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जीरकपुर में बिल्डर जगह-जगह से काट रहे दशकों पुराने हरे-भरे पेड़, लोगों का आरोप- बिल्डरोें के प्रोजेक्ट दूर से दिखाई दें, इसलिए काटे पेड़
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जीरकपुर। शहर में बिल्डरों की ओर से अपने प्राजेक्टों को पूरा करने के लिए दशकों पुराने हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। इस मामले में लोगों की ओर से बार-बार शिकायत करने पर भी वन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इस इसके विरोध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों ने सोमवार को जीरकपुर-पटियाला हाईवे पर धरना दिया और बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की।
ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रधान सुखदेव चौधरी, विनय कुमार, कुलविंदर सिंह, अंजू चौधरी, बृजमोहन ग्रोवर, राजेश खन्ना, एचएस चीमा, हितेष मुल्तानी, विजय सेठी ने बताया कि पीरमुछल्ला, ढकोली, गाजीपुर, नगला, ओल्ड अंबाला रोड समेत शहर के अन्य इलाकों में यह पेड़ इसलिए काटे जाते हैं जिससे बिल्डरों के प्रोजेक्ट दूर से साफ दिखाई दे सकें।
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जबकि यह ऐसे पेड़ हैं, जिनपर सरकारी नंबर लगे हुए हैं और बिल्डरों ओर से अपने प्रोजेक्ट के आगे के पेड़ों को या तो काट दिया जाता है या फिर इनकी जड़ों में जहरीली दवाई डालकर सूखा दिया जाता है।
लोगों का यह भी आरोप है कि बिल्डर यह सब वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत के साथ कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बिल्डरों के खिलाफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के जुर्म में मामला दर्ज करने और वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है।
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इस इसके विरोध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों ने सोमवार को जीरकपुर-पटियाला हाईवे पर धरना दिया और बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की।
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ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रधान सुखदेव चौधरी, विनय कुमार, कुलविंदर सिंह, अंजू चौधरी, बृजमोहन ग्रोवर, राजेश खन्ना, एचएस चीमा, हितेष मुल्तानी, विजय सेठी ने बताया कि पीरमुछल्ला, ढकोली, गाजीपुर, नगला, ओल्ड अंबाला रोड समेत शहर के अन्य इलाकों में यह पेड़ इसलिए काटे जाते हैं जिससे बिल्डरों के प्रोजेक्ट दूर से साफ दिखाई दे सकें।
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जबकि यह ऐसे पेड़ हैं, जिनपर सरकारी नंबर लगे हुए हैं और बिल्डरों ओर से अपने प्रोजेक्ट के आगे के पेड़ों को या तो काट दिया जाता है या फिर इनकी जड़ों में जहरीली दवाई डालकर सूखा दिया जाता है।
लोगों का यह भी आरोप है कि बिल्डर यह सब वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत के साथ कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बिल्डरों के खिलाफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के जुर्म में मामला दर्ज करने और वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है।