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रेरा का बड़ा फैसला : 15 साल बाद बिल्डर लौटाएगा 22.20 लाख रुपये
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने रॉयल एम्पायर प्रोजेक्ट के बिल्डर को बड़ा झटका दिया है। अथॉरिटी ने एक फ्लैट खरीदार को 22.20 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। यह आदेश करीब पंद्रह साल बाद भी कब्जा न मिलने के मामले में आया है।रेरा ने बिल्डर को जमा की गई राशि पर ब्याज भी देने का निर्देश दिया है। यह ब्याज भुगतान की तारीख से पंजाब रेरा नियमों के तहत निर्धारित दर से देना होगा। शिकायतकर्ता ने दस जून 2011 को रॉयल एम्पायर (रॉयल मिनार) में फ्लैट नंबर 502, ब्लॉक-ए बुक किया था। फ्लैट की कुल कीमत पैंतीस लाख रुपये तय की गई थी। खरीदार ने अलग-अलग तारीखों पर कुल 22.20 लाख रुपये बिल्डर को अदा किए थे। समझौते के अनुसार, फ्लैट का निर्माण इक्कीस से चौबीस महीने के भीतर पूरा होना था। इस हिसाब से जून 2013 तक खरीदार को कब्जा मिल जाना चाहिए था। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ और खरीदार को न तो कब्जा मिला और न ही उसकी रकम वापस की गई।
आवासीय की जगह बना व्यावसायिक प्रोजेक्ट
विज्ञप्ति में बताया गया है कि जमीन हस्तांतरण के बाद आवासीय प्रोजेक्ट को व्यावसायिक प्रोजेक्ट में बदल दिया गया था। इसी कारण खरीदार को फ्लैट का कब्जा नहीं मिल पाया। रेरा ने इस गंभीर उल्लंघन पर संज्ञान लिया है। अथॉरिटी ने बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। यह मामला फ्लैट बुकिंग के लगभग पंद्रह साल बाद सामने आया है। खरीदार को इतने लंबे समय तक अपने निवेश का इंतजार करना पड़ा। रेरा के इस आदेश से अन्य फ्लैट खरीदारों को भी उम्मीद मिली है। यह रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।
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मोहाली। पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने रॉयल एम्पायर प्रोजेक्ट के बिल्डर को बड़ा झटका दिया है। अथॉरिटी ने एक फ्लैट खरीदार को 22.20 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। यह आदेश करीब पंद्रह साल बाद भी कब्जा न मिलने के मामले में आया है।रेरा ने बिल्डर को जमा की गई राशि पर ब्याज भी देने का निर्देश दिया है। यह ब्याज भुगतान की तारीख से पंजाब रेरा नियमों के तहत निर्धारित दर से देना होगा। शिकायतकर्ता ने दस जून 2011 को रॉयल एम्पायर (रॉयल मिनार) में फ्लैट नंबर 502, ब्लॉक-ए बुक किया था। फ्लैट की कुल कीमत पैंतीस लाख रुपये तय की गई थी। खरीदार ने अलग-अलग तारीखों पर कुल 22.20 लाख रुपये बिल्डर को अदा किए थे। समझौते के अनुसार, फ्लैट का निर्माण इक्कीस से चौबीस महीने के भीतर पूरा होना था। इस हिसाब से जून 2013 तक खरीदार को कब्जा मिल जाना चाहिए था। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ और खरीदार को न तो कब्जा मिला और न ही उसकी रकम वापस की गई।
आवासीय की जगह बना व्यावसायिक प्रोजेक्ट
विज्ञप्ति में बताया गया है कि जमीन हस्तांतरण के बाद आवासीय प्रोजेक्ट को व्यावसायिक प्रोजेक्ट में बदल दिया गया था। इसी कारण खरीदार को फ्लैट का कब्जा नहीं मिल पाया। रेरा ने इस गंभीर उल्लंघन पर संज्ञान लिया है। अथॉरिटी ने बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। यह मामला फ्लैट बुकिंग के लगभग पंद्रह साल बाद सामने आया है। खरीदार को इतने लंबे समय तक अपने निवेश का इंतजार करना पड़ा। रेरा के इस आदेश से अन्य फ्लैट खरीदारों को भी उम्मीद मिली है। यह रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।
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