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Mohali: सेना में ले गई देशभक्ति, शौक ने दिलाया अर्जुन पुरस्कार, काफी प्रेरक है मोहाली एसपी ट्रैफिक की जिंदगी
Sun, 25 Dec 2022 09:55 AM IST
निवेदिता वर्मा
ऋषि शर्मा, अमर उजाला, मोहाली
ऋषि शर्मा, अमर उजाला, मोहाली
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 25 Dec 2022 09:55 AM IST
सार
जगजीत सिंह को वर्ष 2000 में अर्जुन अवार्ड दिया गया था। वह पंजाब के लिए रोइंग में अर्जुन अवार्ड पाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। वर्ष 2007 में उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
भी मिल चुका है।
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जगजीत सिंह जल्लाह
- फोटो : फाइल
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विस्तार
अर्जुन अवार्डी जगजीत सिंह जल्लाह के पिता जोगिंदर सिंह फौज में थे। उन्होंने देश के लिए तीन जंगें लड़ीं। ऐसे में देशभक्ति की भावना बचपन से ही जगजीत के लहू में दौड़ रही थी। वे कहते हैं कि देशभक्ति मुझे सेना में ले गई, रोइंग के शौक ने अर्जुन अवार्ड दिलाया और अब मेरे बच्चे भी पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
मूलरूप से जिला लुधियाना (पंजाब) से करीब 35 किलोमीटर दूर गांव जल्लाह के रहने वाले जगजीत सिंह फिलहाल पंजाब पुलिस में एसपी यातायात के रूप में मोहाली में कार्यरत हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि 20 फरवरी 1966 को उनका जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था। पिता के सेना में रहने के कारण उनकी मां सुरजीत कौर ने ही उनका पालन-पोषण किया। बचपन से ही खेलों में रुचि थी। उन्होंने स्कूल में ही वर्ष 1977-78 में पहली बार वार्षिक खेलों में भाग लिया था। इसमें वह पहले स्थान पर रहे थे। 1984 में फौज में भर्ती हुए। सेना में ही उनके रोइंग का सफर शुरू हुआ, फिर स्टेट के साथ नेशनल रोइंग चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स, एशिया कप, ऑल इंडिया पुलिस चैंपियनशिप में कई स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर देश की सेवा की। वर्ष 2001 में पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर के तौर पर ज्वाइन किया था।
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कोच से हुए प्रेरित, 10 साल तक रहे कैप्टन
जगजीत सिंह ने बताया कि उन्हें वर्ष 2000 में अर्जुन अवार्ड दिया गया था। वह पंजाब के लिए रोइंग में अर्जुन अवार्ड पाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। वर्ष 2007 में उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
भी मिल चुका है। बताया कि सेना में जाने के बाद जब उन्हें पता चला कि उनके कोच कर्नल पीके ओबरॉय रोइंग में देश के पहले अर्जुन अवार्डी हैं तो उन्होंने भी ठान लिया कि वह भी अर्जुन अवार्ड पाकर रहेंगे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। रोज 8 से 10 घंटे अभ्यास करने लगे। इसकी बदौलत उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक बटोरे। जगजीत सिंह ने बताया कि देश-विदेश में हुए कई मुकाबलों में भाग लेने के अलावा उन्होंने देश की टीम के 10 साल तक बतौर कैप्टन रहे। उन्हें फौज से कई प्रशंसापत्र मिलने के साथ ही राज्य की ओर से महाराजा रणजीत सिंह अवार्ड, अर्जुन अवार्ड, राष्ट्रपति प्रशंसापत्र आदि मिल चुके हैं। जल्लाह ने बताया कि उन्होंने अब तक जो भी मुकाम हासिल किया है उसमें उनकी पत्नी और कोच का बड़ा योगदान है। इसके अलावा उनके पिता जोगिंदर सिंह, माता सुरजीत कौर और पत्नी भूपिंदर कौर का बहुत योगदान है।
