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कोरोना काल में म्यूजियम बंद हुआ तो मोहाली के कलाकार ने बना डाली मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रतिमा
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मोहाली। युवा पीढ़ी को अपने सिख इतिहास और पंजाब विरासत से जोड़ने के लिए बलौंगी में सिख म्यूजियम बनाने वाले कलाकार परविंदर सिंह ने कोविड काल में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की लाइव प्रतिमा तैयार की है। करीब डेढ़ साल की समय अवधि में उन्होंने इस 6 फुट ऊंची प्रतिमा को बड़ी बारीकी से बनाया है। प्रतिमा देखने से लगता है कि मानो यह प्रतिमा अभी बोल उठेगी।
उन्होंने बुधवार इस प्रतिमा से मीडिया के रूबरू करवाया और कहा कि उनकी इच्छा है कि वह इस प्रतिमा को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भेंट करें। इसके साथ ही उन्होंने सीएम से मांग की है कि सिख अजायब घर को स्थायी जगह अलाट की जाए, जिससे दुनिया वाले उनकी ओर से तैयार किए गए इस अमूल्य खजाने से सदा रूबरू हो पाएं।
परविंदर सिंह ने बताया कि जैसे ही कोरोना लॉकडाउन लगा सब कुछ बंद हो गया। ऐसे में उन्हें समझ हीं नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। इसके बाद उनके दिमाग में आया कि क्यों न वह राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की लाइव प्रतिमा तैयार करें। उनकी सोच थी कि हो सकता है इसी बहाने से कैप्टन अमरिंदर सिंह तक उनकी ओर से तैयार किए गए यूजियम की जानकारी पहुंच जाए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के कई वीडियो और तस्वीरें देखी। अपने बच्चों की मदद से उनके पहनावे से लेकर अन्य चीजों को गहनता से देखा। इसके बाद उन्होंने इसे बनाने का काम शुरू किया और इस प्रतिमा में फाइबर का इस्तेमाल किया है। जबकि कपड़े, जूते, मूच्छें सब असली है। प्रतिमा को उन्होंने छह फुट ऊंचाई दी है और इसे बनाने के लिए कई रातें उन्होंने लगातार काम किया है। जिससे यह सपना हकीकत में बदल पाया है।
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उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वह उनकी ओर से बनाए गए म्यूजिक का दौरा करें। साथ ही इसे स्थायी जगह और वित्तीय मदद पहुंचाने के लिए मदद करें। उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की प्रतिमा भी बनाई थी।
स्कूटर मैनेनिक से कलाकार तक सफर
परविंदर सिंह ने बताया कि वह पेशे से स्कूटर मैकेनिक हैं। लेकिन उनकी इच्छा थी कि युवा पीढ़ी अपने सिख इतिहास को अच्छी तरह जाने। ऐसे में उनकी तरफ से सिख म्यूजियम बनाने की दिशा में काम शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब के कई वीर सपूतों, गुरुओं और योद्घाओं की प्रतिमाएं तैयार की हैं। पहले यह म्यूजियम मोहाली-लांडरां रोड पर था। इसके बाद अब बलौंगी में शामलात भूमि पर म्यूजियम चल रहा है, लेकिन अभी तक स्थायी जगह नहीं मिल पाई है। ऐसे में इसके लिए उचित जगह अलॉट की जाए। उन्होंने बताया कि इन दिनों वह ट्राइसिटी में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के गुरुद्वारों में सिंह शहीदों के मॉडल बना रहे हैं।
म्यूजियम में लोगों का प्रवेश मुफ्त
परविंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने जो सिख म्यूजियम बनाया है, उसमें किसी भी तरह का कोई प्रवेश शुल्क नहीं है और इसे मुफ्त देख सकते हैं। कोई भी व्यक्ति म्यूजियम में आकर सिख इतिहास से रूबरू हो सकता है। म्यूजियम में 150 से अधिक लाइव प्रतिमाएं हैं। इसके लिए सिख हेरिटेज एंड कल्चरल सोसायटी का गठन किया गया है और इस म्यूजियम का कई राजनेता दौरा कर चुके हैं।
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उन्होंने बुधवार इस प्रतिमा से मीडिया के रूबरू करवाया और कहा कि उनकी इच्छा है कि वह इस प्रतिमा को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भेंट करें। इसके साथ ही उन्होंने सीएम से मांग की है कि सिख अजायब घर को स्थायी जगह अलाट की जाए, जिससे दुनिया वाले उनकी ओर से तैयार किए गए इस अमूल्य खजाने से सदा रूबरू हो पाएं।
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परविंदर सिंह ने बताया कि जैसे ही कोरोना लॉकडाउन लगा सब कुछ बंद हो गया। ऐसे में उन्हें समझ हीं नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। इसके बाद उनके दिमाग में आया कि क्यों न वह राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की लाइव प्रतिमा तैयार करें। उनकी सोच थी कि हो सकता है इसी बहाने से कैप्टन अमरिंदर सिंह तक उनकी ओर से तैयार किए गए यूजियम की जानकारी पहुंच जाए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के कई वीडियो और तस्वीरें देखी। अपने बच्चों की मदद से उनके पहनावे से लेकर अन्य चीजों को गहनता से देखा। इसके बाद उन्होंने इसे बनाने का काम शुरू किया और इस प्रतिमा में फाइबर का इस्तेमाल किया है। जबकि कपड़े, जूते, मूच्छें सब असली है। प्रतिमा को उन्होंने छह फुट ऊंचाई दी है और इसे बनाने के लिए कई रातें उन्होंने लगातार काम किया है। जिससे यह सपना हकीकत में बदल पाया है।
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उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वह उनकी ओर से बनाए गए म्यूजिक का दौरा करें। साथ ही इसे स्थायी जगह और वित्तीय मदद पहुंचाने के लिए मदद करें। उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की प्रतिमा भी बनाई थी।
स्कूटर मैनेनिक से कलाकार तक सफर
परविंदर सिंह ने बताया कि वह पेशे से स्कूटर मैकेनिक हैं। लेकिन उनकी इच्छा थी कि युवा पीढ़ी अपने सिख इतिहास को अच्छी तरह जाने। ऐसे में उनकी तरफ से सिख म्यूजियम बनाने की दिशा में काम शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब के कई वीर सपूतों, गुरुओं और योद्घाओं की प्रतिमाएं तैयार की हैं। पहले यह म्यूजियम मोहाली-लांडरां रोड पर था। इसके बाद अब बलौंगी में शामलात भूमि पर म्यूजियम चल रहा है, लेकिन अभी तक स्थायी जगह नहीं मिल पाई है। ऐसे में इसके लिए उचित जगह अलॉट की जाए। उन्होंने बताया कि इन दिनों वह ट्राइसिटी में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के गुरुद्वारों में सिंह शहीदों के मॉडल बना रहे हैं।
म्यूजियम में लोगों का प्रवेश मुफ्त
परविंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने जो सिख म्यूजियम बनाया है, उसमें किसी भी तरह का कोई प्रवेश शुल्क नहीं है और इसे मुफ्त देख सकते हैं। कोई भी व्यक्ति म्यूजियम में आकर सिख इतिहास से रूबरू हो सकता है। म्यूजियम में 150 से अधिक लाइव प्रतिमाएं हैं। इसके लिए सिख हेरिटेज एंड कल्चरल सोसायटी का गठन किया गया है और इस म्यूजियम का कई राजनेता दौरा कर चुके हैं।