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लॉकडाउन के बाद राष्ट्रीय लोक अदालत में ऑनलाइन हुई पहली सुनवाई
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मोहाली। लॉकडाउन के बाद शनिवार को पहली ऑनलाइन राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई। इस दौरान अदालत में सभी केसों की सुनवाई ऑनलाइन हुई। इस ई-नेशनल लोक अदालत में 2066 केसों की सुनवाई के लिए 16 बैंच स्थापित किए गए थे। यहां पर 896 मामलों का निपटारा किया गया। इसके साथ ही 53.33 करोड़ रुपये का मुआवजा भी जारी किया गया। राष्ट्रीय कानूनी सेवा अथॉरिटी से इस ई-नेशनल लोक अदालत का प्रोग्राम जारी किया गया था। कोरोना काल के चलते इस साल राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन नहीं किया जा सका था। लिहाजा दिसंबर में साल की पहली नेशनल लोक अदालत लगाई गई। यह पहली ऐसी लोक अदालत रही जिसमें कोरोना के प्रभावों को देखते हुए ऑनलाइन प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया गया। ई-लोक अदालतों की मॉनेटरिंग मोहाली के जिला सेशन जज और जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी के चेयरमैन आरएस राय ने की।
ई-लोक अदालत में क्रिमनल कंपाउंडेबल ऑफेंस, एनआई एक्ट के मामले, बैंक रिकवरी, एमएसीटी केस, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले, बिजली और पानी के बिलों से जुड़े विवाद, सर्विस मैटर, सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े मामले, रेवेन्यू मामलों के अलावा सिविल मैटर के केस निपटारे के लिए रखे गए। ई-लोक अदालत में 2066 केस निपटारे के लिए आए। जिसमें से 896 केसों का निपटारा किया गया और 53.33 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि भी जारी की गई।
ई-लोक अदालत के लिए जिले में 16 बैच स्थापित किए गए थे। इनमें से 12 बैंच जिला मुख्यालय पर और दो खरड़ में और दो बैंच डेराबस्सी में स्थापित किए गए थे। जिला मुख्यालय पर स्थापित 12 बैंच अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज रजनीश गर्ग, मोनिका गोयल, दविंदर कुमार गुप्ता, गिरीश, चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट दीपिका सिंह, सिविल जज जूनियर डिवीजन अमित बख्शी, हरजिंदर कौर, रवतेश इंदरजीत सिंह, पपनीत, ख्याति गोयल और स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन कमल कांत और इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के प्रजाइडिंग अधिकारी की अगुवाई में स्थापित किए गए थे। इसी तरह डेराबस्सी में बनाए गए दो बैंचों की जिम्मेदारी सिविल जज जूनियर डिवीजन गौरव दत्ता और जगमीत सिंह को सौंपी गई थी। वहीं खरड़ में स्थापित दो बैंचो की अगुवाई एडिशनल सिविल जज सीनियर डिवीजन शिल्पी गुप्ता और सिविल जज जूनियर डिवीजन गरिमा गुप्ता ने की।
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चेयरमैन आरएस राय ने किया अदालतों का दौरा
मोहाली के जिला सेशन जज एवं जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी के चेयरमैन आरएस राय ने जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी की सचिव शिखा गोयल के साथ ई-लोक अदालतों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने लोक अदालत के फायदे बताए। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में मामलों का निपटारा दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर होता है। लिहाजा इसके खिलाफ अपील नहीं की जा सकती। केस का निपटारा होने पर अदालत की फीस भी वापिस कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि ई-लोक अदालत को लेकर लगातार बैठकें की गईं। बार एसोसिएशन को भी प्रोत्साहित कर लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया था। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में बैंक, पावरकॉम, श्रम विभाग और इंश्योरेंस कंपनियों के अधिकारियों को लोक अदालत के लिए प्रेरित किया गया।
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ई-लोक अदालत में क्रिमनल कंपाउंडेबल ऑफेंस, एनआई एक्ट के मामले, बैंक रिकवरी, एमएसीटी केस, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले, बिजली और पानी के बिलों से जुड़े विवाद, सर्विस मैटर, सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े मामले, रेवेन्यू मामलों के अलावा सिविल मैटर के केस निपटारे के लिए रखे गए। ई-लोक अदालत में 2066 केस निपटारे के लिए आए। जिसमें से 896 केसों का निपटारा किया गया और 53.33 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि भी जारी की गई।
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ई-लोक अदालत के लिए जिले में 16 बैच स्थापित किए गए थे। इनमें से 12 बैंच जिला मुख्यालय पर और दो खरड़ में और दो बैंच डेराबस्सी में स्थापित किए गए थे। जिला मुख्यालय पर स्थापित 12 बैंच अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज रजनीश गर्ग, मोनिका गोयल, दविंदर कुमार गुप्ता, गिरीश, चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट दीपिका सिंह, सिविल जज जूनियर डिवीजन अमित बख्शी, हरजिंदर कौर, रवतेश इंदरजीत सिंह, पपनीत, ख्याति गोयल और स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन कमल कांत और इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के प्रजाइडिंग अधिकारी की अगुवाई में स्थापित किए गए थे। इसी तरह डेराबस्सी में बनाए गए दो बैंचों की जिम्मेदारी सिविल जज जूनियर डिवीजन गौरव दत्ता और जगमीत सिंह को सौंपी गई थी। वहीं खरड़ में स्थापित दो बैंचो की अगुवाई एडिशनल सिविल जज सीनियर डिवीजन शिल्पी गुप्ता और सिविल जज जूनियर डिवीजन गरिमा गुप्ता ने की।
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चेयरमैन आरएस राय ने किया अदालतों का दौरा
मोहाली के जिला सेशन जज एवं जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी के चेयरमैन आरएस राय ने जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी की सचिव शिखा गोयल के साथ ई-लोक अदालतों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने लोक अदालत के फायदे बताए। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में मामलों का निपटारा दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर होता है। लिहाजा इसके खिलाफ अपील नहीं की जा सकती। केस का निपटारा होने पर अदालत की फीस भी वापिस कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि ई-लोक अदालत को लेकर लगातार बैठकें की गईं। बार एसोसिएशन को भी प्रोत्साहित कर लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया था। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में बैंक, पावरकॉम, श्रम विभाग और इंश्योरेंस कंपनियों के अधिकारियों को लोक अदालत के लिए प्रेरित किया गया।