फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Mohali News ›   No route for local bus in Zirakpur, no bus queue shelter, passengers stand in scorching heat and rain

जीरकपुर मे लोकल बस के लिए न रूट, न बस क्यू शेल्टर, भीषण गर्मी और बारिश में खड़ीं होती हैं सवारियां

Sat, 10 Jul 2021 02:00 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sat, 10 Jul 2021 02:00 AM IST
विज्ञापन
No route for local bus in Zirakpur, no bus queue shelter, passengers stand in scorching heat and rain
जीरकपुर। ट्राइसिटी में जीरकपुर ही एक ऐसा शहर है, जहां बस क्यू शेल्टर नहीं हैं। नतीजा तपती भीषण गर्मी और बारिश में लोगों को खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बसों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। सिर्फ इतना ही नहीं लोकल बस सर्विस के नाम पर लोगों को सीटीयू और हरियाणा रोडवेज का ही सहारा है। सीटीयू यहां जीरकपुर एरिया में लोकल बस सर्विस तो चला रही है, लेकिन पूरे शहर को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। जो यहां बसें चल रही हैं, बस क्यू शेल्टर नहीं होने के कारण न तो लोगों को रूट का पता है और न ही बसों का समय।
विज्ञापन

ऐसे में लोगों को ठीक से पता नहीं लगा पाता कि बस कहां रुकेगी और उनको कहां बस का इंतजार करना है। लोग बस पकड़ने के लिए इधर-उधर पूछताछ करते हुए सड़कों पर भटकते रहते हैं। चंडीगढ़ से जीरकपुर के बीच चलने वाली सीटीयू की कई बसें यहां आती हैं, लेकिन यहां बस चालक को बस रोकने के लिए जगह नहीं मिलती। इसके अलावा सवारियों के लिए भी कोई शेल्टर आदि बनाकर जगह तय नहीं की गई है। जहां पर लोग बसों का इंतजार कर सकें।
विज्ञापन

यहां कोई भी बस आने पर सवारियों को दौड़कर बस के पास पहुंचना पड़ता है और हर बार कंडक्टर से पूछना पड़ता है कि यह बस किस रूट पर चलेगी। जबकि जरूरत इस बात की है कि यहां बसों के रुकने के लिए जगह तय की जाए और वहां पर शेल्टर बनाया जाए ताकि धूप और बारिश में सवारियों को परेशानी न हो। इसके साथ ही बस का नंबर और उसके रूट की जानकारी भी शेल्टर में लिखी होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसी स्थायी जगह नहीं रुकतीं लंबे रूट की बसें
बस क्यू शेल्टर न होने से बसें भी किसी स्थायी जगह पर नहीं रुकतीं। लोगों का कहना है कि पेप्सू रोडवेज हर साल मनमर्जी से किराए में तो बढ़ोतरी कर देती है, लेकिन यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर ध्यान नहीं है। यहां से काफी लोग बस, ऑटो और कैब से चंडीगढ़, अंबाला, पटियाला और दिल्ली जाते हैं। काफी देर तक धूप में खड़े रहने से महिलाओं और बुजुर्गों को परेशानी होती है। लोगों को बस में सफर का फायदा तो हो रहा है, लेकिन बस क्यू शेल्टर न होने से गर्मी-बारिश की मार झेलनी पड़ती है।
बसें पकड़ने को लगानी पड़ती है दौड़
लुधियाना निवासी सिम्मी ने बताया कि जीरकपुर के पटियाला और सिंघपुरा चौक पर बसों के रुकने का कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। ड्राइवर चौक के आसपास जहां ब्रेक लगा दें, वहीं बस रुकती है। ऐसे में जिन यात्रियों के पास सामान थोड़ा ज्यादा होता है तो उन्हें दौड़ लगानी पड़ती है। बस यात्री सपना ने बताया कि यहां से काफी संख्या में लोग सुबह-शाम दिल्ली और पटियाला जाते हैं। बस और ऑटो के इंतजार के लिए मजबूरी में उन्हें सड़क पर खड़ा होना पड़ता है। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रोडवेज को बस क्यू शेल्टर बनवाना चाहिए। बस यात्री सुमिता ने बताया कि मुख्य चौराहों पर बस क्यू शेल्टर न होने से सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को होती है। जून, जुलाई, अगस्त में गर्मी और बारिश के मौसम में तो बाहर खड़ा होना काफी मुश्किल है।
शोपीस बना शहर का बस स्टैंड, खुले आसमान के नीचे सवारियां करती हैं इंतजार
अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर बना शहर का बस स्टैंड शोपीस बनकर रह गया है। बस का इंतजार करने के लिए लोगों के लिए उचित प्रबंध नहीं है, बल्कि लोग तपती धूप और खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, लंबे समय से शहरवासी प्रशासन से पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर उचित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, लेकिन आजतक कोई कदम नहीं उठाए गए।
शहर की बढ़ती आबादी और जरूरतों के हिसाब से शहर के बीचोंबीच ओवरब्रिज के नीचे बस स्टैंड का निर्माण किया गया, परन्तु इसकी हालत ऐसी है कि बस स्टैंड के अंदर सरकारी बसों के बजाए लोगों को निजी वाहन खड़े होते हैं। दूसरी ओर लंबे रूट में पंजाब को छोड़कर हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान आदि राज्यों को जाने वाली बसें जीरकपुर से न होकर ओवरब्रिज के ऊपर से चली जाती हैं। जिससे सवारियों को उक्त राज्यों में जाने के लिए बस पकड़ने को गांव सिंघपुरा लाइट प्वाइंट से आगे जाना पड़ता है और मौसम कैसा भी हो सवारियों को यहां खुले आसमान के नीचे खड़े होना पड़ता है।
प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
शहरवासियों की परेशानियों को देखते हुए प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। अगर शहर के अंदर आवाजाही करने वालों की संख्या हजारों में है तो उनके लिए परिवहन विभाग को उचित सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।

- गौरव सैणी, निवासी जीरकपुर।
जब सवारी सरकारी बस के अंदर सफर करती हैं तो उसकी खरीदी गई टिकट का पैसा सीधा सरकार के खजाने में जाता है। दूसरी ओर, सरकार का भी फर्ज बनता है कि वो सफर करने वाले हरेक यात्री को उसकी सुविधा के मुताबिक सुविधाएं प्रदान करें।
- ईदु हसन उर्फ चांद, निवासी बलटाना।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed