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जंगली जीव सुरक्षा सप्ताह के तीसरे दिन भी जुटी भारी भीड़, पहुंचे 2496 सैलानी
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बंगाल टाइगर अपने बच्चों के साथ खेलती हुई।
- फोटो : MOHALI
जीरकपुर। छतबीड़ चिड़ियाघर में चल रहे जंगली जीव सुरक्षा हफ्ते (वाइल्ड लाइफ सेफ्टी वीक) के तीसरे दिन सोमवार को 2496 सैलानी पहुंचे। इस दौरान चिड़ियाघर के विशेषज्ञों ने तय कार्यक्रम के मुताबिक सैलानियों को हाथियों के बारे में अहम जानकारी दी और छात्रों में सवाल-जवाब, पेंटिंग और सुलेख मुकाबले करवाए गए। इस दौरान सैलानियों को जंगली जीवों की सुरक्षा और इनकी महत्ता के प्रति जागरूक किया गया।
छतबीड़ चिड़ियाघर में सोमवार को स्कूली विद्यार्थियों में करवाए गए विभिन्न मुकाबलों में अलग-अलग 26 स्कूलों के 227 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। चिड़ियाघर के फील्ड डायरेक्टर नरेश महाजन ने विद्यार्थियों के साथ रूबरू होते हुए मनुष्य की जिंदगी में जानवरों की महत्ता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवित रहने के लिए कुदरत को बचाना और इसकी संभाल रखना बहुत जरूी है। इसके लिए जंगली जीवों की सुरक्षा हमारे लिए काफी अहम है। क्योंकि जीव जंतु कुदरत का अहम अंग है। इस मौके पर उन्होंने जानवरों के बारे में विद्यार्थियों की ओर से पूछे गए सवालों के भी जवाब भी दिए।
इसके साथ ही विशेषज्ञों ने सैलानियों और विद्यार्थियों को हाथियों के रहन-सहन के साथ उनके बारे में पूरी जानकारी दी गई। नरेश महाजन ने बताया कि चिड़ियाघर में इस समय तीन मादा हाथी हैं। इनमें 60 साल की पार्वती, 43 साल की हेमा और 45 साल की माया शामिल है। साल 2018 में यहां नर हाथी राज मंगल की मौत हो गई थी। विद्यार्थियों के सवालों के जवाब देते एजुकेशन अफसर हरपाल सिंह ने बताया कि हाथियों को तंदुरुस्त रखने के लिए मक्की की रोटी, गन्ना और गुड़ आदि खाने में दिया जाता है। उन्होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि हाथियों की जनसंख्या लगातार कम हो रही है। मौजूदा समय में 50 हजार से कम एशियन हाथी बचे हैं। हरेक 12 अगस्त को हाथियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाथी दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर आयोजित एक वैबिनार में खालसा कॉलेज फॉर वुमन लुधियाना के ज्योलोजी की सहायक प्रोफेसर डॉ. रुपिंद्र कौर जीव-जंतुओं के बारे में जानकारी दी। इसके बाद सहायक प्रोफेसर एचपीयू शिमला डॉ. एसएस बनियाल ने संबोधित किया। इस मौके पर विद्यार्थियों और सैलानियों को वातावरण बचाने का संदेश देते हुए पौधे भी बांटे गए।
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छतबीड़ चिड़ियाघर में सोमवार को स्कूली विद्यार्थियों में करवाए गए विभिन्न मुकाबलों में अलग-अलग 26 स्कूलों के 227 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। चिड़ियाघर के फील्ड डायरेक्टर नरेश महाजन ने विद्यार्थियों के साथ रूबरू होते हुए मनुष्य की जिंदगी में जानवरों की महत्ता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवित रहने के लिए कुदरत को बचाना और इसकी संभाल रखना बहुत जरूी है। इसके लिए जंगली जीवों की सुरक्षा हमारे लिए काफी अहम है। क्योंकि जीव जंतु कुदरत का अहम अंग है। इस मौके पर उन्होंने जानवरों के बारे में विद्यार्थियों की ओर से पूछे गए सवालों के भी जवाब भी दिए।
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इसके साथ ही विशेषज्ञों ने सैलानियों और विद्यार्थियों को हाथियों के रहन-सहन के साथ उनके बारे में पूरी जानकारी दी गई। नरेश महाजन ने बताया कि चिड़ियाघर में इस समय तीन मादा हाथी हैं। इनमें 60 साल की पार्वती, 43 साल की हेमा और 45 साल की माया शामिल है। साल 2018 में यहां नर हाथी राज मंगल की मौत हो गई थी। विद्यार्थियों के सवालों के जवाब देते एजुकेशन अफसर हरपाल सिंह ने बताया कि हाथियों को तंदुरुस्त रखने के लिए मक्की की रोटी, गन्ना और गुड़ आदि खाने में दिया जाता है। उन्होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि हाथियों की जनसंख्या लगातार कम हो रही है। मौजूदा समय में 50 हजार से कम एशियन हाथी बचे हैं। हरेक 12 अगस्त को हाथियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाथी दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर आयोजित एक वैबिनार में खालसा कॉलेज फॉर वुमन लुधियाना के ज्योलोजी की सहायक प्रोफेसर डॉ. रुपिंद्र कौर जीव-जंतुओं के बारे में जानकारी दी। इसके बाद सहायक प्रोफेसर एचपीयू शिमला डॉ. एसएस बनियाल ने संबोधित किया। इस मौके पर विद्यार्थियों और सैलानियों को वातावरण बचाने का संदेश देते हुए पौधे भी बांटे गए।
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