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स्थायी नहीं करने पर मनरेगा मुलाजिमों ने विकास भवन पर किया प्रदर्शन, पंजाब सरकार को कोसा

Fri, 13 Aug 2021 02:05 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 02:05 AM IST
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MNREGA workers protested at Vikas Bhawan for not making it permanent, cursing Punjab government
मोहाली। ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के मनरेगा कर्मचारियों ने वीरवार को विकास भवन पर पक्का मोर्चा शुरू कर दिया है। मनरेगा कर्मचारी अपने विभाग में स्थायी किए जाने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर ये कर्मचारी पिछले एक माह से हड़ताल पर थे। अब सरकार की वादाखिलाफी से गुस्साए मनरेगा कर्मचारियों ने मांगे पूरी न होने तक पक्का मोर्चा लगाने का एलान किया है। इस कारण राज्य भर से मनरेगा कर्मी मोहाली पहुंचे और विकास भवन के सामने धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के मनरेगा कर्मचारियों ने स्थायी करने की मांग को लेकर विकास भवन पर पक्का मोर्चा लगा दिया है। मोहाली में कच्चे अध्यापक भी पिछले करीब दो माह से स्थायी करने की मांग को लेकर शिक्षा विभाग और पीएसईबी के मुख्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। स्थायी किए जाने की मांग को लेकर राज्य के मनरेगा कर्मचारी बीती 9 जुलाई से हड़ताल पर थे। 3 अगस्त को यूनियन के प्रतिनिधिमंडल की विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। जिसमें स्थायी करने तक हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर मनरेगा मुलाजिमों को वेतन देने, 58 साल की उम्र तक ठेका जारी रखने, पीएफ और मेडिकल सुविधा सहित कर्मचारी की मौत होने पर परिजनों को नौकरी और आर्थिक सहायता देने को लेकर सहमति बनी थी। यूनियन नेताओं ने बताया कि इन समझौतों को दो दिनों के भीतर लागू करने का आश्वासन देकर हड़ताल खत्म करवाई गई थी। लेकिन दो दिन बाद विभाग के अधिकारी इस समझौते से मुकर गए।
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इस मौके पर यूनियन के प्रधान वरिंदर सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से लगातार की जा रही वादाखिलाफी के बाद अब पक्का मोर्चा लगाया गया है। यह मोर्चा कर्मचारियों को स्थायी किए जाने तक जारी रहेगा। यूनियन प्रधान ने कहा कि वर्ष 2008 से मनरेगा मुलाजिमों की भर्ती स्थायी भर्ती की तर्ज पर निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो रही है। उन्होंने कहा कि ठेका मुलाजिम वेलफेयर एक्ट 2016 के तहत मनरेगा मुलाजिमों को स्थायी किया जा सकता है। लेकिन मौजूदा कांग्रेस सरकार एक्ट में संशोधन कर ठेका मुलाजिमों को इससे बाहर करना चाहती है। एक्ट में संशोधन के लिए पांच कैबिनेट मंत्रियों की सब-कमेटी भी बनाई गई, लेकिन अभी तक कोई नतीजा सामने नहीं आया। यूनियन प्रधान ने कहा कि तीन साल पहले विभाग के मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने मनरेगा मुलाजिमों को सर्व शिक्षा अभियान और रमसा अध्यापकों की तर्ज पर स्थायी करने का भरोसा देकर हड़ताल खत्म करवाई थी। इसके बाद से कई बार बैठकें हो चुकी हैं, जो बेनतीजा रहीं।
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इस धरने को यूनियन के जनरल सचिव अमृतपाल सिंह, वित्त सचिव मनशा सिद्धू, प्रेस सचिव अमरीक सिंह, वरिष्ठ उप प्रधान रणधीर सिंह, उप प्रधान हरपिंदर सिंह, हरइंदरपाल जोशन, सलाहकार जगतार सिंह बब्बू और ऑडिटर रमन कुमार ने भी संबोधित किया। इन्होंने कहा कि मनरेगा कर्मचारी पिछले 12 साल से सरकार और विभाग की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। नेताओं ने यह भी कहा कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान मनरेगा के तहत 1600 करोड़ रुपये खर्च कर गांवों की हालत सुधारी गई है। मनरेगा मुलाजिमों के वेतन के लिए केंद्र सरकार की ओर से कुल खर्च का 6 प्रतिशत अलग से दिया जाता है। पिछले कई साल का 100 करोड़ रुपये से अधिक पैसा वेतन और अन्य खर्च करने के बावजूद विभाग के पास बचा हुआ है। जबकि मुलाजिमों को लाभ देने के नाम पर विभाग पैसा न होने का तर्क देता है। इन नेताओं ने कहा कि स्थायी होने तक पक्का मोर्चा जारी रहेगा। मोर्चे में तरनतारन के प्रधान बलजीत सिंह, मुक्तसर के हरविंदर सिंह, फाजिल्का के संजीव कुमार, हरमिंदर सिंह पंछी, बरनाला के गुरदीप दास, मोगा के कुलविंदर, पठानकोट के जगबीर, फतेहगढ़ साहिब के मनदीप, मानसा के नितेश, मोहाली के सुखदीप और पटियाला के जगदीश सहित अन्य मनरेगा मुलाजिमों ने हिस्सा लिया।
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