बेटा और दो बेटियां भी रोइंग खिलाड़ी
जगजीत सिंह का एक बेटा और दो बेटियां हैं। तीनों रोइंग खिलाड़ी हैं। बेटे चंदनदीप सिंह ने स्टेट मेडल, 14 नेशनल मेडल और एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं। उन्होंने बीए ऑनर्स और एलएलएम की है। अब वह पीएचडी कर रहे हैं। वह 2021 बैच के डीएसएपी हैं। वहीं बेटी डॉ. मनदीप कौर ने नेशनल में रजत पदक जीता है। उन्हें 2018 में स्वास्थ्य विभाग में नौकरी मिल गई है। अभी वह एमडी (गायनी) कर रही हैं। दूसरी बेटी संदीप कौर ने 2022 में हुई नेशनल गेम्स में स्वर्ण और रजत पदक जीता है। वह एलएलएम कर चुकी हैं और अभी पीएचडी कर रही हैं।
2007 में सुखना लेक क्लब बनाकर देश को दिए कई खिलाड़ी
जगजीत सिंह ने बताया कि रोइंग से इतना कुछ पाने के बाद उन्होंने इसके लिए कुछ करने की ठानी। इसके बाद 2007 में सुखना लेक क्लब बनाया। उसमें 40 बोट, 80 चप्पू और अन्य उपकरणों का प्रबंध किया गया है। वहीं यह पर अभ्यास करके खेलने के बाद कई खिलाड़ी पदक जीत चुके हैं। इतना ही नहीं, 60 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी भी मिली है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का खेल स्तर 15 साल में काफी नीचे आया है। इसे ऊपर लाने के लिए उनके जैसे सभी अवार्ड विजेता खिलाड़ियों को कोच लगाना चाहिए ताकि वह जमीनी स्तर पर छोटे-छोटे खिलाड़ियों को तैयार कर सकें।
इन मुकाबलों में लिया भाग
वर्ष खेल पदक
1994 इंटरनेशनल चैंपियनशिप एक रजत और दो कांस्य
1996 नेशनल चैंपियनशिप स्वर्ण
1999 नेशनल चैंपियनशिप स्वर्ण
2003 दूसरी ऑल इंडिया पुलिस चैंपियनशिप स्वर्ण
2003 दूसरी ऑल इंडिया पुलिस चैंपियनशिप स्वर्ण
साइकिल चलाने का है शौक
जगजीत सिंह जल्लाह को साइकिल चलाने का बहुत शौक है। वह 2001 में इंस्पेक्टर भर्ती होने के बाद काफी समय तक साइकिल से ड्यूटी पर आते रहे। अभी भी वह कई बार शौक के लिए साइकिल चलाते हैं। उन्होंने लोगों को भी अपील की कि वे भी स्वस्थ रहने के लिए साइकिल चलाएं।
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मूलरूप से जिला लुधियाना (पंजाब) से करीब 35 किलोमीटर दूर गांव जल्लाह के रहने वाले जगजीत सिंह फिलहाल पंजाब पुलिस में एसपी यातायात के रूप में मोहाली में कार्यरत हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि 20 फरवरी 1966 को उनका जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था। पिता के सेना में रहने के कारण उनकी मां सुरजीत कौर ने ही उनका पालन-पोषण किया। बचपन से ही खेलों में रुचि थी। उन्होंने स्कूल में ही वर्ष 1977-78 में पहली बार वार्षिक खेलों में भाग लिया था। इसमें वह पहले स्थान पर रहे थे। 1984 में फौज में भर्ती हुए। सेना में ही उनके रोइंग का सफर शुरू हुआ, फिर स्टेट के साथ नेशनल रोइंग चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स, एशिया कप, ऑल इंडिया पुलिस चैंपियनशिप में कई स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर देश की सेवा की। वर्ष 2001 में पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर के तौर पर ज्वाइन किया था।
