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Mohali News: पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारियों का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प
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मोहाली। पुरानी पेंशन, पुराने वेतनमान और विभिन्न भत्तों की बहाली सहित अपनी वित्तीय मांगों को लेकर रविवार को हजारों कर्मचारियों ने मोहाली में विशाल प्रदर्शन किया। पुराना स्केल, पुरानी पेंशन एवं भत्ता बहाली मोर्चा के बैनर तले इन कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित आवास की ओर मार्च किया। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका, जिसके बाद हुई झड़प में कई कर्मचारी घायल हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
झड़प में कई महिला प्रदर्शनकारी भी घायल हुईं, जिन्हें सिविल अस्पताल फेज-6 में भर्ती कराया गया है। हालात बेकाबू होते देख डीएसपी सिटी-2 हरसिमरन सिंह बल पुलिस टीम के साथ प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को प्रिंसिपल सचिव से मिलने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री से मुलाकात की अपनी मांग पर अड़े रहे। बाद में, प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को 15 दिन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि इस अवधि में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात नहीं करवाई गई, तो वे अगली रणनीति के साथ फिर प्रदर्शन करेंगे।
गुरुद्वारा अंब साहिब के सामने हुई रैली को संबोधित करते हुए मोर्चा नेता विक्रम देव सिंह ने सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों से कई वादे किए थे। लेकिन साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में उनकी प्रमुख वित्तीय मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया है। मोर्चा नेताओं ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों पर लागू केंद्र पैटर्न आधारित नए वेतनमान को आर्थिक शोषण बताया। उन्होंने 1007 एसएसए और मिड-डे मील कर्मचारियों को पूर्ण वित्तीय लाभ न दिए जाने का भी मुद्दा उठाया। कर्मचारियों ने लंबित 18 फीसदी महंगाई भत्ता तत्काल जारी करने की मांग दोहराई। उन्होंने ग्रामीण और बॉर्डर एरिया भत्तों समेत 37 प्रकार के बंद किए गए भत्तों की बहाली की भी मांग की।
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प्रमुख वित्तीय मांगें
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना शामिल है। उन्होंने नई पेंशन योजना को समाप्त करने की मांग की। इसके साथ ही, पुराने वेतनमान और विभिन्न भत्तों की बहाली भी उनकी प्रमुख मांग है। कर्मचारियों ने लंबित 18 फीसदी महंगाई भत्ता तत्काल जारी करने की अपील की। ग्रामीण और बॉर्डर एरिया भत्तों सहित 37 प्रकार के बंद किए गए भत्तों को फिर से शुरू करने की मांग भी उठाई गई। मोर्चा नेताओं ने कहा कि सरकार ने इन मांगों को लगातार नजरअंदाज किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के मुद्दे
रैली में 4161 मास्टर कैडर भर्ती से जुड़े 253 शिक्षकों को जारी कारण बताओ नोटिसों का भी विरोध किया गया। नेताओं ने सरकार से इन नोटिसों को तत्काल वापस लेने और शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नए कर्मचारियों को कम वेतनमान देकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शिक्षा विभाग में नियमित किए गए 1007 एसएसए और मिड-डे मील कर्मचारियों को भी पूर्ण वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं। मोर्चा नेताओं ने कच्चे कर्मचारियों, एसोसिएट टीचरों और कंप्यूटर शिक्षकों को नियमित करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
लंबित नीतियां और आयोग की रिपोर्ट
मोर्चा नेताओं ने बताया कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए जारी अधिसूचना अब तक पूरी तरह लागू नहीं की गई है। यह कर्मचारियों के बीच असंतोष का एक बड़ा कारण है। इसके अलावा, छठे पंजाब वेतन आयोग की लंबित रिपोर्ट भी अभी तक जारी नहीं की गई है। इस रिपोर्ट के जारी न होने से कर्मचारियों को वित्तीय लाभ मिलने में देरी हो रही है। नेताओं ने सरकार से इन लंबित मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने सरकार से इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया।
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झड़प में कई महिला प्रदर्शनकारी भी घायल हुईं, जिन्हें सिविल अस्पताल फेज-6 में भर्ती कराया गया है। हालात बेकाबू होते देख डीएसपी सिटी-2 हरसिमरन सिंह बल पुलिस टीम के साथ प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को प्रिंसिपल सचिव से मिलने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री से मुलाकात की अपनी मांग पर अड़े रहे। बाद में, प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को 15 दिन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि इस अवधि में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात नहीं करवाई गई, तो वे अगली रणनीति के साथ फिर प्रदर्शन करेंगे।
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गुरुद्वारा अंब साहिब के सामने हुई रैली को संबोधित करते हुए मोर्चा नेता विक्रम देव सिंह ने सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों से कई वादे किए थे। लेकिन साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में उनकी प्रमुख वित्तीय मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया है। मोर्चा नेताओं ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों पर लागू केंद्र पैटर्न आधारित नए वेतनमान को आर्थिक शोषण बताया। उन्होंने 1007 एसएसए और मिड-डे मील कर्मचारियों को पूर्ण वित्तीय लाभ न दिए जाने का भी मुद्दा उठाया। कर्मचारियों ने लंबित 18 फीसदी महंगाई भत्ता तत्काल जारी करने की मांग दोहराई। उन्होंने ग्रामीण और बॉर्डर एरिया भत्तों समेत 37 प्रकार के बंद किए गए भत्तों की बहाली की भी मांग की।
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प्रमुख वित्तीय मांगें
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना शामिल है। उन्होंने नई पेंशन योजना को समाप्त करने की मांग की। इसके साथ ही, पुराने वेतनमान और विभिन्न भत्तों की बहाली भी उनकी प्रमुख मांग है। कर्मचारियों ने लंबित 18 फीसदी महंगाई भत्ता तत्काल जारी करने की अपील की। ग्रामीण और बॉर्डर एरिया भत्तों सहित 37 प्रकार के बंद किए गए भत्तों को फिर से शुरू करने की मांग भी उठाई गई। मोर्चा नेताओं ने कहा कि सरकार ने इन मांगों को लगातार नजरअंदाज किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के मुद्दे
रैली में 4161 मास्टर कैडर भर्ती से जुड़े 253 शिक्षकों को जारी कारण बताओ नोटिसों का भी विरोध किया गया। नेताओं ने सरकार से इन नोटिसों को तत्काल वापस लेने और शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नए कर्मचारियों को कम वेतनमान देकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शिक्षा विभाग में नियमित किए गए 1007 एसएसए और मिड-डे मील कर्मचारियों को भी पूर्ण वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं। मोर्चा नेताओं ने कच्चे कर्मचारियों, एसोसिएट टीचरों और कंप्यूटर शिक्षकों को नियमित करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
लंबित नीतियां और आयोग की रिपोर्ट
मोर्चा नेताओं ने बताया कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए जारी अधिसूचना अब तक पूरी तरह लागू नहीं की गई है। यह कर्मचारियों के बीच असंतोष का एक बड़ा कारण है। इसके अलावा, छठे पंजाब वेतन आयोग की लंबित रिपोर्ट भी अभी तक जारी नहीं की गई है। इस रिपोर्ट के जारी न होने से कर्मचारियों को वित्तीय लाभ मिलने में देरी हो रही है। नेताओं ने सरकार से इन लंबित मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने सरकार से इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया।