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खस्ताहाल इमारतें, बच्चे कैसे लिखेंगे कामयाबी की इबारतें
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जीरकपुर। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बने एक महीने से ऊपर हो गया है लेकिन अब तक सरकार ने शिक्षा में सुधार करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। ऐसा तब है जब आम आदमी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में शिक्षा व स्वास्थ्य सबसे मुख्य मुद्दा था।
उन्होंने कहा था कि हमारी सरकार आने पर पंजाब के सरकारी स्कूलों को मॉडर्न बना दिया जाएगा और सभी को फ्री शिक्षा दी जाएगी। अभी तक फ्री शिक्षा और मॉडल स्कूल तो बने नहीं। इस कारण बच्चे खस्ताहालत इमारतों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
अमर उजाला ने जीरकपुर के वार्ड नंबर 17 में पड़ते सरकारी एलिमेंट्री बाजीगर बस्ती नगला स्कूल में जाकर वहां का जायजा लिया तो पाया कि इमारत खस्ताहाल हो चुकी है। इतना ही नहीं बच्चों के हिसाब से स्कूल में कमरे भी कम हैं। वहीं जिन कमरों में बच्चे पढ़ रहे हैं, उनमें इतनी दरारें हैं कि बच्चों और शिक्षकों को भी डर लग रहता है। बच्चों के हिसाब से शिक्षक और कमरे दोनों कम हैं।
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स्कूल में तीन कमरे, जरूरत छह की, आधे में चला रहे काम
2009 में स्कूल अपग्रेड हुआ था। उस समय केवल एक ही कमरा था और बच्चे भी कम थे लेकिन धीरे धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई और जगह कम पड़ती गई। इस समय बच्चों के लिए तीन कमरे बने हैं जबकि जरूरत कम से कम छह कमरों की है। स्कूल में छठी से आठवीं तक की तीन कक्षाएं लगती है। छठी में 60 बच्चे, सातवीं में 31 और आठवीं में 40 बच्चे हैं। सरकार के नियमों के अनुसार यदि एक कक्षा में 35 से ज्यादा बच्चे होते हैं तो उस कक्षा को दो सेक्शन में बांट देना चाहिए ताकि बच्चे सही ढंग से पढ़ाई कर सकें लेकिन यहां यदि सेक्शन बढ़ाए जाते हैं तो बच्चे कहां बैठकर पढ़ाई करेंगे, यह भी एक समस्या है।
विभाग को इमारत के बारे में कई बार कहने पर भी सुनवाई नहीं
स्कूल के चेयरमैन गुरमीत सिंह ने बताया कि सरकार ने स्कूलों की बेहतरी के लिए गांव के लोगों की शमूलियत की थी। इसके चलते उन्हें चेयरमैन बनाया गया था। स्कूल में स्टाफ कम है। वहीं इमारत भी छोटी है। इसके लिए वह स्कूल से बात कर शिक्षा विभाग को कई बार लिख चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। स्कूल स्टाफ ने बताया कि स्कूल के पुराने और जरूरी कागजात संभालने के लिए उनके पास एक कमरा था लेकिन गांव वालों के कहने पर वह आंगनबाड़ी को दे दिया गया था और अब उन्हें सामान संभालने में समस्या आ रही है।
स्कूल की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए लेनी पड़ती एनजीओ व प्राइवेट लोगों की मदद
सरकार द्वारा इतनी सहूलतें स्कूलों में नहीं दी जातीं कि बच्चों को किसी चीज की कमी न आए, लेकिन यहां बहुत-सी ऐसी जरूरतें हैं जिनके लिए समाजसेवी संस्थाओं, एनजीओ और प्राइवेट लोगों की मदद लेनी पड़ती है। स्कूल में एक एनजीओ ने वाटर फिल्टर और उसके संभाल के लिए एक कमरा भी बनवाकर दिया गया है। इसके अलावा किसी व्यक्ति ने एलईडी भेंट की है। एक बिल्डर ने भी स्कूल को काफी मदद की है। यदि सरकार द्वारा सभी सहूलतें स्कूलों को दी जाएं तो स्कूल अच्छे और मॉडल बन सकते हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना पड़ेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
स्कूल में स्टाफ व कमरों की कमी है। यदि गांवों को बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी है तो उस हिसाब से सहूलतें भी देनी पड़ेंगी। आप की सरकार में स्कूलों में क्या सुधार किए जाते हैं, यह देखते हैं। -गुरमीत सिंह, चेयरमैन सरकारी एलिमेंट्री स्कूल बाजीगर बस्ती नगला।
