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नेहा शौरी पर गोली चलाते वक्त ड्रग्स के नशे में था बलविंदर
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मोहाली। नेहा शौरी मर्डर केस में एक नया खुलासा हुआ है। यह खुलासा बलविंदर सिंह की विसरा रिपोर्ट में समाने आया है। केमिकल परीक्षण की रिपोर्ट में साफ हुआ है कि नेहा शौरी के मर्डर के वक्त बलविंदर सिंह ड्रग्स के नशे में था। केमिकल एग्जामिनर ऑफिस ने खरड़ पुलिस को यह रिपोर्ट भेज दी है।
उल्लेखनीय है कि 29 मार्च को बलविंदर सिंह ने खरड़ की फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की इमारत में घुसकर जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी नेहा शौरी को उनके ऑफिस में गोली मार दी थी। गोली चलाने के बाद बलविंदर ने बिल्डिंग के बाहर खुद को भी गोली मार ली थी। सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद बलविंदर की ऑर्गन्स को केमिकल टेस्टिंग के लिए भेजा गया था, जिसमें छोटी व बड़ी आंत, हार्ट, लीवर, किडनी व ब्लड सैंपल शामिल थे। जांच में पता चला है कि बलविंदर ने ट्रामाटोल नामक प्रतिबंधित ड्रग लिया हुआ था, जो उसके ब्लड, आंत सहित दूसरे आर्गन्स में भी मौजूद था।
नेहा शौरी मर्डर केस में सरकार को काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा, जिसके बाद 4 अप्रैल को पंजाब सरकार ने केस की जांच के लिए एसआईटी बनाई थी। इसमें आईजी रोपड़ रेंज वी नीरजा, एसएसपी मोहाली, एसएसपी रोपड़, एडीसी जनरल रोपड़ व असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर को शामिल किया गया था। इसके बाद 10 अप्रैल को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मामले की जांच एडीजीपी पंजाब व डायरेक्टर ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन प्रबोध कुमार को सौंप दी थी।
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उल्लेखनीय है कि 29 मार्च को बलविंदर सिंह ने खरड़ की फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की इमारत में घुसकर जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी नेहा शौरी को उनके ऑफिस में गोली मार दी थी। गोली चलाने के बाद बलविंदर ने बिल्डिंग के बाहर खुद को भी गोली मार ली थी। सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद बलविंदर की ऑर्गन्स को केमिकल टेस्टिंग के लिए भेजा गया था, जिसमें छोटी व बड़ी आंत, हार्ट, लीवर, किडनी व ब्लड सैंपल शामिल थे। जांच में पता चला है कि बलविंदर ने ट्रामाटोल नामक प्रतिबंधित ड्रग लिया हुआ था, जो उसके ब्लड, आंत सहित दूसरे आर्गन्स में भी मौजूद था।
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नेहा शौरी मर्डर केस में सरकार को काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा, जिसके बाद 4 अप्रैल को पंजाब सरकार ने केस की जांच के लिए एसआईटी बनाई थी। इसमें आईजी रोपड़ रेंज वी नीरजा, एसएसपी मोहाली, एसएसपी रोपड़, एडीसी जनरल रोपड़ व असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर को शामिल किया गया था। इसके बाद 10 अप्रैल को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मामले की जांच एडीजीपी पंजाब व डायरेक्टर ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन प्रबोध कुमार को सौंप दी थी।
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