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करोड़ों की लागत से लगाया ऑक्सीजन प्लांट हो रहा मिट्टी
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जीरकपुर। सीएचसी ढकोली शहर का इकलौता सरकारी अस्पताल है, जिसकी खुद की हालत दयनीय है। इमरजेंसी के नाम पर यहां केवल फर्स्ट एड के अलावा कुछ भी नहीं है। फर्स्ट एड देकर मरीज को आगे चंडीगढ़ या पंचकूला रेफर कर दिया जाता है। कोरोना काल के दौरान पिछले साल गुजरात की एक एनजीओ द्वारा मरीजों को लिए ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए ढकोली के सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट भेंट किया था। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी ऑक्सीजन प्लांट शुरू नहीं हो पाया है। इसको इंस्टाल करने में कंपनी ने गलतियां की हुई हैं और इनको ठीक करने के लिए सेहत विभाग ने चिट्ठी लिखी हुई है। कई महीनों बाद ऑक्सीजन प्लांट के लिए बिजली का कनेक्शन मिला था लेकिन जब इसे चलाने की कोशिश की गई तो पता चला कि इसकी इंस्टॉलेशन ठीक ढंग से नहीं हो पाई है।
कोरोना संक्रमण के दौर में ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो जाता तो कोरोना मरीजों को इससे काफी मदद मिल सकती थी। मामूली जख्मी लोगों का इलाज भी सीएचसी में नहीं हो पाता। मौसमी बीमारियों के अलावा किसी भी तरह का इलाज यहां उपलब्ध नहीं है। हालांकि की कांग्रेस सरकार के दौरान एमसी चुनाव में उस समय के सेहत मंत्री बलबीर सिद्धू ने इस अस्पताल को अपग्रेड कर सिविल अस्पताल बनाने का एलान किया था, जो चुनावी स्टंट साबित हुआ और अस्पताल आज तक उसी हालत में है।
एक करोड़ की लागत से लगाया था ऑक्सीजन प्लांट
जून, 2021 में ऑक्सीजन प्लांट गुजरात की एक एनजीओ की मदद से ढकोली अस्पताल को भेंट किया गया था। इसकी कीमत एक करोड़ रुपये के आसपास है। यह भेंट तो कर दिया गया था, लेकिन इसे इंस्टॉल करने की जिम्मेदारी सेहत विभाग की थी, हालांकि इसे लगाया तो गया लेकिन जानकारी के मुताबिक इसको गलत तरीके से इंस्टाल कर दिया गया। पिछले साल कोरोना के मरीजों को ऑक्सीजन के लिए काफी जूझना पड़ा था। तब इस ऑक्सीजन प्लांट को अस्पताल में लाया गया था। लेकिन अब यह ऑक्सीजन प्लांट सफेद हाथी बनकर रह गया है।
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प्रति मिनट 100 लीटर ऑक्सीजन तैयार करने का किया था दावा
ऑक्सीजन प्लांट लगने से लोगों को काफी उम्मीदें थी। अस्पताल की ओर से बताया गया था कि यह अक्सीजन प्लांट प्रति मिनट 100 लीटर ऑक्सीजन तैयार करेगा। इससे 30 बेड के सरकारी अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध हो जाएगी। इसके लगने के बाद अस्पताल ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर हो जाता। प्लांट की यह खासियत थी कि यह हवा से मेडिकल ऑक्सीजन तैयार कर सकता था। ऑक्सीजन जनरेटिंग प्लांट लगने से अस्पताल प्रशासन को इधर-उधर से ऑक्सीजन मांगने की जरूरत नहीं पड़नी थी। लेकिन अस्पताल में आने के बाद ऑक्सीजन प्लांट कई महीनों मिट्टी हो रहा है।
कोट
यह ऑक्सीजन प्लांट जिस कंपनी की ओर से भेंट किया गया था, उन्होंने कुछ पार्ट्स कम भेजे थे। दूसरी बात यह कि जब यह डिलीवर किया गया था तो उस समय उल्टा रखा गया था। जिस कंपनी ने भेंट किया था उसे चिट्ठी लिखकर विनती की गई है कि वहां से जब टैक्नीकल टीम आएगी दो दोबार से इसे सीधा करे इंस्टाल किया जाए। इसके अलावा सेहत विभाग के उच्च अधिकारियों से बात चल रही है कि इसे जल्द ही चालू कर दिया जाएगा। -आदर्शपाल कौर, सिविल सर्जन मोहाली।
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कोरोना संक्रमण के दौर में ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो जाता तो कोरोना मरीजों को इससे काफी मदद मिल सकती थी। मामूली जख्मी लोगों का इलाज भी सीएचसी में नहीं हो पाता। मौसमी बीमारियों के अलावा किसी भी तरह का इलाज यहां उपलब्ध नहीं है। हालांकि की कांग्रेस सरकार के दौरान एमसी चुनाव में उस समय के सेहत मंत्री बलबीर सिद्धू ने इस अस्पताल को अपग्रेड कर सिविल अस्पताल बनाने का एलान किया था, जो चुनावी स्टंट साबित हुआ और अस्पताल आज तक उसी हालत में है।
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एक करोड़ की लागत से लगाया था ऑक्सीजन प्लांट
जून, 2021 में ऑक्सीजन प्लांट गुजरात की एक एनजीओ की मदद से ढकोली अस्पताल को भेंट किया गया था। इसकी कीमत एक करोड़ रुपये के आसपास है। यह भेंट तो कर दिया गया था, लेकिन इसे इंस्टॉल करने की जिम्मेदारी सेहत विभाग की थी, हालांकि इसे लगाया तो गया लेकिन जानकारी के मुताबिक इसको गलत तरीके से इंस्टाल कर दिया गया। पिछले साल कोरोना के मरीजों को ऑक्सीजन के लिए काफी जूझना पड़ा था। तब इस ऑक्सीजन प्लांट को अस्पताल में लाया गया था। लेकिन अब यह ऑक्सीजन प्लांट सफेद हाथी बनकर रह गया है।
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प्रति मिनट 100 लीटर ऑक्सीजन तैयार करने का किया था दावा
ऑक्सीजन प्लांट लगने से लोगों को काफी उम्मीदें थी। अस्पताल की ओर से बताया गया था कि यह अक्सीजन प्लांट प्रति मिनट 100 लीटर ऑक्सीजन तैयार करेगा। इससे 30 बेड के सरकारी अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध हो जाएगी। इसके लगने के बाद अस्पताल ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर हो जाता। प्लांट की यह खासियत थी कि यह हवा से मेडिकल ऑक्सीजन तैयार कर सकता था। ऑक्सीजन जनरेटिंग प्लांट लगने से अस्पताल प्रशासन को इधर-उधर से ऑक्सीजन मांगने की जरूरत नहीं पड़नी थी। लेकिन अस्पताल में आने के बाद ऑक्सीजन प्लांट कई महीनों मिट्टी हो रहा है।
कोट
यह ऑक्सीजन प्लांट जिस कंपनी की ओर से भेंट किया गया था, उन्होंने कुछ पार्ट्स कम भेजे थे। दूसरी बात यह कि जब यह डिलीवर किया गया था तो उस समय उल्टा रखा गया था। जिस कंपनी ने भेंट किया था उसे चिट्ठी लिखकर विनती की गई है कि वहां से जब टैक्नीकल टीम आएगी दो दोबार से इसे सीधा करे इंस्टाल किया जाए। इसके अलावा सेहत विभाग के उच्च अधिकारियों से बात चल रही है कि इसे जल्द ही चालू कर दिया जाएगा। -आदर्शपाल कौर, सिविल सर्जन मोहाली।