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राष्ट्रीय लोक अदालत : 21,873 मामलों का निपटारा, 203 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली
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मोहाली। शनिवार को मोहाली में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान 21,873 मामलों का निपटारा आपसी सहमति और समझौते के आधार पर किया गया। लोक अदालत में कुल 26,836 मुकदमेबाजी-पूर्व और लंबित मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) मोहाली के अध्यक्ष अतुल कसाना के नेतृत्व में यह आयोजन हुआ। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने मार्गदर्शन प्रदान किया। डीएलएसए की सचिव मेघा धालीवाल ने मामलों की जानकारी दी। लोक अदालत में आपराधिक शमनीय अपराध, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामले शामिल थे। बैंक वसूली और मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) से संबंधित मामले भी निपटाए गए। इसके अतिरिक्त, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, बिजली और पानी के बिल से जुड़े मामले भी निपटाए गए। सेवा संबंधी, राजस्व और विभिन्न दीवानी विवादों का भी समाधान किया गया। विभिन्न लोक अदालत पीठों ने कुल 2,03,23,40,625 रुपये की राशि जुर्माने या अधिनिर्णय के रूप में एकत्र की।
पीठों का गठन
राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जिला मुख्यालय पर 18 पीठें गठित की गई थीं। इन पीठों की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश और सिविल न्यायाधीश ने की। औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और जिला उपभोक्ता आयोग के पीठासीन अधिकारी भी शामिल थे। खरड़ उप-मंडल में पांच और डेराबस्सी में छह पीठें बनाई गई थीं। इन पीठों के माध्यम से विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई की गई।
आयोजन से पूर्व की बैठकें
लोक अदालत के आयोजन से पहले जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कसाना ने बैठकें की थीं। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों, बैंकों, श्रम विभाग और बीमा कंपनियों के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य अधिक से अधिक मामलों की पहचान करना था। इसका लक्ष्य पक्षकारों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना और अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना था।
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पीठों का गठन
राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जिला मुख्यालय पर 18 पीठें गठित की गई थीं। इन पीठों की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश और सिविल न्यायाधीश ने की। औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और जिला उपभोक्ता आयोग के पीठासीन अधिकारी भी शामिल थे। खरड़ उप-मंडल में पांच और डेराबस्सी में छह पीठें बनाई गई थीं। इन पीठों के माध्यम से विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई की गई।
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आयोजन से पूर्व की बैठकें
लोक अदालत के आयोजन से पहले जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कसाना ने बैठकें की थीं। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों, बैंकों, श्रम विभाग और बीमा कंपनियों के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य अधिक से अधिक मामलों की पहचान करना था। इसका लक्ष्य पक्षकारों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना और अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना था।
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