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विभाग की लाखों की तारे ले गए चोर
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क्रासर - बिजली विभाग की शिकायत पर आठ माह बाद केस दर्ज
खास बात
अभी तक नहीं लग पाया आरोपियों का पता, पुलिस जांच में जुटी
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। फेेज-11 के एरिया में बिजली विभाग की लाइन करीब आठ माह पहले चोरी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने आखिरी अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। लेकिन अभी तक चोरों का पता नहीं लग पाया है। जबकि यह तार लाखों रुपये की है। पावरकॉम द्वारा इस मामले की जांच जाए।
पावरकाम के एसडीओ उप मंडल टी.एल. मेंटीनेंस रोपड़ जसबीर सिंह ने 7 मई 2018 को इस चोरी संबंधी शिकायत दी थी। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने बताया कि 66 के.वी. बिजली टावर लाईन फेज-1 सब-स्टेशन से फेज-9 सब-स्टेशन तथा 220 के.वी. सब-स्टेशन से सेक्टर 68 सब-स्टेशन को जाती लाईन का टावर नंबर 28 तेज आंधी के कारण गिर गया था। विभाग ने उस टावर की तारें इकट्ठी करके मंडी बोर्ड कालोनी के गेट आगे रख दी थीं। नया टावर खड़ा करके वही तारें दोबारा लगाई जानी थीं। जब विभाग के कर्मचारी नया टावर लगाने लगे तब उस चोरी का पता चला था। एसडीओ का कहना था कि चोरी हुई तार की कीमत करीब 2 लाख 10 हजार रुपये बनती थी। पुलिस ने अज्ञात चोरों खिलाफ आई.पी.सी.की धारा 379 तहत केस दर्ज कर लिया है। केस दर्ज करने में आठ महीने का समय लग जना पुलिस विभाग की कारगुजारी पर स्वालिया चिन्ह लगाता है। जिक्रयोग है कि यह पहला मामला नहीं है। इस तरह का पहले भी केस सामने आया था कि जब हाई वोल्टेज टावरों पर लगी अर्थ की तार टूट गई थी। जिसके बाद यह चोरी हो गई थी। लेकिन अभी तक इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
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खास बात
अभी तक नहीं लग पाया आरोपियों का पता, पुलिस जांच में जुटी
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। फेेज-11 के एरिया में बिजली विभाग की लाइन करीब आठ माह पहले चोरी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने आखिरी अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। लेकिन अभी तक चोरों का पता नहीं लग पाया है। जबकि यह तार लाखों रुपये की है। पावरकॉम द्वारा इस मामले की जांच जाए।
पावरकाम के एसडीओ उप मंडल टी.एल. मेंटीनेंस रोपड़ जसबीर सिंह ने 7 मई 2018 को इस चोरी संबंधी शिकायत दी थी। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने बताया कि 66 के.वी. बिजली टावर लाईन फेज-1 सब-स्टेशन से फेज-9 सब-स्टेशन तथा 220 के.वी. सब-स्टेशन से सेक्टर 68 सब-स्टेशन को जाती लाईन का टावर नंबर 28 तेज आंधी के कारण गिर गया था। विभाग ने उस टावर की तारें इकट्ठी करके मंडी बोर्ड कालोनी के गेट आगे रख दी थीं। नया टावर खड़ा करके वही तारें दोबारा लगाई जानी थीं। जब विभाग के कर्मचारी नया टावर लगाने लगे तब उस चोरी का पता चला था। एसडीओ का कहना था कि चोरी हुई तार की कीमत करीब 2 लाख 10 हजार रुपये बनती थी। पुलिस ने अज्ञात चोरों खिलाफ आई.पी.सी.की धारा 379 तहत केस दर्ज कर लिया है। केस दर्ज करने में आठ महीने का समय लग जना पुलिस विभाग की कारगुजारी पर स्वालिया चिन्ह लगाता है। जिक्रयोग है कि यह पहला मामला नहीं है। इस तरह का पहले भी केस सामने आया था कि जब हाई वोल्टेज टावरों पर लगी अर्थ की तार टूट गई थी। जिसके बाद यह चोरी हो गई थी। लेकिन अभी तक इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
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