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स्वास्थ्य विभाग : सरकार के नियंत्रण में बिकेगा ब्लैक फंगस का इंजेक्शन, कालाबाजारी रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने डॉक्टरों की सात सदस्यीय कमेटी बनाई

Tue, 18 May 2021 01:37 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Tue, 18 May 2021 01:37 AM IST
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Health Department: Injection of black fungus will be sold under the control of the government, to prevent black marketing, the Haryana government constituted a seven-member committee of doctors
पंचकूला। ब्लैक फंगस बीमारी में कारगर अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने सात सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। प्रदेश स्तर पर गठित सात डॉक्टरों की टीम में ईएनटी, आई, डेंटल, न्यूरो के विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। टीम में रोहतक पीजीआईएमएस से दो, सिविल अस्पताल पंचकूला से दो, पंचकूला निजी अस्पताल से एक, गुरुग्राम के निजी अस्पताल से एक डॉक्टर को शामिल किया गया है।
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कोरोना की आड़ में रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की तरह ही इस इंजेक्शन की कालाबाजारी न हो, इसके लिए सरकार ने इसकी आपूर्ति का जिम्मा स्वयं लिया है। अब यह इंजेक्शन सीधे पीड़ित तक पहुंच सकेगी। कमेटी के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी डायरेक्टर ब्लाइंडनेस कंट्रोल प्रोग्राम हरियाणा के डॉक्टर जगदीप का कहना है कि ब्लैक फंगस जैसी बीमारी से निपटने के लिए अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन केेंद्र सरकार उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा निर्माता कंपनियों से भी इस इंजेक्शन को लिया जा रहा है। सरकार के इस प्रयास से निजी अस्पताल संचालक ज्यादा दामों पर इस इंजेक्शन को बेचकर फायदा नहीं उठा सकेंगे।
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इंजेक्शन की सप्लाई का निर्णय लेगी कमेटी
ब्लैक फंगस बीमारी में उपयोग होने वाले अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन की सप्लाई चेन का निर्धारण प्रदेश सरकार द्वारा गठित कमेटी करेगी। कमेटी निर्णय लेगी कि किस मेडिकल कॉलेज, सरकारी अस्पताल और निजी अस्पताल को कितनी सप्लाई देनी है। निजी अस्पतालों को प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित इंजेक्शन की रकम देनी पड़ेगी। इसके अलावा निर्धारित रकम ही मरीजों से वसूल सकेंगे।
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स्टेरॉयड के अनावश्यक प्रयोग से भी हो रहा ब्लैक फंगस
डिप्टी डायरेक्टर ब्लाइंडनेस कंट्रोल प्रोग्राम हरियाणा के डॉ. जगदीप ने बताया कि पहले यह बीमारी उन लोगों में ज्यादा होती थी, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती थी। जैसे कि ट्रांसप्लांट और कैंसर वाले मरीज या फिर अनकंट्रोल डायबिटिक के मरीज, लेकिन अब कोविड के साथ शुगर का मरीज है, तो कोविड ट्रीटमेंट के दौरान स्टेरॉयड और बायोलॉजिकल के हाईडोज देना जरूरी होता है। इससे बॉडी की रोग प्रतिरोधक क्षमता और भी कम हो जाती है। इसलिए कोविड के बाद ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
ये हैं ब्लैक फंगस के लक्षण
-नाक जाम होना, नाक से काला या लाल स्राव होना।
-गाल की हड्डी में दर्द होना, चेहरे पर एक तरफ दर्द होना या सूजन।
दांत या जबड़े में दर्द, दांत टूटना।
धुंधला या दोहरा दिखाई देना।
सीने में दर्द और सांस में परेशानी। खून में शुगर की ज्यादा नहीं होने दें तथा हाइपर ग्लाइसेमिया से बचें।
कोरोना संक्रमित ऐसे बच सकते हैं
कोरोना से ठीक हुए लोग ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखें।
स्टेरॉयड के इस्तेमाल में समय और डोज का पूरा ध्यान रखें।
एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर के परामर्श से ही करें।
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