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ढकोली रेलवे फाटक : पहले अंडरब्रिज फिर ओवरब्रिज, अब रेल मंत्रालय में फाइल अटकी
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ढकोली रेलवे फाटक पर लगा जाम। संवाद
जीरकपुर। ढकोली रेलवे फाटक पर पहले अंडरब्रिज फिर ओवरब्रिज पर सहमति बनने के बाद काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। चार माह पहले इस मामले की फाइल रेल मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी गई थी, लेकिन आज तक इस पर कोई रेस्पांस नहीं मिला है। इस कारण क्षेत्र के लोग परेशान हैं। विभिन्न सोसाइटियों के लोग रेलवे फाटक पर करीब दो साल से अंडरब्रिज बनाने की मांग कर रहे हैं। इन सोसाइटियों के निवासियों ने इकट्ठे होकर यूनिफाइड रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन का गठन करके डिप्टी कमिश्नर मोहाली को इस संबंध में ज्ञापन भी दिया था।
इसके बाद डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर सितंबर 2023 में क्षेत्र का सर्वे किया गया। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर मोहाली के साथ चंडीगढ़ और अंबाला रेलवे विभाग के अधिकारियों ने मीटिंग करके यहां पर अंडरपास बनाने की संभावना भी जताई। अंडरपास में बारिश के दिनों में पानी भरने को लेकर चिंता जताकर इस मामले पर विचार-विमर्श भी किया गया। सभी अधिकारियों ने मीटिंग में इस अंडरपास को 10 फुट की ऊंचाई छोड़कर बनाने की अपनी सहमति दे दी। इस अंडरपास का बजट करीब 12 करोड़ रुपये तय किया गया। इसमें आधी राशि रेलवे और आधी नगर परिषद द्वारा दिए जाने थे। डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर नगर परिषद ने अपने हिस्से के 5,85,14,000 रुपये तुरंत जारी कर दिए। इसके बाद डीआरएम अंबाला द्वारा टेंडर लगाया जाना था तो उन्होंने डिप्टी कमिश्नर मोहाली से एनओसी की मांग की। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर मोहाली द्वारा फिर से मौके का दौरा किया गया। डिप्टी कमिश्नर मोहाली द्वारा कहा गया कि इसकी ऊंचाई 15 फुट रखी जाए ताकि बड़े वाहन भी यहां से निकल सके। इस दौरान नगर परिषद को कहा गया कि प्राइवेट कंसलटेंट से सर्वे करवाकर इसकी रिपोर्ट दी जाए। सर्वे रिपोर्ट में कहा गया कि यहां पर ओवरब्रिज बनाना चाहिए जिस पर करीब 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च आएंगे। यह सर्वे रिपोर्ट रेलवे विभाग चंडीगढ़ को भेज दी गई। इसके बाद इसे डीआरएम अंबाला को भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार डीआरएम रेलवे ने यह सारी रिपोर्ट और ओवरब्रिज की ड्राइंग को मंजूरी के लिए जनवरी 2025 में रेलवे मंत्रालय बड़ौदा हाउस दिल्ली भेजा। चार महीने से फाइल रेलवे मंत्रालय के पास ही पड़ी है। वह कब तक वहां से पास होकर वापस आएगी और लोगों को ट्रैफिक की समस्या से निजात दिलवाएगी।
अगर यह रेलवे ओवरब्रिज वाली फाइल रेलवे मंत्रालय द्वारा पास करके नहीं भेजा गया तो शहर निवासियों का एक शिष्ट मंडल केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेगा। अगर फिर भी बात नहीं बनी तो इसके लिए किसी भी प्रकार के संघर्ष से पीछे नहीं हटा जाएगा। - कुलभूषण शर्मा, अध्यक्ष, यूनिफाइड रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन।
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यहां पर रेलवे फाटक के दूसरी तरफ पुलिस थाना, अस्पताल जाने के लिए लोगों को फाटक पर फंसना पड़ता है। इससे समय की बर्बादी होती है। इसीलिए यहां रेलवे ओवरब्रिज बनना अनिवार्य है। -सतीश शर्मा, गुरु नानक नगर ढकोली।
कई बार देखने में आया है कि जब रेलवे फाटक बंद होता है, तो एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती है। मरीज इलाज के लिए तड़प रहा होता है। - डॉ अजय यादव, शालीमार एनक्लेव ढकोली
