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Mohali News: 31 बीघा ट्रस्ट की जमीन हड़पने की साजिश रचने की आरोपी महिला की नियमित जमानत याचिका रद्द

Tue, 05 Aug 2025 01:41 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Aug 2025 01:41 AM IST
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Regular bail plea of woman accused of plotting to grab 31 bigha trust land rejected
मोहाली। जीरकपुर में 250 करोड़ कीमत वाली 31 बीघा ट्रस्ट की जमीन हड़पने की साजिश रचने के आरोपों का सामना कर रही महिला कविता ने सीबीआई कोर्ट में अपनी नियमित जमानत याचिका लगाई। सीबीआई ने आरोपी महिला के खिलाफ वर्ष 2023 में मामला दर्ज किया था। इस मामले पर सीबीआई कोर्ट में सोमवार को बचाव पक्ष व सरकारी वकील ने अपनी-अपनी दलीलें रखी। नियमित जमानत का विरोध करते हुए सीबीआई के वकील ने अदालत में तर्क रखा कि आरोपी महिला कविता ने अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर जीरकपुर स्थित 31 बीघा शिकायतकर्ता ट्रस्ट की जमीन हड़पने के लिए साजिश रची। इसकी बाजार में कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये है। अदालत को बताया गया कि आरोपियों ने झूठे ट्रस्ट के दस्तावेजों और प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया। अवैध भूमि अधिग्रहण के लिए जाली रिकॉर्ड का उपयोग किया व जबरदस्ती और प्रलोभन के माध्यम से गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया।
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संस्थानों की अखंडता को कम किया और कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया। ऐसे अपराध के लिए आरोपी की जमानत रद्द की जाए। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी कविता ने पहले विशेष न्यायाधीश सीबीआई (मोहाली) की अदालत के समक्ष दो अलग-अलग जमानत आवेदन दायर किए थे। उनको 5 जुलाई 2025 के आदेश के तहत खारिज कर दिया गया था। आरोपी सहित अन्य सह-आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होने और ट्रायल मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना-अलग आत्मसमर्पण और जमानत आवेदन दायर करने का निर्देश दिया गया था। यह भी दलील दी गई कि वर्तमान जमानत आवेदक ने पहले बठिंडा की जिला अदालत में एक मामला दायर किया था। यह मामला आरोपी कविता ने अपने वकील (सह-आरोपी) के माध्यम से दायर किया था।
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यह भी दलील दी गई है कि आरोपी कविता एक दिहाड़ी मजदूर है। नियमित रूप से अदालती सुनवाई में शामिल नहीं हो पाती थी। उसने अपने वकील से उस मामले को वापस लेने का अनुरोध किया था। इसके बदले में आरोपी वकील ने कुछ सादे कागजों और अन्य दस्तावेजों पर कविता के हस्ताक्षर करवा लिए थे, और कविता उन दस्तावेजों की विषयवस्तु को समझ नहीं पाई क्योंकि वह एक भोली-भाली और अनपढ़ महिला है। अदालत को बताया कि जब वर्तमान जमानत आवेदक को इस पूरी साजिश का पता चला कि उसके वकील ने उन सादे हस्ताक्षरित कागजों और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल अपने लिए किया है, तब से वह उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए इधर-उधर भटक रही है, लेकिन वर्तमान आवेदक के खिलाफ पहले ही एक प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है, इसलिए किसी भी पुलिस अधिकारी ने वर्तमान जमानत आवेदक के वास्तविक अनुरोध पर विचार नहीं किया। यह भी निवेदन किया गया है कि जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस द्वारा चालान भी पेश किया जा चुका है, अत: आवेदक को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रखना किसी भी उपयोगी उद्देश्य के लिए पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इससे आवेदक के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अदालत को बताया गया कि इस न्यायालय द्वारा कुछ सह-अभियुक्तों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है, इसलिए आवेदक को भी इसी प्रकार की रियायत दी जाए।
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आरोपों की गंभीरता पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने भी सह-अभियुक्त संजीव कुमार गाबा को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं पाया और तदनुसार उनकी याचिका खारिज कर दी। उपर्युक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि आवेदक प्रत्येक सुनवाई तिथि पर अपने विरुद्ध चल रही कार्यवाही की जानकारी होने के बावजूद जानबूझकर इस न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। आवेदक कविता ने वारंटों के निष्पादन और अदालती कार्यवाही से बचकर इस न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का जानबूझकर और स्वेच्छा पूर्वक उल्लंघन किया है। इसके अलावा सीबीआई द्वारा दायर आरोप-पत्र में आवेदक के विरुद्ध लगाए गए आरोप भी गंभीर प्रकृति के हैं। अगर जमानत दी जाती है तो वह इसका दुरुपयोग कर सकती है। अदालत ने वर्तमान जमानत आवेदन खारिज किया और आरोपी कविता को 8 अगस्त को वीसी के माध्यम से न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए।
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