हक की मांग : देश का स्पेशल स्टेटस होते हैं शहीद, उनकी विधवाओं को तुंरत इंसाफ मिलना चाहिए
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देश की आजादी के बाद हुए तीन युद्धों में पंजाब के कई वीर सपूतों ने अपनी जान न्योछावर की थी, लेकिन उनकी शहादत के कई साल बाद भी उनकी विधवाओं को अभी तक उनके हक नहीं मिल पाए हैं। पूरे राज्य में करीब 120 ऐसी विधवाएं हैं जो जमीन या पैसे के लिए अदालतों में सालों से चक्कर काट रही हैं। एक्स सर्विसमैन ग्रीवांस सेल के प्रधान कर्नल एसएस सोही ने मांग की कि ऐसी विधवाओं को राज्य सरकार तुरंत उनके हक दे।
कर्नल सोही ने इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखा है। साथ ही कहा है कि शहीद लोग किसी भी देश के लिए स्पेशल स्टेटस होते हैं। ऐसे में इनके परिवार को जमीन या मुआवजा राशि से दूर नहीं रखा जा सकता है। इन्हें तुरंत इंसाफ दिया जाए।
कई वर्षों से पूर्व फौजियों के हकों के लिए जंग लड़ने वाले एक्स सर्विसमैन ग्रीवासेंस सेल के प्रधान रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल एसएस सोही ने बताया कि आजादी के बाद 1962, 1965 और 1971 की जंग में शहीद हुए फौजियों की विधवाएं अभी तक हकों के लिए दर दर भटक रही हैं।
उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों से जुटाई जानकारी के मुताबिक पंजाब में ऐसे 120 केस पेंडिंग हैं। इनमें शहीद फौजियों की विधवाएं मुआवजा हासिल करने के लिए अदालतों में केस दायर कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के पास जमीन होने के बाद भी जंगी विधवाओं को जमीन नहीं दी जा रही है। जबकि इसके बाद पांच लाख रुपये प्रति एकड़ दिए जा रहे हैं।
सालों के संघर्ष के बाद बेटे को मिली फैमिली पेंशन
कर्नल सोही बताते हैं कि कई जंगी विधवाओं को मुआवजे के रूप में कई राज्यों में एक करोड़ रुपये तक दिए गए। मोगा में एक जंगी विधवा राजदीप कौर ने दोबारा शादी कर ली। उस समय उसका दूसरा बेटा बलजीत सिंह था। उसके पति गुरदित्त सिंह 62 की जंग में शहीद हो गए थे। बलजीत सिंह के बेटे वीरपाल ने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने बलजीत सिंह की फैमिली पेंशन लगवाई। बलजीत सिंह की कैंसर से मौत हो गई। उन्होंने कहा कि अब वीरपाल अपनी मां शिंदर कौर के लिए संघर्ष कर रहा है।
जमीन अलॉट हुई, सरकार ने देने से किया मना
जालंधर की दो जंगी विधवाओं के केसों का जिक्र करते हुए कर्नल सोही ने बताया कि हरविंदर कौर अस्सी साल की हैं। जबकि दूसरी सीबो की मौत हो चुकी है। इन्हें राजस्थान में जमीन अलॉट हुई थी लेकिन, राजस्थान सरकार ने इन्हें जमीन देने से मना कर दिया। हरविंदर कौर 1962 में शहीद हुए सिपाही अजीत सिंह की पत्नी है। जबकि सीबो का पति फकीर सिंह भी जंग में शहीद हुआ था। उसका पोता बलविंदर सिंह यह केस लड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कई जंगी विधवाओं के केस हैं। जो अनपढ़ता या अन्य कारणों के चलते समय पर फाइल नहीं किए गए ।