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Mohali News: फिल्म सिटी तो दूर, तीन दशक से शहर में ऑडिटोरियम तक नहीं बन पाया
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फिल्म सिटी तो दूर, तीन दशक से शहर में ऑडिटोरियम तक नहीं बन पाया
छोटे से कार्यक्रम के लिए भी कलाकारों को चंडीगढ़ या पंचकूला का करना पड़ता है रुख
माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। कहने को तो शहर को वीआईपी सिटी कहा जाता है। वहीं, इसे पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की भी जान कहा जाता है। पॉलीवुड के कई कलाकार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी इलाके की शान हैं। प्रदेश सरकार यहां पर फिल्म सिटी बनाने से लेकर कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है लेकिन जमीनी स्तर पर हालात यह हैं कि तीन दशक से इलाके में एक ऑडिटोरियम तक नहीं बना पाया है।
इस कारण कलाकारों के साथ शहर के लोगों को छोटे से छोटे समागम के लिए चंडीगढ़ या पंचकूला पर निर्भर होना पड़ता है। 2014 से लेकर अब तक दो बार प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कदम भी बढ़ाया, लेकिन प्रोजेक्ट शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया। इस बार राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं जो खुद एक कलाकार हैं इसलिए इंडस्ट्री के लोगों को उम्मीद है कि अब काम शुरू हो जाएगा लेकिन अभी तक भी प्रोजेक्ट रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।
बता दें कि 2006 में मोहाली जिला बना था। जिले में तीन सब डिवीजन मोहाली, खरड़ और डेराबस्सी आते हैं। इस समय शहर में एक दर्जन से अधिक थिएटर ग्रुप सक्रिय हैं। इसके अलावा 1000 से अधिक छोटे-बड़े शिक्षण संस्थान खुले हुए हैं लेकिन ऑडिटोरियम न होने का खामियाजा सबको भुगतना पड़ रहा है। हालत यह है कि निजी अकादमी में अगर छात्र और युवा जाते हैं तो वे अपने हिसाब से दाम वसूलते हैं। इस वजह से कई बार तो प्रतिभा को बाहर लाने के लिए मंच ही नहीं मिल पाता है। इसे देखते हुए कई बार ऑडिटोरियम बनाने की बात उठी है। इसके लिए गमाडा ने सेक्टर-78 में जगह भी दे दी है लेकिन ग्रांट जारी न होने से अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
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नींवपत्थर से आगे नहीं बढ़ा ऑडिटोरियम का काम
राज्य में 90 के दशक में सरकार ने वाईपीएस चौक के नजदीक सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के लिए भवन बनाने की जमीन थी। लेकिन बाद में इसे कॉमर्शियल जगह बताकर वापस ले लिया गया। इसके बाद 2014 में अकाली-भाजपा की सरकार के समय में पंजाबी कलाकार एवं अभिनेता हरभजन मान जिला योजना कमेटी के चेयरमैन थे। उस समय पंजाब कला भवन की तर्ज पर फेज-8 लेजर वैली में चार एकड़ में 55 करोड़ रुपये की लागत से पहला मल्टी यूटीलिटी ऑडिटोरियम बनाने का नींवपत्थर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने रखा, लेकिन बाद में यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। 2017 में राज्य में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने साढ़े चार साल इस दिशा में कोई काम नहीं किया। चुनाव से ठीक पहले सेक्टर-78 में दोबारा से चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर की तर्ज पर ऑडिटोरियम बनाने का नींवपत्थर रखा। इसके लिए 10 करोड़ रुपये तक मंजूर हुए थे। इसके बाद दिसंबर 2021 में चन्नी सरकार के समय फिर नींवपत्थर रखा गया लेकिन अभी तक वहां एक ईंट भी नहीं लग पाई है।
इलाके की खूबसूरती पर मायानगरी तक है कायल
भले ही मोहाली में फिल्म सिटी या ऑडिटोरियम का प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया है, लेकिन इलाके की खूबसूरती पर मायानगरी तक कायल है। इलाके के कई थाने, पार्क, बस स्टैंड बड़े पर्दे पर अपनी पहचान बना चुके हैं। वीर जारा फिल्म की शूटिंग मुल्लांपुर में हुई थी। इसके अलावा प्री वेडिंग शूट के लिए भी यह सही जगह है, लेकिन इसके बावजूद ऑडिटोरियम बनाने की दिशा में अभी तक काम नहीं हो पाया है।
कई नामी स्टूडियो बने शहर की शान
मोहाली में उत्तरी भारत के कई नामी स्टूडियो स्थापित हो चुके हैं। इससे जहां लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। साथ ही सरकार को राजस्व भी मिल रहा है। नए सेक्टरों में तो नए कलाकार घरों से अपना काम कर रहे हैं। दिल्ली और नोएडा से कई स्टूडियो यहां शिफ्ट हो रहे हैं। सचिन आहूजा समेत कई कलाकारों ने अपने स्टूडियो बनाए हैं। उम्मीद है कि ऑडिटोरियम बनने से इलाके के लोगों को फायदा होगा।
