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Mohali News: चिट्ठियों से बचत तक... बेटियों के सपनों और बुजुर्गों की जरूरतों का सहारा बना डाकघर
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राष्ट्रीय डाक दिवस पर विशेष
चंडीगढ़ डाक मंडल में सुकन्या समृद्धि के 1.29 लाख खाते सक्रिय, छोटी बचत से भविष्य सुरक्षित करने पर जोर
आरडी, पीपीएफ, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना से लेकर बीमा और डिजिटल बैंकिंग तक कई सुविधाएं एक ही जगह
नीरज कुमार
चंडीगढ़। कभी चिट्ठियों और मनीऑर्डर के लिए पहचाने जाने वाले डाकघर की भूमिका अब तेजी से बदल रही है। डाकघर आम परिवार की छोटी बचत को सुरक्षित रखने के साथ बेटियों की पढ़ाई, बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए भी सहारा बन रहा है। चंडीगढ़ डाक मंडल में सुकन्या समृद्धि योजना के 1,29,022 खाते सक्रिय हैं। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में परिवार बेटियों के भविष्य के लिए छोटी उम्र से ही बचत कर रहे हैं।
250 रुपये से शुरू हो सकती है बेटी के भविष्य की बचत
सुकन्या समृद्धि योजना में बालिका के नाम पर खाता खोला जाता है। इसमें न्यूनतम 250 रुपये से बचत शुरू की जा सकती है, जबकि एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.50 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। खाते में 15 वर्ष तक राशि जमा करनी होती है और परिपक्वता अवधि 21 वर्ष है। वर्तमान में योजना पर 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है। बेटी के 18 वर्ष की आयु पूरी करने या 10वीं कक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए खाते में उपलब्ध राशि के अधिकतम 50 प्रतिशत तक निकासी की सुविधा है। निर्धारित नियमों के तहत विवाह के समय भी खाता बंद किया जा सकता है।
हर महीने की बचत से तैयार हो सकता है बड़ा कोष
एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करना हर परिवार के लिए संभव नहीं होता। ऐसे परिवारों के लिए डाकघर की आवर्ती जमा (आरडी) योजना उपयोगी है। इसमें हर महीने निश्चित राशि जमा की जा सकती है। वर्तमान में आरडी पर 6.7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज है। सावधि जमा में अवधि के अनुसार 6.9 से 7.5 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। वहीं मासिक आय योजना पर 7.4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है।
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बुजुर्गों के लिए भी बचत का सहारा
सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय की जरूरत को देखते हुए वरिष्ठ नागरिक बचत योजना महत्वपूर्ण विकल्प है। इस पर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है। लंबी अवधि की बचत के लिए पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र पर 7.7 प्रतिशत और किसान विकास पत्र पर 7.5 प्रतिशत ब्याज है। किसान विकास पत्र में निवेश की रकम 115 महीने में दोगुनी होती है।
बचत के साथ डिजिटल सुविधा और बीमा भी
ई-बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से आरडी, पीपीएफ और सुकन्या खातों में राशि जमा की जा सकती है। ई-पासबुक से शेष राशि और लेनदेन की जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकती है। सीबीएस डाकघरों के बीच खाते के स्थानांतरण की सुविधा भी उपलब्ध है। डाक विभाग डाक जीवन बीमा और ग्रामीण डाक जीवन बीमा की सुविधा भी देता है। डाक जीवन बीमा का दायरा सरकारी कर्मचारियों के अलावा सार्वजनिक उपक्रम, बैंक, रक्षा और अर्धसैनिक बलों के कर्मचारियों तथा पात्र पेशेवर वर्गों तक है। ग्रामीण डाक जीवन बीमा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों, विशेषकर कमजोर वर्गों और महिला कामगारों तक बीमा सुरक्षा पहुंचाना है।
छोटी बचत बन रही बड़ी जरूरतों का सहारा : कुमार संजीव
प्रवर अधीक्षक डाकघर चंडीगढ़ डिविजन कुमार संजीव ने कहा कि डाकघर अब सिर्फ चिट्ठियां पहुंचाने की व्यवस्था नहीं रह गया है। बचत, बीमा, बैंकिंग, पार्सल और डिजिटल सेवाओं के जरिये यह परिवारों की आर्थिक जरूरतों से जुड़ा है। किसी घर में बेटी के भविष्य के लिए हर महीने थोड़ी रकम जमा हो रही है तो कहीं बुजुर्ग अपनी जमा पूंजी से नियमित आय का आधार बना रहे हैं। यही छोटी बचत समय के साथ परिवार की बड़ी जरूरतों का सहारा बन रही है।
