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Mohali News: सहकारी बैंकों के नए नियमों के खिलाफ भड़की किसान यूनियन, 2 नवंबर को देगी धरना
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खाद-बीज की चिंता के बीच सहकारी बैंकों के नियमों पर किसानों का विरोध
खरड़। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल ने पंजाब के सहकारी बैंकों की ओर से सहकारी सभाओं के पुराने और नए नियमों में बदलाव कर नए निर्देश लागू करने का कड़ा विरोध किया है। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि बैंकों की ओर से लगातार नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिससे किसानों और सहकारी सभाओं को आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खरड़ अनाज मंडी में आयोजित यूनियन की बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि सहकारी बैंकों की ओर से सभाओं को नए नियमों के तहत काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। दो लाख रुपये से अधिक के ऋण और पांच एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों से संबंधित नियमों को लेकर भी किसानों में चिंता है। नेताओं ने कहा कि आलू की बिजाई का समय नजदीक है। ऐसे में किसानों को सहकारी सभाओं के माध्यम से खाद और दवाइयां लेने में दिक्कतें आ रही हैं। नए नियम लागू होने से सहकारी सभाओं को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इन नियमों पर पुनर्विचार कर पुराने नियमों के अनुसार व्यवस्था बहाल करने की मांग की। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि 2 नवंबर को डीएमआर कार्यालय के सामने धरना दिया जाएगा। नेताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। इस मौके पर जसपाल सिंह नियामियां, लविंदर सिंह गिल, संजीव कुमार रूबी, अमरीक सिंह, रणजीत सिंह, रतनजीत सिंह और अमृत सिंह सहित अन्य किसान नेता मौजूद रहे।
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खरड़। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल ने पंजाब के सहकारी बैंकों की ओर से सहकारी सभाओं के पुराने और नए नियमों में बदलाव कर नए निर्देश लागू करने का कड़ा विरोध किया है। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि बैंकों की ओर से लगातार नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिससे किसानों और सहकारी सभाओं को आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खरड़ अनाज मंडी में आयोजित यूनियन की बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि सहकारी बैंकों की ओर से सभाओं को नए नियमों के तहत काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। दो लाख रुपये से अधिक के ऋण और पांच एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों से संबंधित नियमों को लेकर भी किसानों में चिंता है। नेताओं ने कहा कि आलू की बिजाई का समय नजदीक है। ऐसे में किसानों को सहकारी सभाओं के माध्यम से खाद और दवाइयां लेने में दिक्कतें आ रही हैं। नए नियम लागू होने से सहकारी सभाओं को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इन नियमों पर पुनर्विचार कर पुराने नियमों के अनुसार व्यवस्था बहाल करने की मांग की। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि 2 नवंबर को डीएमआर कार्यालय के सामने धरना दिया जाएगा। नेताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। इस मौके पर जसपाल सिंह नियामियां, लविंदर सिंह गिल, संजीव कुमार रूबी, अमरीक सिंह, रणजीत सिंह, रतनजीत सिंह और अमृत सिंह सहित अन्य किसान नेता मौजूद रहे।