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Mohali News: छतबीड़ चिड़ियाघर के नजदीकी गावों में मुंह-खुर की बीमारी का एक भी केस नहीं प्रबंधकों के दावे की खुली पोल, पशुपालन विभाग ने जांच के बाद की रिपोर्ट तैयार

Sun, 25 Feb 2024 09:48 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Feb 2024 09:48 PM IST
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Not a single case of foot and mouth disease in the villages near Chhatbir Zoo
किसी जंगली जानवर से ही फैली छतबीड़ चिड़ियाघर में बीमारी संवाद न्यूज एजेंसी
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जीरकपुर। छतबीड़ चिड़ियाघर में बीते एक सप्ताह से मुंह-खुर की बीमारी फैली हुई है। जिसके चलते जू प्रबंधकों ने चिड़ियाघर का आधा हिस्सा बंद कर दिया है। ऐसी खबरें प्रकाशित होने के बाद जू प्रबंधकों ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि छतबीड़ चिड़ियाघर में मुंह-खुर की जो बीमारी फैली है, वह आसपास के गांवों के जानवरों से फैली है। वहीं पशुपालन विभाग ने जो जांच रिपोर्ट बनाई है, उसमें प्रबंधकों के इस दावे की पोल खुल गई है। इसमें बताया गय है कि छतबीड़ चिड़ियाघर के नजदीकी गावों में मुंह-खुर की बीमारी का एक भी केस सामने नहीं आया है।

पशु पालन विभाग ने छतबीड़ चिड़ियाघर के आसपास के लगभग सभी गावों का दौरा कर जानवरों की। इस दौरान किसी भी गांव में एक भी जानवर में यह बीमारी सामने नहीं आई है। अपनी रिपोर्ट को पुख्ता करने के लिए पशु पालन विभाग के डाक्टरों की टीम ने गांवों के सरपंचों व लोगों से लिखित में लिया है कि उनके गांव में मुंह-खुर की बीमारी का एक भी केस नहीं है। इससे यह साबित होता है कि यह बीमारी जू प्रबंधकों की लापरवाही के कारण फैली है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोई जंगली जानवर चिड़ियाघर की दीवार फांदकर अंदर आया है। जिसके बाद यह बीमारी फैली है। इस बात जू प्रबंधक दबा रहे हैं।
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बता दें की जू प्रबंधकों ने खबर छपने से पहले बीमारी फैलने की कोई सूचना नहीं लगाई गई थी। खबर के बाद टिकट काउंटर के साथ अन्य कई जगहों पर चिड़ियाघर में बीमारी फैलने की सूचना चस्पा की गई है। नाम न छापने की शर्त पर जू के एक कर्मचारी ने बताया कि पहले भी जंगली सुअर या अन्य जानवर जंगल के रास्ते चिड़ियाघर में घुस चुके हैं। हो सकता है कि इस बार भी कोई जानवर घुस गया हो। जू प्रबंधकों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार जनवरी 2018 में भी जू में मुंह-खुर की बीमारी फैली थी और करीब एक दर्जन जंगली बकरियों (पहाड़ी गोरल) की मौत हो गई थी।
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इस तरह किया जा सकता है बचाव पशु पालन विभाग की टीम की ओर से दो दिन की गई जांच में छतबीड़ चिड़ियाघर के आसपास के गांवों में मुंह-खुर की बीमारी से ग्रस्त एक भी जानवर नहीं पाया गया है। पशु पालन विभाग के डाक्टरों ने बताया कि जब यह बीमारी फैलती है तो 10 किलोमीटर के दायरे में जानवरों को चपेट में लेती है। यदि कोई जानवर बीमार होता है तो उसे बाकी जानवरों से अलग रखा जाता है और इलाज किया जाता है। इसके अलावा जो लोग जानवरों का ध्यान रखते हैं, उनको भी बाकी जानवरों से दूर रहना पड़ता है। वहीं डाक्टरों ने बताया कि चिड़ियाघर में तो रोज हजारों लोग आते हैं, यदि किसी व्यक्ति के जरिये पैरों या जूतों से वायरस बाहर जाता है तो वह बाहर के जानवरों को बीमार कर सकता है। इसलिए इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि यह बीमारी बाहर न फैले।



कोट्स:
पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर के आदेश पर हमारी टीम ने जीरकपुर के इलाकों में मुंह-खुर कि बीमारी कि जांच करवाई। इसमें डाक्टर मुनीश कुमार, अंशुल अरोड़ा, विपन कुमार, डा. बलजीत कौर और राजेश कुमार सहित दो टीमें गठित कर छतबीड़ चिड़ियाघर के नजदीकी गांव शताबगढ़, छत, रामपुर कलां, नयागांव के सैकड़ों घरों में मुंह-खुर बीमारी का एक भी केस सामने नहीं आया है। इसके चलते हमारी टीम ने गांव के सरपंचों से लिखित रिपोर्ट तैयार करवाई है। पशु पालन विभाग हर छह माह में जानवरों को ऐसी बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीनेशन करवाता है। उनके सर्कल के सभी जानवरों की वैक्सीनेशन पूरी है। जिससे हो सकता है कि चिड़ियाघर में फैली बीमारी गांव के किसी जानवर से नहीं, बल्कि किसी जंगली जानवर से है।


-डॉक्टर भूपिंदर सिंह, सीनियर वेटनरी ऑफिसर ब्लॉक डेराबस्सी

कोट
जू के हिरनों में फैली बीमारी के कारण अन्य जानवरों को अलग किया गया है। उनका इलाज चल रहा है। चिड़ियाघर में हिरन सफारी व अन्य जंगली जानवरों के बाड़ों को बंद होने की जानकारी टिकट काउंटर के साथ अन्य जगह पर लगा दी गई है, ताकि सैलनियों को कोई परेशानी न हो। मुंह-खुर की बीमारी इस समय काबू में है। फिलहाल अन्य जानवरों में इसके लक्षण दिखाई नहीं दिए हैं। यदि कुछ दिन में कोई और केस नहीं आता तो जल्द ही जू सैलानियों के लिए खोल दिया जाएगा।

-भलिंदर सिंह, रेंज ऑफिसर एनिमल मैनेजमेंट छतबीड़ चिड़ियाघर
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