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लांडरां जमीन विवाद: सोहाना एसएचओ, डीएसपी समेत चार पर कागजात से छेड़छाड़ का आरोप, डीजीपी को शिकायत
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मोहाली। लांडरां में 25 एकड़ जमीन के विवाद में नया मोड़ आ गया है। दि अनभाओ फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट (लांडरां) के ट्रस्टी लखबीर सिंह, अमनदीप सिंह और गुरप्रीत सिंह ने सोहाना थाने के एसएचओ, डीएसपी हरसिमरन सिंह बल, पटियाला निवासी राजमोहन कौर और एडवोकेट एकजोत सिंह के खिलाफ पंजाब के डीजीपी को शिकायत दी है। ट्रस्टियों ने इन सभी पर जमीन से संबंधित असली कागजातों से छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगाए हैं और उचित कार्रवाई की मांग की है।
ट्रस्टियों का आरोप है कि राजमोहन कौर और उनके अटार्नी एकजोत सिंह ने पुलिस को गुमराह करके 2023 में उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करवाई थी। अब, ट्रस्टियों का कहना है कि उक्त पुलिस अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान कर रहे हैं। डीजीपी ने इस मामले की जांच एडीजीपी एएस राय को सौंपी थी। अब ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन के एलके यादव इसकी जांच कर रहे हैं।
ट्रस्टियों ने बताया कि इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण और असली दस्तावेज, जिनमें जमीन की मूल ट्रस्ट डीड, सेल डीड, राजमोहन कौर के स्व-सत्यापित पैन कार्ड और आधार कार्ड की फोटोकॉपी, बैठकों की वास्तविक तारीखें (15 जनवरी 2002, 15 जनवरी 2019, 21 जनवरी 2019, 10 मई 2021), ट्रस्ट से अलग-अलग लोगों के इस्तीफे की मूल प्रतियां और सही नियुक्ति की तारीख का मूल घोषणा पत्र शामिल हैं। ये सभी दस्तावेज 9 दिसंबर 2024 को सोहाना के एसएचओ सिमरन सिंह की कस्टडी में थाने में जमा करवाए गए थे।
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ट्रस्टियों का आरोप है कि ये असली कागजात गैरकानूनी ढंग से राजमोहन कौर को पहुंचा दिए गए, जिन्होंने उन्हें सबूत के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। उन्होंने बताया कि राजमोहन कौर पहले दिन से दावा कर रही हैं कि उनके असली दस्तावेज चोरी हो गए हैं, जिसके संबंध में उन्होंने थाने में डीडीआर भी दर्ज करवाई थी। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज होने का भी दावा किया था, जिसे वह आज तक अदालत में पेश नहीं कर सकी हैं।
दूसरी ओर, ट्रस्टी के वकील शुरुआत से ही जमीन से संबंधित असली कागजात हर सुनवाई में कोर्ट को दिखाते आए हैं। ट्रस्टियों का कहना है कि सोहाना पुलिस के एसएचओ सिमरन सिंह ने इन असली कागजातों को फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) में जांच के लिए भेजने की बात कहकर थाने में जमा करवा लिया था। अब उनका सवाल है कि अगर पुलिस ने उनके कागजात लैब में भेजे थे, तो वे राजमोहन कौर के पास कैसे पहुंचे। उनका आरोप है कि पुलिस हिरासत या एफएसएल लैब से उनके असली कागजात राजमोहन कौर को दिए गए हैं ताकि उनके खिलाफ फैसला आ सके, या फिर ये कागजात चोरी करवाए गए हैं, जिसके लिए पुलिस को चोरी का मामला दर्ज करना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की मिलीभगत से उनकी जमीन से संबंधित असली कागजात बदल दिए गए हैं और एफएसएल रिपोर्ट में उन्हें झूठा साबित करने की कोशिश की जा रही है। ट्रस्टियों का दावा है कि राजमोहन कौर ने ये कागजात सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश किए थे, जिसका सबूत उस दिन के आदेश में शामिल है।
ट्रस्टी लखबीर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने इस बारे में एसपी हरबीर सिंह अटवाल से बात की, तो उन्होंने लैब में फोन किया और कहा कि उन्हें लगता है कि असली कागजात के साथ फेरबदल की गई है। इस पर लैब अधिकारी ने उन्हें आदेश की कॉपी लेकर लैब आकर कागजात जांचने के लिए कहा था, लेकिन अगले ही दिन उन्होंने अपना बयान बदल दिया और कहा कि उन्हें जाने की अनुमति नहीं है। एसएसपी दीपक पारीक ने भी यही कहा कि लैब में जाकर कागजात देखने की अनुमति किसी को नहीं होती।