समय-समय जो भी ग्रांट स्कूल में आती है, वह लगा दी जाती है। बाकी स्कूल ठीक चल रहा है। सारे शिक्षक अच्छी तरफ और ईमानदारी से अपनी डियूटी निभा रहे हैं। संदीप कुमार, प्रिंसिपल सरकारी एलिमेंट्री स्कूल बाजीगर बस्ती नगला।
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उन्होंने कहा था कि हमारी सरकार आने पर पंजाब के सरकारी स्कूलों को मॉडर्न बना दिया जाएगा और सभी को फ्री शिक्षा दी जाएगी। अभी तक फ्री शिक्षा और मॉडल स्कूल तो बने नहीं। इस कारण बच्चे खस्ताहालत इमारतों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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अमर उजाला ने जीरकपुर के वार्ड नंबर 17 में पड़ते सरकारी एलिमेंट्री बाजीगर बस्ती नगला स्कूल में जाकर वहां का जायजा लिया तो पाया कि इमारत खस्ताहाल हो चुकी है। इतना ही नहीं बच्चों के हिसाब से स्कूल में कमरे भी कम हैं। वहीं जिन कमरों में बच्चे पढ़ रहे हैं, उनमें इतनी दरारें हैं कि बच्चों और शिक्षकों को भी डर लग रहता है। बच्चों के हिसाब से शिक्षक और कमरे दोनों कम हैं।
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स्कूल में तीन कमरे, जरूरत छह की, आधे में चला रहे काम
2009 में स्कूल अपग्रेड हुआ था। उस समय केवल एक ही कमरा था और बच्चे भी कम थे लेकिन धीरे धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई और जगह कम पड़ती गई। इस समय बच्चों के लिए तीन कमरे बने हैं जबकि जरूरत कम से कम छह कमरों की है। स्कूल में छठी से आठवीं तक की तीन कक्षाएं लगती है। छठी में 60 बच्चे, सातवीं में 31 और आठवीं में 40 बच्चे हैं। सरकार के नियमों के अनुसार यदि एक कक्षा में 35 से ज्यादा बच्चे होते हैं तो उस कक्षा को दो सेक्शन में बांट देना चाहिए ताकि बच्चे सही ढंग से पढ़ाई कर सकें लेकिन यहां यदि सेक्शन बढ़ाए जाते हैं तो बच्चे कहां बैठकर पढ़ाई करेंगे, यह भी एक समस्या है।
विभाग को इमारत के बारे में कई बार कहने पर भी सुनवाई नहीं
स्कूल के चेयरमैन गुरमीत सिंह ने बताया कि सरकार ने स्कूलों की बेहतरी के लिए गांव के लोगों की शमूलियत की थी। इसके चलते उन्हें चेयरमैन बनाया गया था। स्कूल में स्टाफ कम है। वहीं इमारत भी छोटी है। इसके लिए वह स्कूल से बात कर शिक्षा विभाग को कई बार लिख चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। स्कूल स्टाफ ने बताया कि स्कूल के पुराने और जरूरी कागजात संभालने के लिए उनके पास एक कमरा था लेकिन गांव वालों के कहने पर वह आंगनबाड़ी को दे दिया गया था और अब उन्हें सामान संभालने में समस्या आ रही है।
स्कूल की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए लेनी पड़ती एनजीओ व प्राइवेट लोगों की मदद
सरकार द्वारा इतनी सहूलतें स्कूलों में नहीं दी जातीं कि बच्चों को किसी चीज की कमी न आए, लेकिन यहां बहुत-सी ऐसी जरूरतें हैं जिनके लिए समाजसेवी संस्थाओं, एनजीओ और प्राइवेट लोगों की मदद लेनी पड़ती है। स्कूल में एक एनजीओ ने वाटर फिल्टर और उसके संभाल के लिए एक कमरा भी बनवाकर दिया गया है। इसके अलावा किसी व्यक्ति ने एलईडी भेंट की है। एक बिल्डर ने भी स्कूल को काफी मदद की है। यदि सरकार द्वारा सभी सहूलतें स्कूलों को दी जाएं तो स्कूल अच्छे और मॉडल बन सकते हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना पड़ेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
स्कूल में स्टाफ व कमरों की कमी है। यदि गांवों को बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी है तो उस हिसाब से सहूलतें भी देनी पड़ेंगी। आप की सरकार में स्कूलों में क्या सुधार किए जाते हैं, यह देखते हैं। -गुरमीत सिंह, चेयरमैन सरकारी एलिमेंट्री स्कूल बाजीगर बस्ती नगला।
समय-समय जो भी ग्रांट स्कूल में आती है, वह लगा दी जाती है। बाकी स्कूल ठीक चल रहा है। सारे शिक्षक अच्छी तरफ और ईमानदारी से अपनी डियूटी निभा रहे हैं। संदीप कुमार, प्रिंसिपल सरकारी एलिमेंट्री स्कूल बाजीगर बस्ती नगला।