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परविंदर सोहाना पार्टी से बर्खास्त, हरमनप्रीत सिंह बने यूथ अकाली दल के प्रधान
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मोहाली। अकाली दल से बगावत कर आजाद ग्रुप में शामिल होने वाले पूर्व अकाली नेता एवं जिला यूथ अकाली दल के प्रधान परविंदर सिंह सोहाना को आखिर शिरोमणि अकाली दल से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, उनकी जगह पूर्व पार्षद हरमनप्रीत सिंह प्रिंस को यूथ अकाली दल का जिला शहरी प्रधान बनाया गया है। यह फैैसला सोमवार को उस समय सामने आया, जब परविंदर सिंह सोहाना ने आजाद ग्रुप के दफ्तर पर रविवार को हुए हमले के लिए अकाली दल के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया था। यह फैसला सूबा यूथ अकाली दल के प्रधान परमबंस सिंह बंटी रोमाना की ओर से लिया गया। वहीं, उन्होंने कहा कि ऐसे मौकापरस्त लोगों को आने वाले समय में पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। रोमाना ने प्रिंस को मोहाली में पार्टी को मजबूत करने के लिए हिदायत दी है। वहीं, रविवार को आजाद ग्रुप के कार्यालय पर हुए हमले में केस दर्ज कर लिया गया है।
जानकारी के मुताबिक नगर निगम चुनाव के लिए पार्टी हाईकमान की ओर से उम्मीदवारों का एलान करने के बाद से यह विवाद शुरू हुआ था। अकाली दल के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व पार्षदों ने पार्टी हाईकमान के उस फैसले का कड़ा विरोध किया था। जिसमें पूर्व वरिष्ठ नेता कुलवंत सिंह को दर किनार कर स्क्रीनिंग कमेटी में उन्हें सबसे आखिर में जगह दी थी। इसके बाद पार्टी के उम्मीदवार घोषित करते समय भी ऐसा ही सिलसिला चला था। इसके बाद नेताओं ने पार्टी में बगावत कर दी थी और साथ यह भी साफ कर दिया था कि वह कुलवंत सिंह की अगुवाई में चुनाव लड़ेंगे। नहीं तो वह पार्टी को अलविदा कर देंगे। शुरू में पार्टी हाईकमान ने इस मामले को सुलझाने का प्रयास किया। लेकिन जब कोई बात नहीं बनी तो उक्त नेताओं ने कुलवंत सिंह की अगुवाई में आजाद ग्रुप बनाकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया था। इसी बीच रविवार को सेक्टर-79 में पूर्व मेयर कुलवंत सिंह के कार्यालय के बाहर विवाद हुआ था। इसमें परविंदर सिंह सोहाना ने अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं हमला करने का आरोप लगाया था। इसके बाद अब केस दर्ज हुआ है। वहीं, अब शिरोमणि अकाली दल ने यह फैसला लिया है।
कोट्स
अकाली दल से तो मैंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। पार्टी से बाहर निकालने की बात बिल्कुल निराधार है।
-परविंदर सोहाना
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जानकारी के मुताबिक नगर निगम चुनाव के लिए पार्टी हाईकमान की ओर से उम्मीदवारों का एलान करने के बाद से यह विवाद शुरू हुआ था। अकाली दल के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व पार्षदों ने पार्टी हाईकमान के उस फैसले का कड़ा विरोध किया था। जिसमें पूर्व वरिष्ठ नेता कुलवंत सिंह को दर किनार कर स्क्रीनिंग कमेटी में उन्हें सबसे आखिर में जगह दी थी। इसके बाद पार्टी के उम्मीदवार घोषित करते समय भी ऐसा ही सिलसिला चला था। इसके बाद नेताओं ने पार्टी में बगावत कर दी थी और साथ यह भी साफ कर दिया था कि वह कुलवंत सिंह की अगुवाई में चुनाव लड़ेंगे। नहीं तो वह पार्टी को अलविदा कर देंगे। शुरू में पार्टी हाईकमान ने इस मामले को सुलझाने का प्रयास किया। लेकिन जब कोई बात नहीं बनी तो उक्त नेताओं ने कुलवंत सिंह की अगुवाई में आजाद ग्रुप बनाकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया था। इसी बीच रविवार को सेक्टर-79 में पूर्व मेयर कुलवंत सिंह के कार्यालय के बाहर विवाद हुआ था। इसमें परविंदर सिंह सोहाना ने अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं हमला करने का आरोप लगाया था। इसके बाद अब केस दर्ज हुआ है। वहीं, अब शिरोमणि अकाली दल ने यह फैसला लिया है।
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कोट्स
अकाली दल से तो मैंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। पार्टी से बाहर निकालने की बात बिल्कुल निराधार है।
-परविंदर सोहाना