पंजाब में बदला पैटर्न: अब साल में दो बार होंगी बोर्ड परीक्षाएं, पहली में बहुविकल्पीय और दूसरे में आएंगे विस्तृत प्रश्न
पंजाब में परीक्षा का पैटर्न बदल गया है। 10वीं और 12वीं के छात्रों को साल में दो बार बोर्ड परीक्षा देनी पड़ेगी। कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर की वजह से बोर्ड ने यह फैसला लिया। पहली परीक्षा नवंबर व दिसंबर महीने में आयोजित होगी। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। दूसरी परीक्षा फरवरी व मार्च में होगी। इस परीक्षा में विस्तृत प्रश्न पूछे जाएंगे।
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कोरोना महामारी की तीसरी लहर व छात्रों के करियर को देखते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन की नई नीति तैयार की है। नई नीति के तहत शैक्षणिक सत्र को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठयक्रम के आधार पर पहली टर्म की परीक्षा नवंबर-दिसंबर महीने व दूसरी टर्म की परीक्षा फरवरी-मार्च में होगी। इस संबंध में बोर्ड ने अपना सारा पाठयक्रम भी बांट दिया है। साथ ही मॉडल प्रश्न पत्र भी तैयार कर लिए गए हैं। सारी जानकारी बोर्ड की वेबसाइट www.pseb.ac.in पर अपलोड कर दी है।
जानकारी के मुताबिक गत दो सालों से कोरोना महामारी की वजह से 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। इतना नहीं महामारी का कहर अधिक होने से बोर्ड परीक्षा तक आयोजित नहीं करवा पाया था। ऐसे में बोर्ड ने अब नया रास्ता निकाला है। बोर्ड के मुताबिक पहली टर्म में सिर्फ मुख्य विषय की ही परीक्षा ली जाएगी। जिसके तहत मात्र ग्रेडिंग वाले विषयों की परीक्षा होगी।
प्रैक्टिकल परीक्षा नहीं होगी। पहली टर्म की परीक्षा बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित होगी, जबकि दूसरी टर्म की परीक्षा लिखित परीक्षा होगी। इसमें छोटे व बड़े उत्तर वाले प्रश्न शामिल होंगे। दोनो टर्म की परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र बोर्ड की तरफ से मुहैया करवाएं जाएंगे। जिन्हें ओएमआर शीट पर हल करना होगा। पहली व दूसरी टर्म की परीक्षा को वेटेज देते हुए फाइनल नतीजा घोषित किया जाएगा।
स्पेशल छात्रों की परीक्षा ऐसे होगी
पीएसईबी से मिली जानकारी के मुताबिक स्पेशल बच्चों की पहली टर्म की परीक्षा संस्था स्तर पर ली जाएगी। संस्थाएं इन छात्रों के लिए प्रश्न पत्र की बनावट नियमित छात्रों के लिए निर्धारित प्रश्न पत्र की तरह ही रखेगी लेकिन प्रश्न केवल बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाए प्रश्न पत्र से ही चुने जाएंगे। हालांकि परीक्षा का आखिरी फैसला हालातों को देखते हुए लिया।