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चंडीगढ़ डाक मंडल में सुकन्या समृद्धि के 1.29 लाख खाते सक्रिय, छोटी बचत से भविष्य सुरक्षित करने पर जोर
आरडी, पीपीएफ, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना से लेकर बीमा और डिजिटल बैंकिंग तक कई सुविधाएं एक ही जगह
नीरज कुमार
चंडीगढ़। कभी चिट्ठियों और मनीऑर्डर के लिए पहचाने जाने वाले डाकघर की भूमिका अब तेजी से बदल रही है। डाकघर आम परिवार की छोटी बचत को सुरक्षित रखने के साथ बेटियों की पढ़ाई, बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए भी सहारा बन रहा है। चंडीगढ़ डाक मंडल में सुकन्या समृद्धि योजना के 1,29,022 खाते सक्रिय हैं। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में परिवार बेटियों के भविष्य के लिए छोटी उम्र से ही बचत कर रहे हैं।
250 रुपये से शुरू हो सकती है बेटी के भविष्य की बचत
सुकन्या समृद्धि योजना में बालिका के नाम पर खाता खोला जाता है। इसमें न्यूनतम 250 रुपये से बचत शुरू की जा सकती है, जबकि एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.50 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। खाते में 15 वर्ष तक राशि जमा करनी होती है और परिपक्वता अवधि 21 वर्ष है। वर्तमान में योजना पर 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है। बेटी के 18 वर्ष की आयु पूरी करने या 10वीं कक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए खाते में उपलब्ध राशि के अधिकतम 50 प्रतिशत तक निकासी की सुविधा है। निर्धारित नियमों के तहत विवाह के समय भी खाता बंद किया जा सकता है।
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हर महीने की बचत से तैयार हो सकता है बड़ा कोष
एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करना हर परिवार के लिए संभव नहीं होता। ऐसे परिवारों के लिए डाकघर की आवर्ती जमा (आरडी) योजना उपयोगी है। इसमें हर महीने निश्चित राशि जमा की जा सकती है। वर्तमान में आरडी पर 6.7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज है। सावधि जमा में अवधि के अनुसार 6.9 से 7.5 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। वहीं मासिक आय योजना पर 7.4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है।
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बुजुर्गों के लिए भी बचत का सहारा
सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय की जरूरत को देखते हुए वरिष्ठ नागरिक बचत योजना महत्वपूर्ण विकल्प है। इस पर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है। लंबी अवधि की बचत के लिए पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र पर 7.7 प्रतिशत और किसान विकास पत्र पर 7.5 प्रतिशत ब्याज है। किसान विकास पत्र में निवेश की रकम 115 महीने में दोगुनी होती है।
बचत के साथ डिजिटल सुविधा और बीमा भी
ई-बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से आरडी, पीपीएफ और सुकन्या खातों में राशि जमा की जा सकती है। ई-पासबुक से शेष राशि और लेनदेन की जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकती है। सीबीएस डाकघरों के बीच खाते के स्थानांतरण की सुविधा भी उपलब्ध है। डाक विभाग डाक जीवन बीमा और ग्रामीण डाक जीवन बीमा की सुविधा भी देता है। डाक जीवन बीमा का दायरा सरकारी कर्मचारियों के अलावा सार्वजनिक उपक्रम, बैंक, रक्षा और अर्धसैनिक बलों के कर्मचारियों तथा पात्र पेशेवर वर्गों तक है। ग्रामीण डाक जीवन बीमा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों, विशेषकर कमजोर वर्गों और महिला कामगारों तक बीमा सुरक्षा पहुंचाना है।
छोटी बचत बन रही बड़ी जरूरतों का सहारा : कुमार संजीव
प्रवर अधीक्षक डाकघर चंडीगढ़ डिविजन कुमार संजीव ने कहा कि डाकघर अब सिर्फ चिट्ठियां पहुंचाने की व्यवस्था नहीं रह गया है। बचत, बीमा, बैंकिंग, पार्सल और डिजिटल सेवाओं के जरिये यह परिवारों की आर्थिक जरूरतों से जुड़ा है। किसी घर में बेटी के भविष्य के लिए हर महीने थोड़ी रकम जमा हो रही है तो कहीं बुजुर्ग अपनी जमा पूंजी से नियमित आय का आधार बना रहे हैं। यही छोटी बचत समय के साथ परिवार की बड़ी जरूरतों का सहारा बन रही है।