कोट
गमाडा ने जमीन तो अलॉट की है लेकिन अब तक कब्जा नहीं दिया गया है। नगर निगम ने ऑडिटोरियम बनाना है। राज्य में नई सरकार आई है। सरकार ने ऑडिटोरियम की ग्रांट अभी तक जारी नहीं की। इस वजह से इसको बनाने का काम लटका हुआ है। उम्मीद है कि कलाकार होने के नाते सीएम मान इस मांग को ठीक समझकर जल्द इसके लिए ग्रांट जारी करेंगे। ग्रांट जारी होते ही काम शुरू हो जाएगा। -कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर, नगर निगम मोहाली
कोट
90 के दशक में मिली थी जगह, अब तक नहीं मिली ऑडिटोरियम
इलाके में ऑडिटोरियम की मांग तीन दशक से ज्यादा पुरानी है। 90 के दशक में एक बार सरकार से जगह मिली भी थी लेकिन वह वापस ले ली गई। इसके बाद कई बार नींवपत्थर रखे गए लेकिन आज तक इलाके को ऑडिटोरियम नहीं मिल पाया है। ऑडिटोरियम बनने से जहां युवाओं को प्रतिभा निखारने का मौका मिलेगा। वहीं रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। -संजीवन सिंह, नाटककार, प्रधान इप्टा पंजाब
फिल्म के बजट घटने से लेकर रोजगार तक होगा फायदा
पंजाबी इंडस्ट्री ने आज पूरी दुनिया में नाम कमाया है। इतनी पॉपुलर होने के बावजूद यहां अभी तक पंजाब की अपनी फिल्म सिटी नहीं है। पहले कुछ खबरें आई थी कि सरकार की तरफ से इसे बनाने का फैसला किया गया था लेकिन अभी तक ऑडिटोरियम तक पर काम होता नजर नहीं आ रहा है। अगर यहां ऑडिटोरियम और फिल्म सिटी बन जाती है तो यहां के कलाकारों को इससे बहुत फायदा मिलेगा। शूट के लिए कहीं बाहर जाने का खर्च कम होने से लेकर रोजगार तक में मदद मिलेगी। इस काम को जल्द मुकम्मल करना चाहिए। -दलजिंदर बसरा, पंजाबी कलकार और निदेशक
अर्थव्यवस्था की रीढ़ है इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री
मनोरंजन भी हमारे जीवन के लिए उतनी ही जरूरी है जितना खाना-पीना। यह हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। अगर सरकार राज्य की तरक्की चाहती है तो उसे फिल्म सिटी का काम पहली प्राथमिकता से करना चाहिए। इससे ना सिर्फ यहां के कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा बल्कि सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। -गुरमुख गिन्नी, पंजाबी कलाकार
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छोटे से कार्यक्रम के लिए भी कलाकारों को चंडीगढ़ या पंचकूला का करना पड़ता है रुख
माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। कहने को तो शहर को वीआईपी सिटी कहा जाता है। वहीं, इसे पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की भी जान कहा जाता है। पॉलीवुड के कई कलाकार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी इलाके की शान हैं। प्रदेश सरकार यहां पर फिल्म सिटी बनाने से लेकर कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है लेकिन जमीनी स्तर पर हालात यह हैं कि तीन दशक से इलाके में एक ऑडिटोरियम तक नहीं बना पाया है।
इस कारण कलाकारों के साथ शहर के लोगों को छोटे से छोटे समागम के लिए चंडीगढ़ या पंचकूला पर निर्भर होना पड़ता है। 2014 से लेकर अब तक दो बार प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कदम भी बढ़ाया, लेकिन प्रोजेक्ट शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया। इस बार राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं जो खुद एक कलाकार हैं इसलिए इंडस्ट्री के लोगों को उम्मीद है कि अब काम शुरू हो जाएगा लेकिन अभी तक भी प्रोजेक्ट रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।
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बता दें कि 2006 में मोहाली जिला बना था। जिले में तीन सब डिवीजन मोहाली, खरड़ और डेराबस्सी आते हैं। इस समय शहर में एक दर्जन से अधिक थिएटर ग्रुप सक्रिय हैं। इसके अलावा 1000 से अधिक छोटे-बड़े शिक्षण संस्थान खुले हुए हैं लेकिन ऑडिटोरियम न होने का खामियाजा सबको भुगतना पड़ रहा है। हालत यह है कि निजी अकादमी में अगर छात्र और युवा जाते हैं तो वे अपने हिसाब से दाम वसूलते हैं। इस वजह से कई बार तो प्रतिभा को बाहर लाने के लिए मंच ही नहीं मिल पाता है। इसे देखते हुए कई बार ऑडिटोरियम बनाने की बात उठी है। इसके लिए गमाडा ने सेक्टर-78 में जगह भी दे दी है लेकिन ग्रांट जारी न होने से अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
