी होने से कई लड़कियां गुरुद्वारा साहिब में शौचालय के लिए गईं। वहीं नहाने का भी इंतजाम नहीं है। इस कारण अधिकतर लड़कियों को बिना नहाए जाना पड़ा। -बिलाल, कोच मालेरकोटला
स्कूल के शौचालय बहुत गंदे
टीम ने बताया कि स्कूल के शौचालय बहुत गंदे हैं। इस कारण वह सड़क पार कर सामने गुरुद्वारे में आते जाते हैं। पूरा दिन मैच खेलने के बाद तीन किलोमीटर खाना खाने के लिए टीम को न ले जाने के लिए उन्होंने अपने खर्चे पर ही उनको स्कूल में मार्केट से खाना लाकर दिया। -बिलाल, कोच मलेरकोटला
कोट्स....
विभाग की ओर से एक जगह ही मेस चलाने की मंजूरी है। इस कारण दिक्कत आई है। मंगलवार को लड़कियों के आने-जाने की व्यवस्था की जाएगी ताकि दिक्कत न हो। -इंदु बाला, जिला खेल समन्वयक
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कई खिलाड़ियों को नहीं मिला नाश्ता
नाम न छापने की शर्त पर खिलाड़ियों ने बताया कि सुबह वह जब मैदान में साढ़े नौ बजे के करीब पहुंचे तो कई खिलाड़ियों को नाश्ता भी नसीब नहीं हुआ। खिलाड़ी इतनी दूर से सफर करके आए थे और कुछ देर बाद उन्होंने मैच भी खेलना था। नाश्ता नहीं मिलने पर उन्होंने बिस्कुट आदि खरीद कर खाया। अब सवाल उठता है कि अगर खिलाड़ियों को सही डाइट ही नहीं मिलेंगी तो वह कैसे बढ़िया प्रदर्शन करेंगे और भविष्य के लिए देश के लिए कैसे तैयार होंगे।
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कच्ची रोटी और चावल थमा दिए
जिन खिलाड़ियों और अध्यापकों ने दिन में खाना खाया उन्होंने बताया कि चावल और रोटी ज्यादातर कच्चे थे। रात का खाना खाने के लिए उन्हें स्कूल से ऑटो न मिला। इस कारण बच्चों समेत पैदल आना पड़ा। रात के समय में साधन न मिलने के कारण पैदल चलते हुए लड़कियां काफी डरी हुई थीं। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल के पास ही खाने का इंतजाम हो या मेस तक आने-जाने का इंतजाम हो तो सही रहेगा।
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खिलाड़ी अंधेरे में खाना खाने को मजबूर
खेल में भाग लेने वाले खिलाड़ी मजबूरी में खुद ऑटो करके खाना खाने के लिए तीन किलोमीटर दूर जा रहे हैं। जाते समय तो ऑटो मिल जाता है लेकिन लौटते समय काफी दिक्कत होती है। इतना ही नहीं, यहां पर मेस है, वहां पर रोशनी का भी सही इंतजाम नहीं है जिस कारण खिलाड़ी मजबूरन अंधेरे में खाना खा रहे हैं। रात को भी सभी खिलाड़ियों ने अंधेरे में खाना खाया और लौटते समय कोई साधन न मिलने पर मैं अपनी टीम को पैदल ही स्कूल तक लेकर गया। -विष्णु ,कोच मानसा टीम
स्कूल के शौचालय कम पड़े तो खिलाड़ी पहुंचे गुरुद्वारा साहिब
लांडरां स्थित सरकारी स्मार्ट हाई स्कूल में लड़कियों के रहने का इंतजाम किया गया है। वहां पर सिर्फ चार शौचालय हैं लेकिन वह भी गंदे। रविवार सुबह भीड़ काफी होने से कई लड़कियां गुरुद्वारा साहिब में शौचालय के लिए गईं। वहीं नहाने का भी इंतजाम नहीं है। इस कारण अधिकतर लड़कियों को बिना नहाए जाना पड़ा। -बिलाल, कोच मालेरकोटला
स्कूल के शौचालय बहुत गंदे
टीम ने बताया कि स्कूल के शौचालय बहुत गंदे हैं। इस कारण वह सड़क पार कर सामने गुरुद्वारे में आते जाते हैं। पूरा दिन मैच खेलने के बाद तीन किलोमीटर खाना खाने के लिए टीम को न ले जाने के लिए उन्होंने अपने खर्चे पर ही उनको स्कूल में मार्केट से खाना लाकर दिया। -बिलाल, कोच मलेरकोटला
कोट्स....
विभाग की ओर से एक जगह ही मेस चलाने की मंजूरी है। इस कारण दिक्कत आई है। मंगलवार को लड़कियों के आने-जाने की व्यवस्था की जाएगी ताकि दिक्कत न हो। -इंदु बाला, जिला खेल समन्वयक