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सरकारी स्कूलों में पेरेंट्स वर्कशॉप : अभिभावकों को बच्चों को पढ़ाने के प्रभावी तरीके की दी जानकारी

Sun, 08 Feb 2026 02:21 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 02:21 AM IST
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Parent workshops in government schools: Parents were given information on effective ways to teach their children
मोहाली। जिले के सभी सरकारी स्कूलों में एक विशेष अभिभावक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 17 फरवरी से शुरू हो रही बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों के लिए सही माहौल तैयार करने और अभिभावकों की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
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फेज-5 स्थित सरकारी हाई स्कूल में कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डीईओ (एलीमेंट्री) डॉ. गिन्नी दुग्गल रहीं। सुबह 9:30 बजे शुरू हुई इस कार्यशाला में अभिभावकों को 40-40 के बैच में एक-एक घंटे की जानकारी दी गई। इसमें उन्हें बच्चों को पढ़ाने के प्रभावी तरीके, बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने के उपाय और स्कूल-घर मिलकर क्या कर सकते हैं, जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। डॉ. गिन्नी दुग्गल ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे की शिक्षा साइकिल के दो पहियों की तरह है। एक पहिया घर और दूसरा स्कूल। स्कूल पढ़ाता है, लेकिन उस पढ़ाई में सहयोग घर का वातावरण देता है, जो बच्चे को हौसला, शांति और भरोसा प्रदान करता है। घर का माहौल और स्कूल की पढ़ाई मिलकर ही बच्चे को जिंदगी में आगे ले जा सकते हैं।
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कार्यशाला के मुख्य सत्र

कार्यशाला को चार प्रमुख भागों में बांटा गया था, जिन्हें अभिभावकों के लिए एक रोडमैप के रूप में डिजाइन किया गया।
जुड़ो और विचार करो : इसमें अभिभावकों को घर के माहौल के प्रभाव पर विचार करने के लिए कहा गया।
सीखो और समझो : इस चरण में एक दृष्टांत के माध्यम से समझाया गया कि जिस प्रकार एक पौधे को मजबूत बनाने में बीज से ज्यादा उसकी मिट्टी, पानी और पर्यावरण का योगदान होता है, ठीक उसी प्रकार बच्चे की प्रगति में घर का वातावरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चा अपना माहौल नहीं चुन सकता, यह जिम्मेदारी अभिभावकों की होती है कि वे उसे पोषण और विश्वास का वातावरण दें।
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शपथ लो और वचनबद्ध हो : अभिभावकों से बच्चों के साथ धैर्य और सहयोग का रिश्ता बनाए रखने का वचन लिया गया।
प्रेरित करो और प्रशंसा करो : बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों की सराहना करने और उन्हें निरंतर प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया गया।


परीक्षा के समय अभिभावकों की भूमिका
कार्यशाला में विशेष रूप से आगामी बोर्ड परीक्षाओं के संदर्भ में चर्चा की गई। अभिभावकों को समझाया गया कि इस दबाव के समय में बच्चों से मेलजोल बढ़ाकर, उनके तनाव को कम करने और एक सहायक वातावरण प्रदान करने की कितनी आवश्यकता है। इस एक दिवसीय प्रयास का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी की भावना को बल देना था। यह कार्यक्रम शिक्षा विभाग की उस सोच को दर्शाता है जहां अभिभावक केवल बच्चों को स्कूल भेजने वाले नहीं, बल्कि शैक्षिक प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार हैं।
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