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नींवपत्थर से आगे नहीं बढ़ा ऑडिटोरियम का काम
राज्य में 90 के दशक में सरकार ने वाईपीएस चौक के नजदीक सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के लिए भवन बनाने की जमीन थी। लेकिन बाद में इसे कॉमर्शियल जगह बताकर वापस ले लिया गया। इसके बाद 2014 में अकाली-भाजपा की सरकार के समय में पंजाबी कलाकार एवं अभिनेता हरभजन मान जिला योजना कमेटी के चेयरमैन थे। उस समय पंजाब कला भवन की तर्ज पर फेज-8 लेजर वैली में चार एकड़ में 55 करोड़ रुपये की लागत से पहला मल्टी यूटीलिटी ऑडिटोरियम बनाने का नींवपत्थर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने रखा, लेकिन बाद में यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। 2017 में राज्य में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने साढ़े चार साल इस दिशा में कोई काम नहीं किया। चुनाव से ठीक पहले सेक्टर-78 में दोबारा से चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर की तर्ज पर ऑडिटोरियम बनाने का नींवपत्थर रखा। इसके लिए 10 करोड़ रुपये तक मंजूर हुए थे। इसके बाद दिसंबर 2021 में चन्नी सरकार के समय फिर नींवपत्थर रखा गया लेकिन अभी तक वहां एक ईंट भी नहीं लग पाई है।
इलाके की खूबसूरती पर मायानगरी तक है कायल
भले ही मोहाली में फिल्म सिटी या ऑडिटोरियम का प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया है, लेकिन इलाके की खूबसूरती पर मायानगरी तक कायल है। इलाके के कई थाने, पार्क, बस स्टैंड बड़े पर्दे पर अपनी पहचान बना चुके हैं। वीर जारा फिल्म की शूटिंग मुल्लांपुर में हुई थी। इसके अलावा प्री वेडिंग शूट के लिए भी यह सही जगह है, लेकिन इसके बावजूद ऑडिटोरियम बनाने की दिशा में अभी तक काम नहीं हो पाया है।
कई नामी स्टूडियो बने शहर की शान
मोहाली में उत्तरी भारत के कई नामी स्टूडियो स्थापित हो चुके हैं। इससे जहां लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। साथ ही सरकार को राजस्व भी मिल रहा है। नए सेक्टरों में तो नए कलाकार घरों से अपना काम कर रहे हैं। दिल्ली और नोएडा से कई स्टूडियो यहां शिफ्ट हो रहे हैं। सचिन आहूजा समेत कई कलाकारों ने अपने स्टूडियो बनाए हैं। उम्मीद है कि ऑडिटोरियम बनने से इलाके के लोगों को फायदा होगा।
कोट
गमाडा ने जमीन तो अलॉट की है लेकिन अब तक कब्जा नहीं दिया गया है। नगर निगम ने ऑडिटोरियम बनाना है। राज्य में नई सरकार आई है। सरकार ने ऑडिटोरियम की ग्रांट अभी तक जारी नहीं की। इस वजह से इसको बनाने का काम लटका हुआ है। उम्मीद है कि कलाकार होने के नाते सीएम मान इस मांग को ठीक समझकर जल्द इसके लिए ग्रांट जारी करेंगे। ग्रांट जारी होते ही काम शुरू हो जाएगा। -कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर, नगर निगम मोहाली
कोट
90 के दशक में मिली थी जगह, अब तक नहीं मिली ऑडिटोरियम
इलाके में ऑडिटोरियम की मांग तीन दशक से ज्यादा पुरानी है। 90 के दशक में एक बार सरकार से जगह मिली भी थी लेकिन वह वापस ले ली गई। इसके बाद कई बार नींवपत्थर रखे गए लेकिन आज तक इलाके को ऑडिटोरियम नहीं मिल पाया है। ऑडिटोरियम बनने से जहां युवाओं को प्रतिभा निखारने का मौका मिलेगा। वहीं रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। -संजीवन सिंह, नाटककार, प्रधान इप्टा पंजाब
फिल्म के बजट घटने से लेकर रोजगार तक होगा फायदा
पंजाबी इंडस्ट्री ने आज पूरी दुनिया में नाम कमाया है। इतनी पॉपुलर होने के बावजूद यहां अभी तक पंजाब की अपनी फिल्म सिटी नहीं है। पहले कुछ खबरें आई थी कि सरकार की तरफ से इसे बनाने का फैसला किया गया था लेकिन अभी तक ऑडिटोरियम तक पर काम होता नजर नहीं आ रहा है। अगर यहां ऑडिटोरियम और फिल्म सिटी बन जाती है तो यहां के कलाकारों को इससे बहुत फायदा मिलेगा। शूट के लिए कहीं बाहर जाने का खर्च कम होने से लेकर रोजगार तक में मदद मिलेगी। इस काम को जल्द मुकम्मल करना चाहिए। -दलजिंदर बसरा, पंजाबी कलकार और निदेशक
अर्थव्यवस्था की रीढ़ है इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री
मनोरंजन भी हमारे जीवन के लिए उतनी ही जरूरी है जितना खाना-पीना। यह हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। अगर सरकार राज्य की तरक्की चाहती है तो उसे फिल्म सिटी का काम पहली प्राथमिकता से करना चाहिए। इससे ना सिर्फ यहां के कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा बल्कि सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। -गुरमुख गिन्नी, पंजाबी कलाकार