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Mohali News: फेज-7 के ईएसआई अस्पताल में 15 साल से रेडियोलॉजिस्ट का इंतजार
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मोहाली। फेज-7 स्थित ईएसआई अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी पिछले 15 साल से बनी हुई है। रोजाना लगभग 10 मरीजों को एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों की जरूरत पड़ती है, लेकिन अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध न होने के कारण उन्हें दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है। इससे मरीजों को न सिर्फ समय और पैसे की बर्बादी झेलनी पड़ती है बल्कि कई बार गंभीर हालात में भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल में आने वाले मरीज बताते हैं कि रेडियोलॉजिस्ट न होने से एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांचें यहां नहीं हो पातीं। उन्हें फेज-6 के सिविल अस्पताल भेज दिया जाता है, जहां पहले से ही भीड़ बहुत ज्यादा रहती है। एक साधारण एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है। कई मरीजों ने बताया कि पिछले कई सालों से कहा जा रहा है कि अल्ट्रासाउंड मशीन लगेगी, लेकिन आज तक नहीं लगी। अस्पताल प्रशासन ने भले ही 6-7 निजी अस्पतालों को इम्पैनल करने की बात कही हो, लेकिन मरीजों का कहना है कि वे अस्पताल काफी दूर हैं। वहां जाने पर भी अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे मुफ्त नहीं होते, बल्कि मरीजों से पैसे वसूले जाते हैं।
एक्स-रे मशीन भी खराब
ईएसआई अस्पताल में लगी एक्स-रे मशीन भी पिछले कुछ दिनों से खराब पड़ी है। मशीन पहले पूरी तरह से फंक्शनल थी, लेकिन एक महीने से इसमें दिक्कत आ रही थी और 4-5 दिन पहले यह पूरी तरह बंद हो गई। फिलहाल मरीजों को एक्स-रे के लिए फेज-6 भेजा जा रहा है। मशीन 2-4 दिनों में ठीक हो जाएगी।- एसएमओ डॉ. हरप्रीत कौर धालीवाल
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पोस्ट ही स्वीकृत नहीं
ईएसआई अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की पोस्ट ही स्वीकृत नहीं है। जल्द ही अस्पताल में नई अल्ट्रासाउंड मशीन लगने वाली है। मशीन इंस्टॉल होते ही सिविल अस्पताल से अनुरोध किया जाएगा कि यहां अस्थायी तौर पर रेडियोलॉजिस्ट की ड्यूटी लगाई जाए। अस्पताल प्रशासन ने पार्ट-टाइम रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए अखबार में विज्ञापन भी जारी किया है। - एसएमओ डॉ. हरप्रीत कौर
मरीजों की मांग- जल्द मिले स्थायी समाधान
स्थानीय लोगों और मरीजों का कहना है कि ईएसआई अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए और एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सुविधाएं यहीं उपलब्ध कराई जाएं। सिविल अस्पताल में भीड़ बहुत रहती है।
फेज-4 निवासी जसप्रीत सिंह बताते हैं कि उन्हें मजबूरन घंटों लाइन में लगना पड़ता है। कई बार तो छोटे बच्चे और बुजुर्ग मरीज भी इस परेशानी की वजह से इलाज अधूरा छोड़कर वापस चले जाते हैं।
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अस्पताल में आने वाले मरीज बताते हैं कि रेडियोलॉजिस्ट न होने से एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांचें यहां नहीं हो पातीं। उन्हें फेज-6 के सिविल अस्पताल भेज दिया जाता है, जहां पहले से ही भीड़ बहुत ज्यादा रहती है। एक साधारण एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है। कई मरीजों ने बताया कि पिछले कई सालों से कहा जा रहा है कि अल्ट्रासाउंड मशीन लगेगी, लेकिन आज तक नहीं लगी। अस्पताल प्रशासन ने भले ही 6-7 निजी अस्पतालों को इम्पैनल करने की बात कही हो, लेकिन मरीजों का कहना है कि वे अस्पताल काफी दूर हैं। वहां जाने पर भी अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे मुफ्त नहीं होते, बल्कि मरीजों से पैसे वसूले जाते हैं।
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एक्स-रे मशीन भी खराब
ईएसआई अस्पताल में लगी एक्स-रे मशीन भी पिछले कुछ दिनों से खराब पड़ी है। मशीन पहले पूरी तरह से फंक्शनल थी, लेकिन एक महीने से इसमें दिक्कत आ रही थी और 4-5 दिन पहले यह पूरी तरह बंद हो गई। फिलहाल मरीजों को एक्स-रे के लिए फेज-6 भेजा जा रहा है। मशीन 2-4 दिनों में ठीक हो जाएगी।- एसएमओ डॉ. हरप्रीत कौर धालीवाल
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पोस्ट ही स्वीकृत नहीं
ईएसआई अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की पोस्ट ही स्वीकृत नहीं है। जल्द ही अस्पताल में नई अल्ट्रासाउंड मशीन लगने वाली है। मशीन इंस्टॉल होते ही सिविल अस्पताल से अनुरोध किया जाएगा कि यहां अस्थायी तौर पर रेडियोलॉजिस्ट की ड्यूटी लगाई जाए। अस्पताल प्रशासन ने पार्ट-टाइम रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए अखबार में विज्ञापन भी जारी किया है। - एसएमओ डॉ. हरप्रीत कौर
मरीजों की मांग- जल्द मिले स्थायी समाधान
स्थानीय लोगों और मरीजों का कहना है कि ईएसआई अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए और एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सुविधाएं यहीं उपलब्ध कराई जाएं। सिविल अस्पताल में भीड़ बहुत रहती है।
फेज-4 निवासी जसप्रीत सिंह बताते हैं कि उन्हें मजबूरन घंटों लाइन में लगना पड़ता है। कई बार तो छोटे बच्चे और बुजुर्ग मरीज भी इस परेशानी की वजह से इलाज अधूरा छोड़कर वापस चले जाते हैं।