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भ्रष्टाचार में गिरफ्तार आईएएस पोपली का 30-35 ठेकेदारों के साथ चलता था कमीशन का खेल

Wed, 22 Jun 2022 02:06 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Wed, 22 Jun 2022 02:06 AM IST
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IAS Popli arrested for corruption used to play commission game with 30-35 contractors
मोहाली। भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में विजिलेंस ब्यूरो की ओर से गिरफ्तार किए गए आईएएस संजय पोपली और सहायक सचिव संदीप वत्स को मंगलवार को जिला अदालत पेश किया गया। अदालत में दोनों आरोपियों का रिमांड लेने के लिए विजिलेंस की टीम ने कईं दलीलें रखीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से कई दलीलों का विरोध किया गया। आखिर में अदालत ने दोनों आरोपियों को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। वहीं अदालत से बाहर निकलते समय मीडिया के सवालों पर आईएएस संजय पोपली ने बस एक ही जवाब दिया कि नियम के तहत मैं कुछ नहीं बोल सकता। यह बात कहते हुए वह विजिलेंस टीम की गाड़ी में बैठकर चले गए।
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दोपहर तीन बजे के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने दोनों आरोपियों को जिला अदालत में पेश किया। विजिलेंस ने दलीलें दीं कि आईएएस संजय पोपली पर आरोप है कि वॉटर एवं सीवरेज बोर्ड का सीईओ रहते हुए अपने सहायक सचिव की मदद से ठेकेदार से सात करोड़ से अधिक की रकम के प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जारी होने वाली रकम के लिए एक प्रतिशत कमीशन लिया था। आईएएस संजय पोपली का कमीशन का खेल केवल एक ठेकेदार के साथ नहीं, बल्कि 30-35 ठेकेदारों के साथ चल रहा था। ऐसे में अदालत से मांग करते हैं कि दोनों आरोपियों को सात दिन के पुलिस रिमांड भेजा जाए, ताकि अन्य ठेकेदारों को पूछताछ में शामिल करके आईएएस संजय पोपली की ओर से मांगी जाने वाली कमीशन की रकम के खेल का पर्दाफाश किया जा सके।
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वहीं, दूसरी ओर विजिलेंस की ओर से दी गई दलीलों का बचाव पक्ष ने विरोध किया और कहा कि विजिलेंस के पास वीडियो के अलावा कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने पूरी जांच के बाद ही उक्त दोनों आरोपियों पर केस दर्ज किया है तो पुलिस को रिमांड की क्या जरूरत है। इसी तरह विजिलेंस के अधिकारी जिस वीडियो को आधार बनाकर आईएएस संजय पोपली पर केस दर्ज करने की बात कहते है तो उस वीडियो में आईएएस संजय पोपली का कहीं कोई जिक्र नहीं है और न ही उनकी कोई आवाज इसमें मौजूद है। फिर किस आधार पर विजिलेंस ने आईएएस पोपली और सहायक सचिव के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसके अलावा ठेकेदार की ओर से जब मामले की शिकायत विजिलेंस विभाग को दी गई, तब तो आईएएस पोपली के विभाग का कार्यभार भी नहीं था और साथ ही ठेकेदार से जब कमीशन की रकम फरवरी में मांगी गई थी तो उन्होंने इस मामले की शिकायत देने में इतनी देर क्यों की।
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