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कोच से हुए प्रेरित, 10 साल तक रहे कैप्टन
जगजीत सिंह ने बताया कि उन्हें वर्ष 2000 में अर्जुन अवार्ड दिया गया था। वह पंजाब के लिए रोइंग में अर्जुन अवार्ड पाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। वर्ष 2007 में उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
भी मिल चुका है। बताया कि सेना में जाने के बाद जब उन्हें पता चला कि उनके कोच कर्नल पीके ओबरॉय रोइंग में देश के पहले अर्जुन अवार्डी हैं तो उन्होंने भी ठान लिया कि वह भी अर्जुन अवार्ड पाकर रहेंगे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। रोज 8 से 10 घंटे अभ्यास करने लगे। इसकी बदौलत उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक बटोरे। जगजीत सिंह ने बताया कि देश-विदेश में हुए कई मुकाबलों में भाग लेने के अलावा उन्होंने देश की टीम के 10 साल तक बतौर कैप्टन रहे। उन्हें फौज से कई प्रशंसापत्र मिलने के साथ ही राज्य की ओर से महाराजा रणजीत सिंह अवार्ड, अर्जुन अवार्ड, राष्ट्रपति प्रशंसापत्र आदि मिल चुके हैं। जल्लाह ने बताया कि उन्होंने अब तक जो भी मुकाम हासिल किया है उसमें उनकी पत्नी और कोच का बड़ा योगदान है। इसके अलावा उनके पिता जोगिंदर सिंह, माता सुरजीत कौर और पत्नी भूपिंदर कौर का बहुत योगदान है।
बेटा और दो बेटियां भी रोइंग खिलाड़ी
जगजीत सिंह का एक बेटा और दो बेटियां हैं। तीनों रोइंग खिलाड़ी हैं। बेटे चंदनदीप सिंह ने स्टेट मेडल, 14 नेशनल मेडल और एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं। उन्होंने बीए ऑनर्स और एलएलएम की है। अब वह पीएचडी कर रहे हैं। वह 2021 बैच के डीएसएपी हैं। वहीं बेटी डॉ. मनदीप कौर ने नेशनल में रजत पदक जीता है। उन्हें 2018 में स्वास्थ्य विभाग में नौकरी मिल गई है। अभी वह एमडी (गायनी) कर रही हैं। दूसरी बेटी संदीप कौर ने 2022 में हुई नेशनल गेम्स में स्वर्ण और रजत पदक जीता है। वह एलएलएम कर चुकी हैं और अभी पीएचडी कर रही हैं।
2007 में सुखना लेक क्लब बनाकर देश को दिए कई खिलाड़ी
जगजीत सिंह ने बताया कि रोइंग से इतना कुछ पाने के बाद उन्होंने इसके लिए कुछ करने की ठानी। इसके बाद 2007 में सुखना लेक क्लब बनाया। उसमें 40 बोट, 80 चप्पू और अन्य उपकरणों का प्रबंध किया गया है। वहीं यह पर अभ्यास करके खेलने के बाद कई खिलाड़ी पदक जीत चुके हैं। इतना ही नहीं, 60 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी भी मिली है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का खेल स्तर 15 साल में काफी नीचे आया है। इसे ऊपर लाने के लिए उनके जैसे सभी अवार्ड विजेता खिलाड़ियों को कोच लगाना चाहिए ताकि वह जमीनी स्तर पर छोटे-छोटे खिलाड़ियों को तैयार कर सकें।
इन मुकाबलों में लिया भाग
वर्ष खेल पदक
1994 इंटरनेशनल चैंपियनशिप एक रजत और दो कांस्य
1996 नेशनल चैंपियनशिप स्वर्ण
1999 नेशनल चैंपियनशिप स्वर्ण
2003 दूसरी ऑल इंडिया पुलिस चैंपियनशिप स्वर्ण
2003 दूसरी ऑल इंडिया पुलिस चैंपियनशिप स्वर्ण
साइकिल चलाने का है शौक
जगजीत सिंह जल्लाह को साइकिल चलाने का बहुत शौक है। वह 2001 में इंस्पेक्टर भर्ती होने के बाद काफी समय तक साइकिल से ड्यूटी पर आते रहे। अभी भी वह कई बार शौक के लिए साइकिल चलाते हैं। उन्होंने लोगों को भी अपील की कि वे भी स्वस्थ रहने के लिए साइकिल चलाएं।