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बिना बिजली कनेक्शन के कैसे बनेंगे मकान
ब्यूरो, अमर उजाला/मोहाली
Updated Wed, 22 Jun 2016 01:10 AM IST
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ईको सिटी के अलॉटी
- फोटो : अमर उजाला
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बगैर बिजली कनेक्शन कैसे घर बनाएं। यह सवाल ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) से न्यू चंडीगढ़ स्थित इको सिटी के अलॉटी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि गमाडा की लेटलतीफी इको सिटी के प्लॉट अलॉटियों पर भारी पड़ सकती है। इसकी बड़ी वजह गमाडा का वह नियम बताया जा रहा है, जिसके अनुसार न्यू चंडीगढ़ में गमाडा की ओर से विकसित किए जा रहे इको सिटी के अलॉटियों को तीन साल में मकानों का निर्माण करना होगा।
इको सिटी के अलाटियों पर गमाडा के इस नियम की तलवार लटकी हुई, लेकिन गमाडा नियम बनाकर यह भूल गया कि अलॉटियों के प्लाटों तक पावर लाइन और बिजली कनेक्शन की व्यवस्था ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों को ही करनी है।
अलॉटियों का कहना है कि या तो गमाडा इस बात को स्पष्ट करे कि जो तीन साल का नियम बनाया है, वह उन तब से लागू होगा, जब बिजली कनेक्शन उन्हें उपलब्ध होंगे। हालांकि गमाडा की ओर से अलॉटियों को अब तक ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिला है, लेकिन इससे पहले इको सिटी के अलॉटी संघर्ष के लिए एकजुट होने लगे हैं। अलॉटियों ने गमाडा के उच्चाधिकारियों के अलावा सरकार के प्रतिनिधियों तक अपनी समस्या को पहुंचाने की रणनीति बनाई है, ताकि तीन साल के नियमों का डंडा उन पर न चले।
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इन अलॉटियों ने रखी बात
फेज-1 न्यू चंडीगढ़ स्थित इको सिटी के अलॉटी मोनिका, केसर सिंह, रणेंद्र कुमार सहित अन्य लोगों ने अपनी इस मांग को पूरा कराने के लिए बैठक कर आगामी रणनीति की रूपरेखा तैयार कर ली है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने कनेक्शन के लिए अप्लाई किया है, उन्हें गमाडा जल्द बिजली कनेक्शन उपलब्ध करवाए।
डिवीजनल इंजीनियर को भेजा डिमांड लेटर
अब तक जिन लोगों को बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाए हैं, उन्होंने गमाडा के डिवीजनल इंजीनियर (बिजली) को पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए मांग की गई है कि उन्हें अपने प्लॉटों पर मकान का निर्माण करना है। गमाडा की शर्त है कि तीन साल में प्लॉटों पर घर बनवाना होगा, ऐसे में तय समय निकल जाएगा।
2011 में निकाली थी स्कीम, 1.60 लाख आए आवेदन
जानकारी के मुताबिक यह स्कीम गमाडा ने साल 2011 में निकाली थी। स्कीम के तहत विभिन्न साइज के 836 प्लॉट थे। इनके लिए करीब 1.60 लाख आवेदन आए थे।
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इको सिटी के अलाटियों पर गमाडा के इस नियम की तलवार लटकी हुई, लेकिन गमाडा नियम बनाकर यह भूल गया कि अलॉटियों के प्लाटों तक पावर लाइन और बिजली कनेक्शन की व्यवस्था ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों को ही करनी है।
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अलॉटियों का कहना है कि या तो गमाडा इस बात को स्पष्ट करे कि जो तीन साल का नियम बनाया है, वह उन तब से लागू होगा, जब बिजली कनेक्शन उन्हें उपलब्ध होंगे। हालांकि गमाडा की ओर से अलॉटियों को अब तक ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिला है, लेकिन इससे पहले इको सिटी के अलॉटी संघर्ष के लिए एकजुट होने लगे हैं। अलॉटियों ने गमाडा के उच्चाधिकारियों के अलावा सरकार के प्रतिनिधियों तक अपनी समस्या को पहुंचाने की रणनीति बनाई है, ताकि तीन साल के नियमों का डंडा उन पर न चले।
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इन अलॉटियों ने रखी बात
फेज-1 न्यू चंडीगढ़ स्थित इको सिटी के अलॉटी मोनिका, केसर सिंह, रणेंद्र कुमार सहित अन्य लोगों ने अपनी इस मांग को पूरा कराने के लिए बैठक कर आगामी रणनीति की रूपरेखा तैयार कर ली है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने कनेक्शन के लिए अप्लाई किया है, उन्हें गमाडा जल्द बिजली कनेक्शन उपलब्ध करवाए।
डिवीजनल इंजीनियर को भेजा डिमांड लेटर
अब तक जिन लोगों को बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाए हैं, उन्होंने गमाडा के डिवीजनल इंजीनियर (बिजली) को पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए मांग की गई है कि उन्हें अपने प्लॉटों पर मकान का निर्माण करना है। गमाडा की शर्त है कि तीन साल में प्लॉटों पर घर बनवाना होगा, ऐसे में तय समय निकल जाएगा।
2011 में निकाली थी स्कीम, 1.60 लाख आए आवेदन
जानकारी के मुताबिक यह स्कीम गमाडा ने साल 2011 में निकाली थी। स्कीम के तहत विभिन्न साइज के 836 प्लॉट थे। इनके लिए करीब 1.60 लाख आवेदन आए थे।