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‘2024 तक विदेशी छात्रों की संख्या पांच लाख करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य’
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मोहाली। भारत को अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों की पहली पसंद बनाने के उद्देश्य से सरकार ने साल 2024 तक विदेशी विद्यार्थियों की संख्या पांच लाख करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह जानकारी शिक्षा और विदेश राज्यमंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह ने सोमवार को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित 6ठे इंटरनेशनल फेकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह के दौरान साझा की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम सही मायने में उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण को लागू कर रहा है। भारत को कभी शिक्षा के क्षेत्र में विश्व गुरु के रूप में माना जाता था और दुनियाभर से विद्यार्थी यहां पढ़ने आते थे, लेकिन भारत में विद्यार्थियों का प्रवाह कुछ वर्षों से धीमा हो गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह विषय चिंता का एक कारण था और उन्होंने प्रवृति में बदलाव के लिए भरपूर प्रयास किए हैं। इस कार्यक्रम में 32 देशों की 75 यूनिवर्सिटियों से 123 प्रोफेसर शामिल हुए, इनमें यूके, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, स्पेन, इटली, आयरलैंड, मॉरिशस, नेपाल, रूस, साउथ अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, मलेशिया, इजराइल, जर्मनी, ब्राजील सहित 32 देशों की 75 यूनिवर्सिटियों में से 123 प्रोफेसर शामिल हुए।
इस कार्यक्रम में डेनमार्क के एंबेसडर फ्रेडी स्वेन, चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और एनआरसी, एनसीटीई दिल्ली के चेयरपर्सन डॉ. बनवारीलाल नाटिया बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। इस दौरान चांसलर सतनाम सिंह संधू, प्रो. चांसलर डॉ. आरएस बावा विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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इस मौके पर डॉ. बनवारी लाल नाटिया ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्था की ओर से की जा रही गतिविधियों को समाज कल्याण को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। वहीं, शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों के आंतरिक कौशल को बाहर लाने की अपील की। फ्रेडी स्वेन ने कहा कि वर्तमान दौर नेटवर्किंग, कनेक्टिविटी और उच्च तकनीक का है। उन्होंने कहा कि शायद ही भारत जैसी क्षमता, हुनर और अवसर किसी अन्य देश के पास है।
फोटो कैप्शन
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम 2022 का उद्घाटन करते डॉ. राजकुमार रंजन सिंह, डेनमार्क के एंबेसडर फ्रेडी स्वेन, चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और एनआरसीए एनसीटीई दिल्ली के चेयरपर्सन डॉ. बनवारीलाल नाटिया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह विषय चिंता का एक कारण था और उन्होंने प्रवृति में बदलाव के लिए भरपूर प्रयास किए हैं। इस कार्यक्रम में 32 देशों की 75 यूनिवर्सिटियों से 123 प्रोफेसर शामिल हुए, इनमें यूके, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, स्पेन, इटली, आयरलैंड, मॉरिशस, नेपाल, रूस, साउथ अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, मलेशिया, इजराइल, जर्मनी, ब्राजील सहित 32 देशों की 75 यूनिवर्सिटियों में से 123 प्रोफेसर शामिल हुए।
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इस कार्यक्रम में डेनमार्क के एंबेसडर फ्रेडी स्वेन, चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और एनआरसी, एनसीटीई दिल्ली के चेयरपर्सन डॉ. बनवारीलाल नाटिया बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। इस दौरान चांसलर सतनाम सिंह संधू, प्रो. चांसलर डॉ. आरएस बावा विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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इस मौके पर डॉ. बनवारी लाल नाटिया ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्था की ओर से की जा रही गतिविधियों को समाज कल्याण को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। वहीं, शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों के आंतरिक कौशल को बाहर लाने की अपील की। फ्रेडी स्वेन ने कहा कि वर्तमान दौर नेटवर्किंग, कनेक्टिविटी और उच्च तकनीक का है। उन्होंने कहा कि शायद ही भारत जैसी क्षमता, हुनर और अवसर किसी अन्य देश के पास है।
फोटो कैप्शन
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम 2022 का उद्घाटन करते डॉ. राजकुमार रंजन सिंह, डेनमार्क के एंबेसडर फ्रेडी स्वेन, चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और एनआरसीए एनसीटीई दिल्ली के चेयरपर्सन डॉ. बनवारीलाल नाटिया।