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पुलिसकर्मियों ने विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा, लगाए गंभीर आरोप
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
Updated Tue, 14 Jun 2016 09:47 AM IST
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पुलिसकर्मियों ने विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा,
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस में नौकरी करते समय में अलग-अलग केसों में सजा काट चुके पुलिसकर्मी सोमवार को संघर्ष की राह पर आ गए। इस दौरान उन्होंने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें थोड़ी सी सजा होने पर विभाग ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया। जबकि कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं जो सजा काटने के बाद भी अधिकारियों की कृपा से उच्च पदों पर तैनात हैं। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी बर्खास्त किए गए गए हैं, उनकों बनते लाभ नहीं दिए गए हैं। वही, उनके परिवारों को भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
फेज-4 मोहाली प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस में एएसआई रणजीत सिंह ने बताया कि उन्हें एक केस में डेढ़ साल की सजा हुई थी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपील की। उन्हाेंने 31 साल 7 महीने 7 दिन नौकरी की। रिटायरमेंट वाले दिन, 30 अप्रैल 2011 को उन्हें विभाग ने बर्खास्त कर दिया। वहीं, फरीदकोट से आए एएसआई हरदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान पंजाब में आतंकवाद के समय करीब 33 मुकाबलों में हिस्सा लिया था। अब उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उनके खिलाफ एक शिकायत आई थी और उस शिकायत पर कोर्ट ने उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी और हाईकोर्ट ने उम्र कैद की सजा के बजाय उन्हें 5 साल की सजा सुनाई थी।
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बठिंडा से आए कांस्टेबल अमरजीत ने बताया कि उसका अपनी पत्नी से झगड़ा चल रहा था। उसकी पत्नी उसकी व उसके परिवार वालों की शिकायत पुलिस में दी दी। इसके बाद कोर्ट ने उसे 2 साल की सजा सुनाई थी। सजा काटने के बाद वह पुलिस के सीनियर अफसरों के पास नौकर के लिए गया, लेकिन उसकी किसी ने भी न सुनी। उसे दोबारा नौकरी नहीं मिली। अमरजीत ने कहा कि उसके बाद उसने नौकरी पाने के लिए हाईकोर्ट में अपील फाइल की। हाईकोर्ट ने कहा कि उसे बर्खास्त करना ठीक निर्णय नहीं है। इसके बावजूद भी उसे अब तक नौकरी पर नहीं रखा गया। इस मौके पर गुरचरण सिंह, रणजीत सिंह, हरजिंद्र, जसविंद्रपाल और अमरजीत सिंह मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें थोड़ी सी सजा होने पर विभाग ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया। जबकि कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं जो सजा काटने के बाद भी अधिकारियों की कृपा से उच्च पदों पर तैनात हैं। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी बर्खास्त किए गए गए हैं, उनकों बनते लाभ नहीं दिए गए हैं। वही, उनके परिवारों को भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
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फेज-4 मोहाली प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस में एएसआई रणजीत सिंह ने बताया कि उन्हें एक केस में डेढ़ साल की सजा हुई थी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपील की। उन्हाेंने 31 साल 7 महीने 7 दिन नौकरी की। रिटायरमेंट वाले दिन, 30 अप्रैल 2011 को उन्हें विभाग ने बर्खास्त कर दिया। वहीं, फरीदकोट से आए एएसआई हरदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान पंजाब में आतंकवाद के समय करीब 33 मुकाबलों में हिस्सा लिया था। अब उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उनके खिलाफ एक शिकायत आई थी और उस शिकायत पर कोर्ट ने उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी और हाईकोर्ट ने उम्र कैद की सजा के बजाय उन्हें 5 साल की सजा सुनाई थी।
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बठिंडा से आए कांस्टेबल अमरजीत ने बताया कि उसका अपनी पत्नी से झगड़ा चल रहा था। उसकी पत्नी उसकी व उसके परिवार वालों की शिकायत पुलिस में दी दी। इसके बाद कोर्ट ने उसे 2 साल की सजा सुनाई थी। सजा काटने के बाद वह पुलिस के सीनियर अफसरों के पास नौकर के लिए गया, लेकिन उसकी किसी ने भी न सुनी। उसे दोबारा नौकरी नहीं मिली। अमरजीत ने कहा कि उसके बाद उसने नौकरी पाने के लिए हाईकोर्ट में अपील फाइल की। हाईकोर्ट ने कहा कि उसे बर्खास्त करना ठीक निर्णय नहीं है। इसके बावजूद भी उसे अब तक नौकरी पर नहीं रखा गया। इस मौके पर गुरचरण सिंह, रणजीत सिंह, हरजिंद्र, जसविंद्रपाल और अमरजीत सिंह मौजूद रहे।