एक पिता की जिद: शहीद बेटे को लोगों के दिमाग में जिंदा रखने के लिए पूर्व फौजी ने लड़ी जंग, बीस साल तक किया संघर्ष
2019 में मोहाली कॉलेज का नाम शौर्य चक्र विजेता मेजर हरमिंदर पाल सिंह सरकारी कॉलेज रखा गया। 1999 में बेटे की शहादत के बाद से उनके पिता इसलिए संघर्षरत थे।
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देश की सरहदों की रक्षा करते हुए बेटे ने अपनी जान न्योछावर कर दी थी। एक आर्मी अफसर होने के नाते मेरे लिए यह एक गर्व की बात है, लेकिन पिता होने के नाते एक जवान बेटे को खोने का दुख कम नहीं था। ऐसे में मेरी सोच थी कि अपने शहीद बेटे को हमेशा लोगों के दिमाग में जिंदा रखा जाए। साथ ही अपने इलाके के युवाओं को उससे नई प्रेरणा मिल पाए।
बेटे ने मोहाली सरकारी कॉलेज से पढ़ाई की थी तो ऐसे में उसके नाम पर ही वह कॉलेज का नाम देखना चाहते थे। करीब 20 साल तक कई अफसरों और मंत्रियों से गुहार लगाई, पर बात नहीं बनी। लेकिन पूर्व फौजी होने के नाते हिम्मत नहीं हारी। आखिर में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रूपन दियोल बजाज की मदद से पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात की। इसके बाद 2019 में मोहाली कॉलेज का नाम उनके बेटे के नाम पर शौर्य चक्र विजेता मेजर हरमिंदर पाल सिंह सरकारी कॉलेज रखने की मंजूरी मिली। आज बेटे के नाम से शहर में एक सरकारी कॉलेज है जो मुझे शांति प्रदान करता है। यह कहना है शहीद मेजर हरमिंदर पाल सिंह के पिता रिटायर्ड कैप्टन हरपाल सिंह का।
उन्होंने कहा कि आज के युवा मेरे बेटे की तस्वीर को देखते होंगे को देश के लिए गर्व करते होंगे। हरपाल सिंह ने बताया कि वह मुंडी खरड़ के रहने वाले हैं और अभी सेक्टर-70 मोहाली में रहते हैं। उनके बेटे ने अपनी पढ़ाई खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल खरड़ और मोहाली सरकारी कॉलेज से की थी। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने सेना में भर्ती होने का सपना संजोया था। स्कूल में पढ़ते हुए वह एनसीसी में शामिल हो गया था। यहीं से उसका सेना की तरफ रुझान बढ़ा था और फिर उन्हें 18 ग्रेनेडियर्स से कमीशन हासिल किया था।
1999 में शहीद हुए थे मेजर हरमिंदर पाल
13 अप्रैल 1999 में कश्मीर में एक आतंकवादी ऑपरेशन के दौरान वह शहीद हुए थे। भारत सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया था। पंजाब सरकार ने मुंडी खरड़ निवासी मेजर शहीद के नाम का वहां पर एक गेट भी बनाया हुआ है। जो कि खरड़-चंडीगढ़ हाईवे पर खरड़ में है जो युवाओं के अंदर देश प्रेम की एक अलख जगाता है। हालांकि सरकारी कॉलेज का नाम शहीद बेटे के नाम पर रखवाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा।
पिता और दादा की तरह देश सेवा की राह पर चला पोता भी
हरपाल सिंह ने बताया कि मेरे बेटे की तरह अब मेरा पोता भी सेना में जाकर देश सेवा का सपना देख रहा है। पोता नवतेश्वर सिंह हूबहू अपने पिता की तरह ही दिखता है। जैसे उसने अपनी आर्मी में जाने को तैयारी की थी वैसे ही नवतेश्वर सिंह ने भी की। नवतेश्वर को इस समय एयर ऑफिसर के तौर पर भी एज पायलट चुना गया है। वहीं नौ सेना में भी पेपर दे चुका है। 23 जुलाई को आर्मी के लिए इंटरव्यू है। जहां मैं अपने बेटे को देखने के लिए तरसता हूं, वहीं पोते को देखकर ऐसा लगाता है कि जैसे हमारा हरमिंदर पाल यहीं है। इस तरह वह हमारे आसपास ही रहता है, शक्ल-सूरत से देखें तो इसके हावभाव भी बिल्कुल अपने पिता के जैसे ही हैं। वह हमेशा याद आता है। घर का बड़ा बेटा होने के नाते मां की आंखें आज भी उसे पहले ढूंढती रहती हैं।