कोई दस्तावेज किसी को नहीं दिए गए
इस मामले पर जब सोहाना थाने के एसएचओ सिमरन सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा, ऐसी कोई बात नहीं है। कोई दस्तावेज किसी को नहीं दिए गए हैं। वह किस दस्तावेज की बात कर रहे हैं, पहले वह यह बताएं।
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ट्रस्टियों का आरोप है कि राजमोहन कौर और उनके अटार्नी एकजोत सिंह ने पुलिस को गुमराह करके 2023 में उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करवाई थी। अब, ट्रस्टियों का कहना है कि उक्त पुलिस अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान कर रहे हैं। डीजीपी ने इस मामले की जांच एडीजीपी एएस राय को सौंपी थी। अब ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन के एलके यादव इसकी जांच कर रहे हैं।
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ट्रस्टियों ने बताया कि इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण और असली दस्तावेज, जिनमें जमीन की मूल ट्रस्ट डीड, सेल डीड, राजमोहन कौर के स्व-सत्यापित पैन कार्ड और आधार कार्ड की फोटोकॉपी, बैठकों की वास्तविक तारीखें (15 जनवरी 2002, 15 जनवरी 2019, 21 जनवरी 2019, 10 मई 2021), ट्रस्ट से अलग-अलग लोगों के इस्तीफे की मूल प्रतियां और सही नियुक्ति की तारीख का मूल घोषणा पत्र शामिल हैं। ये सभी दस्तावेज 9 दिसंबर 2024 को सोहाना के एसएचओ सिमरन सिंह की कस्टडी में थाने में जमा करवाए गए थे।
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ट्रस्टियों का आरोप है कि ये असली कागजात गैरकानूनी ढंग से राजमोहन कौर को पहुंचा दिए गए, जिन्होंने उन्हें सबूत के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। उन्होंने बताया कि राजमोहन कौर पहले दिन से दावा कर रही हैं कि उनके असली दस्तावेज चोरी हो गए हैं, जिसके संबंध में उन्होंने थाने में डीडीआर भी दर्ज करवाई थी। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज होने का भी दावा किया था, जिसे वह आज तक अदालत में पेश नहीं कर सकी हैं।
दूसरी ओर, ट्रस्टी के वकील शुरुआत से ही जमीन से संबंधित असली कागजात हर सुनवाई में कोर्ट को दिखाते आए हैं। ट्रस्टियों का कहना है कि सोहाना पुलिस के एसएचओ सिमरन सिंह ने इन असली कागजातों को फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) में जांच के लिए भेजने की बात कहकर थाने में जमा करवा लिया था। अब उनका सवाल है कि अगर पुलिस ने उनके कागजात लैब में भेजे थे, तो वे राजमोहन कौर के पास कैसे पहुंचे। उनका आरोप है कि पुलिस हिरासत या एफएसएल लैब से उनके असली कागजात राजमोहन कौर को दिए गए हैं ताकि उनके खिलाफ फैसला आ सके, या फिर ये कागजात चोरी करवाए गए हैं, जिसके लिए पुलिस को चोरी का मामला दर्ज करना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की मिलीभगत से उनकी जमीन से संबंधित असली कागजात बदल दिए गए हैं और एफएसएल रिपोर्ट में उन्हें झूठा साबित करने की कोशिश की जा रही है। ट्रस्टियों का दावा है कि राजमोहन कौर ने ये कागजात सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश किए थे, जिसका सबूत उस दिन के आदेश में शामिल है।
ट्रस्टी लखबीर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने इस बारे में एसपी हरबीर सिंह अटवाल से बात की, तो उन्होंने लैब में फोन किया और कहा कि उन्हें लगता है कि असली कागजात के साथ फेरबदल की गई है। इस पर लैब अधिकारी ने उन्हें आदेश की कॉपी लेकर लैब आकर कागजात जांचने के लिए कहा था, लेकिन अगले ही दिन उन्होंने अपना बयान बदल दिया और कहा कि उन्हें जाने की अनुमति नहीं है। एसएसपी दीपक पारीक ने भी यही कहा कि लैब में जाकर कागजात देखने की अनुमति किसी को नहीं होती।
कोई दस्तावेज किसी को नहीं दिए गए
इस मामले पर जब सोहाना थाने के एसएचओ सिमरन सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा, ऐसी कोई बात नहीं है। कोई दस्तावेज किसी को नहीं दिए गए हैं। वह किस दस्तावेज की बात कर रहे हैं, पहले वह यह बताएं।