नगर परिषद जीरकपुर पहले अपने हिस्से की रकम तुरंत जमा करवा चुका है। उसके बाद डिजाइन बदलने के कारण इसका बजट 60 से 70 करोड़ तक पहुंच गया था। यह नगर परिषद के बस की बात नहीं है। हमने रेलवे विभाग को ओवरब्रिज बनाने के लिए एनओसी भी जारी कर दी थी। इसके बाद जो रकम हमने जमा करवाई थी, वह हमें वापस मिल गई है। अब फ्लाईओवर बनाने की जिम्मेदारी रेलवे विभाग की ही है। -चरण पाल सिंह एमई, नगर परिषद जीरकपुर।
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इसके बाद डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर सितंबर 2023 में क्षेत्र का सर्वे किया गया। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर मोहाली के साथ चंडीगढ़ और अंबाला रेलवे विभाग के अधिकारियों ने मीटिंग करके यहां पर अंडरपास बनाने की संभावना भी जताई। अंडरपास में बारिश के दिनों में पानी भरने को लेकर चिंता जताकर इस मामले पर विचार-विमर्श भी किया गया। सभी अधिकारियों ने मीटिंग में इस अंडरपास को 10 फुट की ऊंचाई छोड़कर बनाने की अपनी सहमति दे दी। इस अंडरपास का बजट करीब 12 करोड़ रुपये तय किया गया। इसमें आधी राशि रेलवे और आधी नगर परिषद द्वारा दिए जाने थे। डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर नगर परिषद ने अपने हिस्से के 5,85,14,000 रुपये तुरंत जारी कर दिए। इसके बाद डीआरएम अंबाला द्वारा टेंडर लगाया जाना था तो उन्होंने डिप्टी कमिश्नर मोहाली से एनओसी की मांग की। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर मोहाली द्वारा फिर से मौके का दौरा किया गया। डिप्टी कमिश्नर मोहाली द्वारा कहा गया कि इसकी ऊंचाई 15 फुट रखी जाए ताकि बड़े वाहन भी यहां से निकल सके। इस दौरान नगर परिषद को कहा गया कि प्राइवेट कंसलटेंट से सर्वे करवाकर इसकी रिपोर्ट दी जाए। सर्वे रिपोर्ट में कहा गया कि यहां पर ओवरब्रिज बनाना चाहिए जिस पर करीब 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च आएंगे। यह सर्वे रिपोर्ट रेलवे विभाग चंडीगढ़ को भेज दी गई। इसके बाद इसे डीआरएम अंबाला को भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार डीआरएम रेलवे ने यह सारी रिपोर्ट और ओवरब्रिज की ड्राइंग को मंजूरी के लिए जनवरी 2025 में रेलवे मंत्रालय बड़ौदा हाउस दिल्ली भेजा। चार महीने से फाइल रेलवे मंत्रालय के पास ही पड़ी है। वह कब तक वहां से पास होकर वापस आएगी और लोगों को ट्रैफिक की समस्या से निजात दिलवाएगी।
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अगर यह रेलवे ओवरब्रिज वाली फाइल रेलवे मंत्रालय द्वारा पास करके नहीं भेजा गया तो शहर निवासियों का एक शिष्ट मंडल केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेगा। अगर फिर भी बात नहीं बनी तो इसके लिए किसी भी प्रकार के संघर्ष से पीछे नहीं हटा जाएगा। - कुलभूषण शर्मा, अध्यक्ष, यूनिफाइड रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन।
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यहां पर रेलवे फाटक के दूसरी तरफ पुलिस थाना, अस्पताल जाने के लिए लोगों को फाटक पर फंसना पड़ता है। इससे समय की बर्बादी होती है। इसीलिए यहां रेलवे ओवरब्रिज बनना अनिवार्य है। -सतीश शर्मा, गुरु नानक नगर ढकोली।
कई बार देखने में आया है कि जब रेलवे फाटक बंद होता है, तो एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती है। मरीज इलाज के लिए तड़प रहा होता है। - डॉ अजय यादव, शालीमार एनक्लेव ढकोली
नगर परिषद जीरकपुर पहले अपने हिस्से की रकम तुरंत जमा करवा चुका है। उसके बाद डिजाइन बदलने के कारण इसका बजट 60 से 70 करोड़ तक पहुंच गया था। यह नगर परिषद के बस की बात नहीं है। हमने रेलवे विभाग को ओवरब्रिज बनाने के लिए एनओसी भी जारी कर दी थी। इसके बाद जो रकम हमने जमा करवाई थी, वह हमें वापस मिल गई है। अब फ्लाईओवर बनाने की जिम्मेदारी रेलवे विभाग की ही है। -चरण पाल सिंह एमई, नगर परिषद जीरकपुर।