{"_id":"621cb83acd96564abf76480e","slug":"many-organizations-demonstrated-outside-the-punjab-school-education-board","type":"story","status":"publish","title_hn":"12वीं की किताब में गलत इतिहास: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के बाहर प्रदर्शन, संगठनों ने कहा- गलती सुधारे वरना संघर्ष तेज करेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
12वीं की किताब में गलत इतिहास: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के बाहर प्रदर्शन, संगठनों ने कहा- गलती सुधारे वरना संघर्ष तेज करेंगे
Mon, 28 Feb 2022 05:29 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 28 Feb 2022 05:29 PM IST
सार
पंजाबी कलाकार दर्शन ओलख का कहना है कि पंजाबी की किताब और पंजाब के इतिहास के साथ जो छेड़खानी की जा रही है उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
प्रदर्शन करते संगठन।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) की 12वीं कक्षा की इतिहास की किताब में गलती का मामला तूल पकड़ने लगा है। सोमवार को संघर्ष कर रही जत्थेबंदियों के साथ फिल्मी कलाकार भी इस संघर्ष में कूद पड़े। इस दौरान फेज आठ स्थित पीएसईबी भवन के बाहर रोष प्रदर्शन किया गया। साथ ही पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड व पंजाब सरकार को इस गलती को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने की चेतावनी दी। अगर ठीक नहीं किया गया तो संगठन अपना संघर्ष तेज करेंगे।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक इतिहास की किताब में खामियों को लेकर एक महीने से किसान संगठनों के नुमाइंदे और सिख संगठन पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के बाहर धरना दे रहे हैं लेकिन जब किसी भी स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने फेज आठ पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के बाहर रोष प्रदर्शन किया।
विज्ञापन
रोष प्रदर्शन में राज्य के अलग-अलग इलाकों से सैकड़ों लोग पहुंचे। वहीं, इस प्रदर्शन में फिल्मी अदाकार से लेकर थिएटर के लोगों ने भी हिस्सा लिया। पंजाबी कलाकार दर्शन ओलख का कहना है कि पंजाबी की किताब और पंजाब के इतिहास के साथ जो छेड़खानी की जा रही है उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
यह हमारी धरोहर है। हमें इसमें कोई भी बदलाव नहीं चाहिए। सिख धर्म का इतिहास एक सच्चाई है, उससे बदलने का मतलब है, सच को छिपाना। जिस तरह कुछ ताकतें कोशिश कर रही हैं। किसान संगठनों के नेता बलदेव सिंह सिरसा ने वहां आए लोगों को सिख इतिहास के बारे में समझाया और कहा कि यह कोशिश बहुत पहले से ही हो रही है, उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई। एक महीने से चल रहे धरने के बावजूद एक बार भी किताबों में छपी गलती को नहीं माना गया।