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पकिस्तान से नमक की खेप में हेरोइन मंगवाने के मामले में एनआईए को लगा झटका, जानिए मामला
Tue, 26 Nov 2019 11:09 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2019 11:09 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
पाकिस्तान से नमक की खेप में हेरोइन मंगवाने के मामले में सोमवार को नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को करार झटका लगा है। मामले के एक आरोपी अजय गुप्ता को एनआईए की विशेष अदालत ने जमानत दे दी है। गुप्ता पेश से सीए हैं। वहीं, अब एनआईए ने उनकी जमानत के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण लेने की तैयारी की है।
एनआईए की तरफ से अजय गुप्ता को करीब पांच महीने पहले केस में आरोपी बनाया गया था। इसके बाद उसकी तरफ से जमानत याचिका दायर की गई थी। एनआईए की तरफ से अदालत को दलील दी गई थी कि आरोपी काफी शातिर है। वह काफी समय उक्त कारोबार में लगा हुआ है। ऐसे में उसे इस संबंधी सारे दस्तावेज अदालत में पेश करने के लिए कहा जाए।
आरोपी के वकीलों की तरफ बैंक की स्टेटमेंट से लेकर वह सारे दस्तावेज अदालत में पेश कर दिए गए थे। हालांकि एनआईए की तरफ से अदालत में बताया गया कि आरोपी अजय गुप्ता ने कस्टम डिपार्टमेंट से 2011 में कस्टम हाउस एजेंट का लाइसेंस हासिल किया था। साल 2013 में उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। इसके बाद वह विदेश से कुछ नहीं मंगवा सकता था लेकिन गुप्ता 2019 तक ऐसा करता रहा है।
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एनआईए ने अदालत को बताया कि यदि कोई कंपनी विदेश से कोई सामान मंगवाती है तो ऐसे में कस्टम विभाग द्वारा उसका आर्डर तभी रिलीज किया जाता है जब उसके पास कस्टम हाउस एजेंट का लाइसेंस होता है। वहीं, कस्टम हाउस एजेंट का लाइसेंस लेेने के लिए एक उचित प्रक्रिया चलती रहती है। वहीं, जिन कंपनियों से नमक आया उन दो कंपनियों को भी कंपनियों ने संदिग्ध बताया है।
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एनआईए की तरफ से अजय गुप्ता को करीब पांच महीने पहले केस में आरोपी बनाया गया था। इसके बाद उसकी तरफ से जमानत याचिका दायर की गई थी। एनआईए की तरफ से अदालत को दलील दी गई थी कि आरोपी काफी शातिर है। वह काफी समय उक्त कारोबार में लगा हुआ है। ऐसे में उसे इस संबंधी सारे दस्तावेज अदालत में पेश करने के लिए कहा जाए।
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आरोपी के वकीलों की तरफ बैंक की स्टेटमेंट से लेकर वह सारे दस्तावेज अदालत में पेश कर दिए गए थे। हालांकि एनआईए की तरफ से अदालत में बताया गया कि आरोपी अजय गुप्ता ने कस्टम डिपार्टमेंट से 2011 में कस्टम हाउस एजेंट का लाइसेंस हासिल किया था। साल 2013 में उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। इसके बाद वह विदेश से कुछ नहीं मंगवा सकता था लेकिन गुप्ता 2019 तक ऐसा करता रहा है।
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एनआईए ने अदालत को बताया कि यदि कोई कंपनी विदेश से कोई सामान मंगवाती है तो ऐसे में कस्टम विभाग द्वारा उसका आर्डर तभी रिलीज किया जाता है जब उसके पास कस्टम हाउस एजेंट का लाइसेंस होता है। वहीं, कस्टम हाउस एजेंट का लाइसेंस लेेने के लिए एक उचित प्रक्रिया चलती रहती है। वहीं, जिन कंपनियों से नमक आया उन दो कंपनियों को भी कंपनियों ने संदिग्ध बताया है।